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बच्चों में विकसित होगी प्रतियोगी भावना
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राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान नई दिल्ली की तरफ से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के सभागार में चल रही दो दिवसीय कार्यशाला बुधवार को संपन्न हो गई। वक्ताओं ने कहा कि मिशन पहचान से बच्चों में प्रतियोगी भावना का विकास होगा।
मानव संसाधन मंत्रालय नई दिल्ली से आईं परामर्शदाता डॉ. चारु स्मिता मलिक ने अध्यापकों को समय का विभाजन कर अपने विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता को उत्कृष्ट बनाने के बारे में जानकारी दी। डॉ. चारू ने बताया की दो दिवसीय कार्यशाला के बाद वह विद्यालयों का भी भ्रमण करेंगी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी त्रिपाठी ने बताया कि मिशन पहचान के तहत बच्चों के अंदर प्रतियोगी भावना विकसित होगी। जिससे वह अपने अध्ययन कार्य को शास्त्रानुसार कर सकेंगे। बच्चों में शिक्षा को लेकर बचपन से ही प्रतियोगी भावना का विकास होने से बच्चे शिक्षा के साथ-साथ अपने दिनचर्या का भी समय का विभाजन उचित तरीके से करने लगते हैं।
इस अवसर पर जनपद के हर शिक्षा क्षेत्र से चयनित चार प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षण दिया गया। इस अवसर पर जिला समन्वयक प्रशिक्षण गजेंद्र सिंह, राज्य स्तरीय प्रशिक्षक रूपेश पांडेय, चंद्रापीड मिश्र, सतीश सिंह, अंजनी सिंह आदि शामिल रहे।
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मानव संसाधन मंत्रालय नई दिल्ली से आईं परामर्शदाता डॉ. चारु स्मिता मलिक ने अध्यापकों को समय का विभाजन कर अपने विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता को उत्कृष्ट बनाने के बारे में जानकारी दी। डॉ. चारू ने बताया की दो दिवसीय कार्यशाला के बाद वह विद्यालयों का भी भ्रमण करेंगी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी त्रिपाठी ने बताया कि मिशन पहचान के तहत बच्चों के अंदर प्रतियोगी भावना विकसित होगी। जिससे वह अपने अध्ययन कार्य को शास्त्रानुसार कर सकेंगे। बच्चों में शिक्षा को लेकर बचपन से ही प्रतियोगी भावना का विकास होने से बच्चे शिक्षा के साथ-साथ अपने दिनचर्या का भी समय का विभाजन उचित तरीके से करने लगते हैं।
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इस अवसर पर जनपद के हर शिक्षा क्षेत्र से चयनित चार प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षण दिया गया। इस अवसर पर जिला समन्वयक प्रशिक्षण गजेंद्र सिंह, राज्य स्तरीय प्रशिक्षक रूपेश पांडेय, चंद्रापीड मिश्र, सतीश सिंह, अंजनी सिंह आदि शामिल रहे।
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