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नीरज के निधन से साहित्य जगत मर्माहत
Updated Fri, 20 Jul 2018 10:28 PM IST
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दोहरीघाट। संवेदनाओं और श्रृंगार रस के कवि पद्मश्री गोपाल दास नीरज के निधन से साहित्य जगत मर्माहत है। साहित्य परिषद गोठा की ओर से नीरज जी के निधन पर शोक सभा का आयोजन कर उनकी आत्मा की शांति के लिये ईश्वर से प्रार्थना की। शोक संवेदना प्रकट करते हुए परिषद के अध्यक्ष झारखंडेय राय ने कहा कि नीरज जी मंचों के जादूगर थे। उन्होंने समाज पर एक अमिट छाप छोड़ी है।
उपाध्यक्ष रमेश राय ने कहा कि संवेदनाओ का ऐसा कवि विरले ही मिलता है नीरज जी के लिखे गीत अमर हो गये जैसे ‘कारवां गुजर गया’, ‘कहता है जोकर सारा जमाना, आधी हकीकत आधा फ़साना’ और ‘देखती रहो ये दर्पण न तुम प्यार का मुहूरत निकल जायेगा’ जैसे इनके गीत युगों युगों तक गाये जायेंगे। नीरज जी के निधन से एक साहित्य युग का अंत हो गया। प्रबंधक विजेन्द्र राय ने कहा कि नीरज जी हिंदी कविता के शिल्पी थे। वे कई पीढ़ी के कवि थे। उन्होंने फिल्मी दुनिया में अपनी अमिट छाप छोड़ी। कवि सम्मेलनों में लोग नीरज जी को ही सुनना पसंद करते थे। वे अपने गीतों गजलों से लोगों का मन मोह लेते थे, उन्होंने समाज को आईना दिखाने का काम किया। शोक संतप्त संवेदना प्रकट करने वालों में साहित्य परिषद के उपाध्यक्ष अजीत कुमार राय, बिपिन राय,अनिल गुप्ता, संजय राय, राजेश राय, राकेश गोंड़ ,मनोज गोंड, अजय उपाध्याय, मनीष यादव, विनय गुप्त, सीताराम गुप्त, मुन्ना पाण्डेय, प्रेमचन्द पाण्डेय, आलोक राय, उमेश राय, ओंकार चतुर्वेदी,जय कृष्ण राय, विजय नारायण राय, सुधाकर राय, विनय राय आदि मौजूद रहे।
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उपाध्यक्ष रमेश राय ने कहा कि संवेदनाओ का ऐसा कवि विरले ही मिलता है नीरज जी के लिखे गीत अमर हो गये जैसे ‘कारवां गुजर गया’, ‘कहता है जोकर सारा जमाना, आधी हकीकत आधा फ़साना’ और ‘देखती रहो ये दर्पण न तुम प्यार का मुहूरत निकल जायेगा’ जैसे इनके गीत युगों युगों तक गाये जायेंगे। नीरज जी के निधन से एक साहित्य युग का अंत हो गया। प्रबंधक विजेन्द्र राय ने कहा कि नीरज जी हिंदी कविता के शिल्पी थे। वे कई पीढ़ी के कवि थे। उन्होंने फिल्मी दुनिया में अपनी अमिट छाप छोड़ी। कवि सम्मेलनों में लोग नीरज जी को ही सुनना पसंद करते थे। वे अपने गीतों गजलों से लोगों का मन मोह लेते थे, उन्होंने समाज को आईना दिखाने का काम किया। शोक संतप्त संवेदना प्रकट करने वालों में साहित्य परिषद के उपाध्यक्ष अजीत कुमार राय, बिपिन राय,अनिल गुप्ता, संजय राय, राजेश राय, राकेश गोंड़ ,मनोज गोंड, अजय उपाध्याय, मनीष यादव, विनय गुप्त, सीताराम गुप्त, मुन्ना पाण्डेय, प्रेमचन्द पाण्डेय, आलोक राय, उमेश राय, ओंकार चतुर्वेदी,जय कृष्ण राय, विजय नारायण राय, सुधाकर राय, विनय राय आदि मौजूद रहे।
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