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तीन माह से पैदल पुल बंद, खतरा बरकरार
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इंदारा जंक्शन पर यात्री सुविधाओं का अभाव है। जहां भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त टिकट खिड़की खोलने की मांग अभी तक पूरी नहीं हुई तो वहीं जर्जर पैदल पुल की भी मरम्मत न होने उसे तीन माह से बंद कर दिया गया है। ऐसे में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जंक्शन होने के चलते कुछ ट्रेनों को छोड़कर सभी ट्रेनों का ठहराव होने से यात्रियों का भीड़ बनी रहती है। सुविधाओं की लगातार मांग के बावजूद अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे।
जंक्शन से रोजाना वाराणसी, मऊ, बलिया, गोरखपुर, सूरत, मुंबई, दिल्ली की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों की आवाजाही है। खुला प्लेटफार्म होने से खतरे की संभावना बनी रहती है। प्लेटफार्म दो ओर तीन नंबर पर ट्रेनों का ठहराव होने पर यात्री पटरी को पार कर ट्रेन पकड़ते है। वजह रेलवे द्वारा तीन माह पूर्व जर्जर ओवरब्रिज को बंद कर देना है। अब तक जर्जर पुल की मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो सका है। यहीं नहीं बस्ती से यहां ट्रेन आने पर लोग उत्तरी छोर से ही बाहर निकलते व प्रवेश करते हैं। प्रकाश व्यवस्था भी बदहाल होने से स्टेशन पर अंधेरा पसरा होना आम बात है।
इसके अलावा ट्रेप के आगमन और प्रस्थान को प्रदर्शित करने वाला डिस्पले बोर्ड भी खराब पड़ा है। एक ही टिकट खिड़की होने पर यात्रियों की भीड़ का दबाव बना रहने से कभी कभी लोगों की ट्रेन छूट जा रही। एक और खिड़की खोलने की मांग पर रेलवे ने अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया है। अतिरिक्त टिकट खिड़की का प्रस्ताव भी सालों से अधर में है। जबकि सर्वर फेल होने के चलते आए दिन आरक्षण काउंटर बंद हो जा रहा। ऐसे में लोगों को मुख्यालय आकर आरक्षण कराना पड़ रहा। क्षेत्र के धमेंद्र यादव, प्रभाकर सिंह, गुड्डू सिंह, रितेश सिंह, विजयी राजभर, वकील अहमद, जमील अख्तर ने बताया कि विभाग को कई बार शिकायत की गई। लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया गया।
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कोट
यात्री सुविधाओं को मुहैया कराने का पूरा प्रयास चल रहा है। इसके लिए मुख्यालय को पत्र भी लिखा गया है।
- मुरली मनोहर सिंह, स्टेशन अधीक्षक
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जंक्शन से रोजाना वाराणसी, मऊ, बलिया, गोरखपुर, सूरत, मुंबई, दिल्ली की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों की आवाजाही है। खुला प्लेटफार्म होने से खतरे की संभावना बनी रहती है। प्लेटफार्म दो ओर तीन नंबर पर ट्रेनों का ठहराव होने पर यात्री पटरी को पार कर ट्रेन पकड़ते है। वजह रेलवे द्वारा तीन माह पूर्व जर्जर ओवरब्रिज को बंद कर देना है। अब तक जर्जर पुल की मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो सका है। यहीं नहीं बस्ती से यहां ट्रेन आने पर लोग उत्तरी छोर से ही बाहर निकलते व प्रवेश करते हैं। प्रकाश व्यवस्था भी बदहाल होने से स्टेशन पर अंधेरा पसरा होना आम बात है।
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इसके अलावा ट्रेप के आगमन और प्रस्थान को प्रदर्शित करने वाला डिस्पले बोर्ड भी खराब पड़ा है। एक ही टिकट खिड़की होने पर यात्रियों की भीड़ का दबाव बना रहने से कभी कभी लोगों की ट्रेन छूट जा रही। एक और खिड़की खोलने की मांग पर रेलवे ने अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया है। अतिरिक्त टिकट खिड़की का प्रस्ताव भी सालों से अधर में है। जबकि सर्वर फेल होने के चलते आए दिन आरक्षण काउंटर बंद हो जा रहा। ऐसे में लोगों को मुख्यालय आकर आरक्षण कराना पड़ रहा। क्षेत्र के धमेंद्र यादव, प्रभाकर सिंह, गुड्डू सिंह, रितेश सिंह, विजयी राजभर, वकील अहमद, जमील अख्तर ने बताया कि विभाग को कई बार शिकायत की गई। लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया गया।
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यात्री सुविधाओं को मुहैया कराने का पूरा प्रयास चल रहा है। इसके लिए मुख्यालय को पत्र भी लिखा गया है।
- मुरली मनोहर सिंह, स्टेशन अधीक्षक