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जीएसटी से नहीं उबरे उपभोक्ता
Updated Sun, 26 Nov 2017 11:22 PM IST
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मऊ। पांच माह पूर्व लागू जीएसटी की मार से लोग उबर नहीं सके हैं, क्योंकि सामानों पर दाम कम करने का लाभ उपभोक्ताओं को मिलता नजर नहीं आ रहा है। कंपनियां मोटा मुनाफा कमा रही हैं। इस मुद्दे पर उद्यमियों, व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं से बातचीत की गई, तो सभी ने सरकार की तरफ निगरानी तंत्र को प्रभावी बनाए जाने पर जोर दिया।
केंद्र सरकार की तरफ से वाशिंग पाउडर, डिटर्जेंट, डियो, चाकलेट, हाथ से बने फर्नीचर समेत दैनिक उपभोग की 200 से ज्यादा वस्तुओं के दाम कम कर कारोबारियों, व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं को राहत देने का दावा किया जा रहा है। 15 नवंबर से यह बदलाव लागू भी हो गया है। लेकिन अभी तक इसका लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रहा है। उपभोक्ताओं को बाजार में पुराने दर पर ही मिल रहा है। उपभोक्ताओं की माने तो कंपनियों के प्रोड्क्ट्स पर अधिकतम खुदरा मूल्य वास्तविक दर से अधिक प्रिंट रहता है। इससे कंपनियां मोटा मुनाफा वसूल रही हैं। इस संबंध में लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष भरत ठरड का कहना है कि सरकार की तरफ से जीएसटी में दी गई रियायत का लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रहा है। कंपनियों के प्रोडक्ट्स पर मनमाने ढंग से प्रिंट खुदरा मूल्य का मानिटरिंग करने के लिए निगरानी तंत्र को चुस्त दुरुस्त बनाया जाए। इसी क्रम में उप्र उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिला महामंत्री गोपाल कृष्ण बरनवाल का कहना है कि केंद्र सरकार की तरफ से जीएसटी में दी गई रियायत का लाभ आंशिक तौर पर ही मिल रहा है। सरकार की तरफ से उच्च स्तर पर मानीटरिंग करने से ही उपभोक्ताओं को लाभ मिल पाएगा। इस संबंध में बाजार में खरीदारी करने आए उपभोक्ता शिवनारायण यादव, सूर्यकांत सिंह का कहना है कि बाजार में रोजमर्रा के सामानों के तमाम कंपनियों के प्रोडक्ट्स पर अधिकतम खुदरा मूल्य काफी ज्यादा प्रिंट रहता है। ऐसे में सरकार की तरफ से कंपनियों के मनमाने रवैए पर शिकंजा कसते हुए प्रोडक्ट्स पर वास्तविक मूल्य ही प्रिंट करने के लिए सिस्टम विकसित किया जाए। तभी हम उपभोक्ताओं को लाभ मिल सकता है।
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केंद्र सरकार की तरफ से वाशिंग पाउडर, डिटर्जेंट, डियो, चाकलेट, हाथ से बने फर्नीचर समेत दैनिक उपभोग की 200 से ज्यादा वस्तुओं के दाम कम कर कारोबारियों, व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं को राहत देने का दावा किया जा रहा है। 15 नवंबर से यह बदलाव लागू भी हो गया है। लेकिन अभी तक इसका लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रहा है। उपभोक्ताओं को बाजार में पुराने दर पर ही मिल रहा है। उपभोक्ताओं की माने तो कंपनियों के प्रोड्क्ट्स पर अधिकतम खुदरा मूल्य वास्तविक दर से अधिक प्रिंट रहता है। इससे कंपनियां मोटा मुनाफा वसूल रही हैं। इस संबंध में लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष भरत ठरड का कहना है कि सरकार की तरफ से जीएसटी में दी गई रियायत का लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रहा है। कंपनियों के प्रोडक्ट्स पर मनमाने ढंग से प्रिंट खुदरा मूल्य का मानिटरिंग करने के लिए निगरानी तंत्र को चुस्त दुरुस्त बनाया जाए। इसी क्रम में उप्र उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिला महामंत्री गोपाल कृष्ण बरनवाल का कहना है कि केंद्र सरकार की तरफ से जीएसटी में दी गई रियायत का लाभ आंशिक तौर पर ही मिल रहा है। सरकार की तरफ से उच्च स्तर पर मानीटरिंग करने से ही उपभोक्ताओं को लाभ मिल पाएगा। इस संबंध में बाजार में खरीदारी करने आए उपभोक्ता शिवनारायण यादव, सूर्यकांत सिंह का कहना है कि बाजार में रोजमर्रा के सामानों के तमाम कंपनियों के प्रोडक्ट्स पर अधिकतम खुदरा मूल्य काफी ज्यादा प्रिंट रहता है। ऐसे में सरकार की तरफ से कंपनियों के मनमाने रवैए पर शिकंजा कसते हुए प्रोडक्ट्स पर वास्तविक मूल्य ही प्रिंट करने के लिए सिस्टम विकसित किया जाए। तभी हम उपभोक्ताओं को लाभ मिल सकता है।
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