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धनुष टूटते ही जयश्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा पंडाल

Sun, 14 Oct 2018 12:29 AM IST
Updated Sun, 14 Oct 2018 12:29 AM IST
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धनुष टूटते ही जयश्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा  पंडाल
पिपरीडीह। स्थानीय बाजार में चल रही रामलीला मेें धनुष यज्ञ सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया। जिसमें मिथिला नरेश राजा जनक अपनी पुत्री सीता के विवाह के लिए स्वयंवर का आयोजन किया। इसमें उन्होंने शर्त रखा कि धनुष तोड़ने वाले से ही सीता विवाह होगा। स्वयंवर की भरी सभा में रखी धनुष को बलशाली राजाओं द्वारा धनुष को तोड़ने में असफल होते देखकर लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो गए। यह देख राजा जनक व्याकुल हो उठे। उनकी व्याकुलता देख मुनि विश्वामित्र ने भगवान श्रीराम को धनुष तोड़ने का आदेश दिया। क्षण भर में ही भगवान श्रीराम धनुष को उठा लेते हैं और प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष टूट जाता है। इसके बाद मां सीता भगवान के गले में जयमाल डालती हैं। धनुष टूटते ही पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। महिलाएं मंगलगीत गाने लगीं। इसके बाद लक्ष्मण-परशुराम संवाद सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया।
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