{"_id":"5a428a424f1c1bce6d8b6492","slug":"191514310210-mau-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भागवत श्रवण से मनुष्य को परमानंद की प्राप्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भागवत श्रवण से मनुष्य को परमानंद की प्राप्ति
Updated Tue, 26 Dec 2017 11:13 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोपागंज। भागवत कथा में जीवन का सार तत्व मौजूद है। मानव को निर्मल मन और स्थिर चित्त के साथ कथा श्रवण करने की आवश्यकता है। भागवत श्रवण से मनुष्य को परमानंद की प्राप्ति होती है। यह बातें क़स्बा के प्राचीन शिवमंदिर में मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक संगीतमय श्री भागवत कथा के प्रथम दिन कथा वाचक श्री अनुपानन्द जी महराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने धुंधकारी चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मसात कर लेें तो जीवन से सारी उलझने समाप्त हो जाएगी। द्रौपदी, कुंती महाभागवत नारी है। कुंती स्तुति को विस्तार पूर्वक समझाते हुए परीक्षित जन्म एंव शुकदेव आगमन की कथा सुनाई। अंत में संगीत एवं झांकी ने सबको कृष्ण रंग में सराबोर कर दिया। पश्चात गोकर्ण की कथा सुनाई गई। शास्त्री जी महाराज ने कहा कि भगवान की लीला अपरंपार है। वे अपनी लीलाओं के माध्यम से मनुष्य व देवताओं के धर्मानुसार आचरण करने के लिए प्रेरित करते हैं। श्रीमद्भागवत कथा के महत्व को समझाते हुए कहा कि भागवत श्रवण प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है। चित्त की स्थिरता के साथ ही श्रीमद्भागवत कथा सुननी चाहिए। भागवत श्रवण मनुष्य केे संपूर्ण क्लेश को दूर कर भक्ति की ओर अग्रसर करती है। उन्होंने अच्छे ओर बुरे कर्मों की परिणति को विस्तार से समझाते हुए आत्मदेव के पुत्र धुंधकारी ओर गौमाता के पुत्र गोकरण के कर्मों के बारे में विस्तार से वृतांत समझाया। इस अवसर पर आयोजक कर्ता समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष शैलेंद्र यादव साधू ,ओम प्रकाश गुप्ता ,पंकज राय प्रवीण चौरसिया ,मुलायम यादव इत्यादि मौजूद रहे।
विज्ञापन
उन्होंने धुंधकारी चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मसात कर लेें तो जीवन से सारी उलझने समाप्त हो जाएगी। द्रौपदी, कुंती महाभागवत नारी है। कुंती स्तुति को विस्तार पूर्वक समझाते हुए परीक्षित जन्म एंव शुकदेव आगमन की कथा सुनाई। अंत में संगीत एवं झांकी ने सबको कृष्ण रंग में सराबोर कर दिया। पश्चात गोकर्ण की कथा सुनाई गई। शास्त्री जी महाराज ने कहा कि भगवान की लीला अपरंपार है। वे अपनी लीलाओं के माध्यम से मनुष्य व देवताओं के धर्मानुसार आचरण करने के लिए प्रेरित करते हैं। श्रीमद्भागवत कथा के महत्व को समझाते हुए कहा कि भागवत श्रवण प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है। चित्त की स्थिरता के साथ ही श्रीमद्भागवत कथा सुननी चाहिए। भागवत श्रवण मनुष्य केे संपूर्ण क्लेश को दूर कर भक्ति की ओर अग्रसर करती है। उन्होंने अच्छे ओर बुरे कर्मों की परिणति को विस्तार से समझाते हुए आत्मदेव के पुत्र धुंधकारी ओर गौमाता के पुत्र गोकरण के कर्मों के बारे में विस्तार से वृतांत समझाया। इस अवसर पर आयोजक कर्ता समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष शैलेंद्र यादव साधू ,ओम प्रकाश गुप्ता ,पंकज राय प्रवीण चौरसिया ,मुलायम यादव इत्यादि मौजूद रहे।
विज्ञापन