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बारिश से भवनों के गिरने का बढ़ा खतरा
Updated Mon, 10 Jul 2017 11:11 PM IST
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मधुबन। रुक रुक कर हो रही बारिश से कई सरकारी गैर सरकारी भवनों के जमींदोज होने का खतरा बढ़ गया है। बारिश का सारा पानी जर्जर भवनों और गैर सरकारी बिल्डिंगों में जाम है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
सरकारी भवन की बात करे तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मधुबन के प्रांगण में बनी लगभग तीन दशक पुरानी बिल्डिंग पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। हालांकि कई बार लाखो रुपये खर्च करके उसकी मरम्मत कराई गई लेकिन हालत जस की तस है। इसी बिल्डिंग में टीबी आदि की जांच और दवाएं रखी जाती है जो कभी भी जमींदोज हो सकती है। यही हाल कस्बा मधुबन में स्थित सहकारी संघ भवन की है कि दशक पूर्व बनी इस बिल्डिंग में आधा दर्जन से अधिक किरायेदार है। बिल्डिंग में बारिश का पानी तो भरा ही रहता है। ऊपर से छत भी टपकने से छत काफी जर्जर हो चुकी है जो कभी भी जमींदोज हो सकती है। ऐसी तमाम एएनएम सेंटर है जो कभी भी धराशाई हो सकते हैं।
इसी तरह कस्बे में कई ऐसी बिल्डिंग हैं जो दशकों पुरानी है। जिनमें कई दूकानदार अपना जान जोखिम में डालकर दुकान चलाते है। जबकि बारिश का पानी इन्हीं बिल्डिंगों में कई दिनों तक जाम रहता है। सड़क उच्चीकरण और पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से यह समस्या ज्यादा आ रही है। बरसात का पानी दूकानों और मकानों में भर रहा है। जिससे मकान जर्जर हो चुके है। ऐसी दशा में उन्हें डिस्पोज कर देना चाहिए जिससे कोई अनहोनी होने से बचा जा सके।इस सम्बंध में उप जिलाधिकारी सुरेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि जर्जर सरकारी और गैर सरकारी बिल्डिंग को चिह्नित कर उचित कार्यवाई की जाएगी।
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सरकारी भवन की बात करे तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मधुबन के प्रांगण में बनी लगभग तीन दशक पुरानी बिल्डिंग पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। हालांकि कई बार लाखो रुपये खर्च करके उसकी मरम्मत कराई गई लेकिन हालत जस की तस है। इसी बिल्डिंग में टीबी आदि की जांच और दवाएं रखी जाती है जो कभी भी जमींदोज हो सकती है। यही हाल कस्बा मधुबन में स्थित सहकारी संघ भवन की है कि दशक पूर्व बनी इस बिल्डिंग में आधा दर्जन से अधिक किरायेदार है। बिल्डिंग में बारिश का पानी तो भरा ही रहता है। ऊपर से छत भी टपकने से छत काफी जर्जर हो चुकी है जो कभी भी जमींदोज हो सकती है। ऐसी तमाम एएनएम सेंटर है जो कभी भी धराशाई हो सकते हैं।
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इसी तरह कस्बे में कई ऐसी बिल्डिंग हैं जो दशकों पुरानी है। जिनमें कई दूकानदार अपना जान जोखिम में डालकर दुकान चलाते है। जबकि बारिश का पानी इन्हीं बिल्डिंगों में कई दिनों तक जाम रहता है। सड़क उच्चीकरण और पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से यह समस्या ज्यादा आ रही है। बरसात का पानी दूकानों और मकानों में भर रहा है। जिससे मकान जर्जर हो चुके है। ऐसी दशा में उन्हें डिस्पोज कर देना चाहिए जिससे कोई अनहोनी होने से बचा जा सके।इस सम्बंध में उप जिलाधिकारी सुरेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि जर्जर सरकारी और गैर सरकारी बिल्डिंग को चिह्नित कर उचित कार्यवाई की जाएगी।
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