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उंदुरा में संतों की मजार पर उर्स की तैयारी तेज
Updated Mon, 02 Jul 2018 12:56 AM IST
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स्थानीय तहसील अंतर्गत स्थित उंदुरा गांव में दो सूफी संतों की मजार पर प्रत्येक वर्ष लगने वाले दो दिवसीय उर्स की तैयारियां जोरों पर है। दूर-दूर से जाइरीन के आने का सिलसिला तेज हो गया है। मजार पर मेले जैसा माहौल हो गया है। उर्स में अकीदतमंदों की सुरक्षा व शांति व्यवस्था के लिए पुलिस ने रविवार को उर्स स्थल का जायजा लिया। वहीं वर्तमान गद्दीनशीं शाह मुहम्मद इजहार अहमद मोइनी की तरफ से आने वाले जायरीनों की सुविधा के लिए सारे इंतजाम किए गए हैं।
मधुबन दोहरीघाट मार्ग पर स्थित उंदुरा में दो सूफी संतों की मजार है। इसमें शाह अहमद मोइनुद्दीन अहमद का 70 वां व दूसरे संत शाह अहमद मुख्तार का 32 वां उर्स मनाया जाएगा। मेला चार जुलाई से शुरू होकर पांच जुलाई को कौव्वाली के बाद समापन होगा। दोनों सूफी संतो के बारे में किवंदंतियां तो बहुत है लेकिन आज भी सांप्रदायिक एकता की मिसाल दोनों फकीरों की मजारों पर आने वाले अकीदतमंद रोते हुए आते हैं और हंसते हुए जाते हैं। सैकड़ों भूत प्रेतों से ग्रसित लोग मजारों पर मत्था टेकने मात्र से उनका दुख दूर हो जाता है। इस अवसर पर पुलिस, महिला पुलिस, फायर ब्रिगेड, चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था आदि से लेकर साफ-सफाई, टेंट, रोशनी, लंगर आदि की व्यवस्था गद्दीनशीं शाह मुहम्मद इजहार अहमद मोइनी की तरफ से किया जाता है।
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मधुबन दोहरीघाट मार्ग पर स्थित उंदुरा में दो सूफी संतों की मजार है। इसमें शाह अहमद मोइनुद्दीन अहमद का 70 वां व दूसरे संत शाह अहमद मुख्तार का 32 वां उर्स मनाया जाएगा। मेला चार जुलाई से शुरू होकर पांच जुलाई को कौव्वाली के बाद समापन होगा। दोनों सूफी संतो के बारे में किवंदंतियां तो बहुत है लेकिन आज भी सांप्रदायिक एकता की मिसाल दोनों फकीरों की मजारों पर आने वाले अकीदतमंद रोते हुए आते हैं और हंसते हुए जाते हैं। सैकड़ों भूत प्रेतों से ग्रसित लोग मजारों पर मत्था टेकने मात्र से उनका दुख दूर हो जाता है। इस अवसर पर पुलिस, महिला पुलिस, फायर ब्रिगेड, चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था आदि से लेकर साफ-सफाई, टेंट, रोशनी, लंगर आदि की व्यवस्था गद्दीनशीं शाह मुहम्मद इजहार अहमद मोइनी की तरफ से किया जाता है।
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