{"_id":"5c016831bdec22413e0580da","slug":"181543596081-mau-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विश्व एड्स दिवस आज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विश्व एड्स दिवस आज
Updated Fri, 30 Nov 2018 10:11 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मऊ। जिले में एचआईवी पाजिटिव मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। सरकार और कई संगठनों के प्रयास के चलते लोगों में जागरूकता बढ़ने पर लोग सदर अस्पताल में बने एआरटी (एंटी रेट्रो वायरल थिरेपी) पहुंच रहे है। जहां जांच में पॉजिटीव मिलने पर दवा का लाभ ले रहे है। इसके चलते 2014 से एआरटी के संचालित होने से 30 नवंबर तक जिले में 2197 मरीज चिह्नित किए जा चुके है।
सदर अस्पताल में बना एआरटी (एंटी रेट्रो वायरल थिरेपी) सेंटर के आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों से ज्यादा इस जानलेवा बीमारी की चपेट में महिलाएं हैं। पिछले तीन सालों का आकड़ा देखें तो पीड़ित गर्भवती महिलाओं के ग्राफ में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई हैं। जहां एड्स (एक्वॉयर्ड इम्यूनो डिफिसिएंसी सिंड्रोम) जैसी भयानक बीमारी से पार पाना अभी भी चिकित्सा जगत के लिए चुनौती बना हुआ है।
जिला अस्पताल स्थित एआरटी सेंटर के रिकार्ड के अनुसार मार्च 2014 से अब तक कुल 2197 मरीज पंजीकृत हो चुके हैं। आंकड़ों में गौर करे तो मार्च 2014 में एआरटी खुलने पर 2014-15 में 365 मरीज पॉजिटीव मिले थे। वहीं 2015-16 में यह संख्या 487 तो 2016-17 में 470 और 2017-18 में यह संख्या 495 पहुंची। वहीं 2018-19 30 नवंबर तक एआरटी में 380 मरीज चिह्नित किए जा चुके है। यह वे मरीज हैं जो एआरटी सेंटर पर रजिस्ट्रेशन कराकर नियमित काउंसिलिंग और दवा करा रहे हैं। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में ऐसे भी मरीज हैं जो कहीं और इलाज करा रहे हैं या फिर हर दिन घुट-घुट कर मर रहे हैं।
विज्ञापन
एआरटी प्रभारी शिवेंद्र बहादुर सिंह के अनुसार पंजीकृत गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव भी कराया जा चुका हैं, जहां नियमित दवा और जांच के चलते नवजात को एचआईवी के लक्षण से बचा लिया गया है। एचआईवी पॉजिटिव होने से अभी तक एआरटी में पंजीकृत मरीजों में किसी मरीज की मौत नहीं हुई हैं। जांच के बाद मरीजों को दवाएं वितरित करने के साथ नियमित रूप से जांच की जाती हैं।
विज्ञापन
सदर अस्पताल में बना एआरटी (एंटी रेट्रो वायरल थिरेपी) सेंटर के आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों से ज्यादा इस जानलेवा बीमारी की चपेट में महिलाएं हैं। पिछले तीन सालों का आकड़ा देखें तो पीड़ित गर्भवती महिलाओं के ग्राफ में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई हैं। जहां एड्स (एक्वॉयर्ड इम्यूनो डिफिसिएंसी सिंड्रोम) जैसी भयानक बीमारी से पार पाना अभी भी चिकित्सा जगत के लिए चुनौती बना हुआ है।
विज्ञापन
जिला अस्पताल स्थित एआरटी सेंटर के रिकार्ड के अनुसार मार्च 2014 से अब तक कुल 2197 मरीज पंजीकृत हो चुके हैं। आंकड़ों में गौर करे तो मार्च 2014 में एआरटी खुलने पर 2014-15 में 365 मरीज पॉजिटीव मिले थे। वहीं 2015-16 में यह संख्या 487 तो 2016-17 में 470 और 2017-18 में यह संख्या 495 पहुंची। वहीं 2018-19 30 नवंबर तक एआरटी में 380 मरीज चिह्नित किए जा चुके है। यह वे मरीज हैं जो एआरटी सेंटर पर रजिस्ट्रेशन कराकर नियमित काउंसिलिंग और दवा करा रहे हैं। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में ऐसे भी मरीज हैं जो कहीं और इलाज करा रहे हैं या फिर हर दिन घुट-घुट कर मर रहे हैं।
विज्ञापन
एआरटी प्रभारी शिवेंद्र बहादुर सिंह के अनुसार पंजीकृत गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव भी कराया जा चुका हैं, जहां नियमित दवा और जांच के चलते नवजात को एचआईवी के लक्षण से बचा लिया गया है। एचआईवी पॉजिटिव होने से अभी तक एआरटी में पंजीकृत मरीजों में किसी मरीज की मौत नहीं हुई हैं। जांच के बाद मरीजों को दवाएं वितरित करने के साथ नियमित रूप से जांच की जाती हैं।