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जिले में अतिकुपोषित बच्चों की भरमार, फिर भी एनआरसी खाली
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सरकार के पोषण मुक्त अभियान को उसी के जिम्मेेदार विभाग पलीता लगा रहे है। जिले में कुपोषण के शिकार मरीजों की संख्या 43 हजार से ऊपर है। इसमें अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 8996 तो कुपोषित बच्चों की संख्या 34725 है। बावजूद कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए सदर अस्पताल में बने पोषण पुर्नवास केंद्र में केवल तीन बच्चे भर्ती हैं। ऐसे में साफ है कि कुपोषण दूर करने वाले महिला बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग अपनी जिम्मेदारी के प्रति कितने गंभीर हैं।
बताते चलें कि जिले के 9 ब्लॉकों के 2500 से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्रों में दो लाख 62 हजार बच्चे पंजीकृत है। इन केंद्रों में बच्चों का वजन कराया गया था। जहां 45 हजार से ज्यादा बच्चे कुपोषित पाए गए थे, जबकि 13 हजार से ज्यादा बच्चे अतिकुपोषित मिले थे। सरकार द्वारा कुपोषण को दूर करने के लिए जिला अस्पताल में 10 बेड का एनआरसी केंद्र बनाया गया है, जिसमें अतिकुपोषित बच्चों का इलाज किया जाता है। जिले से कुपोषण दूर करने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास की है। जहां स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसके लिए 9 ब्लॉकों में 18 आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) टीम गठित की गई है, जो कि रोजाना केंद्रों में जाकर बच्चों का जांच कर गंभीर कुपोषित बच्चों को एनआरसी (पोषण पुर्नवास केेंद्र ) में भर्ती कराती हैं। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी जांच कर कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराया जाता है, लेकिन दोनों ही अपने- अपने जिम्मेदारी ठीक से निर्वाह नहीं कर रहे है। हालात यह है जिले में कुपोषित बच्चों की भरमार होने के बाद भी 10 बेड वाले एनआरसी में केवल तीन बच्चों का ही इलाज किया जा रहा है।
इनसेट
महिला बाल विकास का दावा कम हुआ कुपोषण
मऊ। जिला कार्यक्रम अधिकारी केएम पांडेय की मानें तो जिले में कुपोषितों की संख्या पहले की तुलना में काफी कम हुआ है। उनका दावा है कि नवबंर 2018 में जिले में अतिकुपोषित की संख्या 11265 थी, जो कि वर्तमान में घटकर 8996 तक पहुंच गई है। वहीं कुपोषित बच्चों की संख्या 40 हजार 336 से 34,725 तक पहुंच गई है।
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बताते चलें कि जिले के 9 ब्लॉकों के 2500 से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्रों में दो लाख 62 हजार बच्चे पंजीकृत है। इन केंद्रों में बच्चों का वजन कराया गया था। जहां 45 हजार से ज्यादा बच्चे कुपोषित पाए गए थे, जबकि 13 हजार से ज्यादा बच्चे अतिकुपोषित मिले थे। सरकार द्वारा कुपोषण को दूर करने के लिए जिला अस्पताल में 10 बेड का एनआरसी केंद्र बनाया गया है, जिसमें अतिकुपोषित बच्चों का इलाज किया जाता है। जिले से कुपोषण दूर करने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास की है। जहां स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसके लिए 9 ब्लॉकों में 18 आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) टीम गठित की गई है, जो कि रोजाना केंद्रों में जाकर बच्चों का जांच कर गंभीर कुपोषित बच्चों को एनआरसी (पोषण पुर्नवास केेंद्र ) में भर्ती कराती हैं। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी जांच कर कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराया जाता है, लेकिन दोनों ही अपने- अपने जिम्मेदारी ठीक से निर्वाह नहीं कर रहे है। हालात यह है जिले में कुपोषित बच्चों की भरमार होने के बाद भी 10 बेड वाले एनआरसी में केवल तीन बच्चों का ही इलाज किया जा रहा है।
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महिला बाल विकास का दावा कम हुआ कुपोषण
मऊ। जिला कार्यक्रम अधिकारी केएम पांडेय की मानें तो जिले में कुपोषितों की संख्या पहले की तुलना में काफी कम हुआ है। उनका दावा है कि नवबंर 2018 में जिले में अतिकुपोषित की संख्या 11265 थी, जो कि वर्तमान में घटकर 8996 तक पहुंच गई है। वहीं कुपोषित बच्चों की संख्या 40 हजार 336 से 34,725 तक पहुंच गई है।
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