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लघु उद्योगों को दिया जाए ब्याजमुक्त ऋण
Updated Wed, 31 Jan 2018 12:09 AM IST
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आमबजट को लेकर उद्यमियों को वित्त मंत्री से आस है। उद्यमियों ने पेश होने वाले आमबजट में लघु उद्योगों के लिए ब्याजमुक्त ऋण दिए जाने पर जोर दिया। साथ ही टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाए जाने की वकालत की।
उनका कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद जिले के चौखट उद्योग, कपड़ा कारोबार पर विपरीत असर पड़ा था। केंद्र सरकार की तरफ से जीएसटी प्रक्रिया में तमाम संशोधन के बाद भी उद्यमियों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। रिटर्न दाखिल सहित अन्य कार्यों के लिए उद्यमियों का अधिकांश समय अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर काटना पड़ रहा है। वहां भी जाने पर भी विभागीय अधिकारी हाथ खड़ा कर दे रहे हैं। इस संबंध में लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष भरत ठरड का कहना है कि सरकार की तरफ से लघु उद्योगों को बढ़ावा दिए जाने के लिए कोई स्कीम नहीं दी जा रही है। इसके चलते लघु उद्योगों पर विपरीत असर पड़ रहा है। ऐसे में लघु उद्योगों के लिए ब्याजमुक्त ऋण दिया जाए। जीएसटी प्रक्रिया जटिल होने से समस्याओं का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। समस्याओं का समाधान करने के लिए जिलास्तर पर अधिकारी को नामित किया जाए। लघु उद्योग भारती के महामंत्री बालकृष्ण ठरड का कहना था कि इनकम टैक्स के तीन स्लैब के बजाय दो स्लैब लाया जाए। पांच लाख तक टैक्स मुक्त किया जाए। पांच लाख से ऊपर 20 लाख तक टैक्स 10 प्रतिशत किया जाए। लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई स्कीम लाई जाएं। इसी क्रम में उद्यमी सुशील अग्रवाल, उद्यमी कन्हैया लाल जायसवाल का कहना है कि लघु उद्योगों को मांग के अनुरूप ब्याजमुक्त ऋण दिया जाए। जीएसटी प्रक्रिया सरल न होने से उद्यमियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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उनका कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद जिले के चौखट उद्योग, कपड़ा कारोबार पर विपरीत असर पड़ा था। केंद्र सरकार की तरफ से जीएसटी प्रक्रिया में तमाम संशोधन के बाद भी उद्यमियों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। रिटर्न दाखिल सहित अन्य कार्यों के लिए उद्यमियों का अधिकांश समय अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर काटना पड़ रहा है। वहां भी जाने पर भी विभागीय अधिकारी हाथ खड़ा कर दे रहे हैं। इस संबंध में लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष भरत ठरड का कहना है कि सरकार की तरफ से लघु उद्योगों को बढ़ावा दिए जाने के लिए कोई स्कीम नहीं दी जा रही है। इसके चलते लघु उद्योगों पर विपरीत असर पड़ रहा है। ऐसे में लघु उद्योगों के लिए ब्याजमुक्त ऋण दिया जाए। जीएसटी प्रक्रिया जटिल होने से समस्याओं का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। समस्याओं का समाधान करने के लिए जिलास्तर पर अधिकारी को नामित किया जाए। लघु उद्योग भारती के महामंत्री बालकृष्ण ठरड का कहना था कि इनकम टैक्स के तीन स्लैब के बजाय दो स्लैब लाया जाए। पांच लाख तक टैक्स मुक्त किया जाए। पांच लाख से ऊपर 20 लाख तक टैक्स 10 प्रतिशत किया जाए। लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई स्कीम लाई जाएं। इसी क्रम में उद्यमी सुशील अग्रवाल, उद्यमी कन्हैया लाल जायसवाल का कहना है कि लघु उद्योगों को मांग के अनुरूप ब्याजमुक्त ऋण दिया जाए। जीएसटी प्रक्रिया सरल न होने से उद्यमियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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