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38 राजस्व गांव नहीं हो सके ओडीएफ
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत फतेहपुर मंडाव ब्लाक में सिर्फ शौचालयों के निर्माण पर विभाग ने 20.15 करोड़ चौसठ हजार रुपये खर्च कर दिए। इसके अलावा रैलियां, जागरूकता अभियान , मार्निंग फालोअप,स्वच्छाग्रहियों को मानदेय आदि पर भी लाखों रुपये खर्च कर दिए गए। 154 राजस्व गांवों को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। 38 राजस्व गांव अभी भी ओडीएफ नहीं घोषित किए जा सके हैं। लेकिन जिन गांवों को ओडीएफ घोषित भी कर दिया गया है,वहां भी लोग खुलेआम सड़कों नहरों पर जा रहे हैं। नतीजा सिफर ही नजर आ रहा है।
ओडीएफ मुक्त करने की तमाम मुहिम चलाई गई लेकिन फतहपुर मंडाव ब्लाक के 78 ग्राम पंचायतों में से केवल अहिरूपुर और तिघरा पूरी ग्राम पंचायतें ओडीएफ हो पाई हैं। इनके अलावा अन्य ग्राम पंचायतों के एक या दो पुरवे यानी राजस्व गांव ही ओडीएफ घोषित करके खानापूरी की गई है। कागजों पर192 राजस्व गांवों में154 को ओडीएफ घोषित किया है। बेस लाईन सर्वे 2012 के अनुसार फतहपुर मंडाव के 78 ग्राम पंचायतों के लिए 19892 शौचालयों का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इनके निर्माण के लिए 13.87 करोड़ चार हजार रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसके सापेक्ष 16797 शौचालयों का निर्माण बीस करोड़ 15 लाख 64 हजार रुपयों की लागत से हुआ है। इनमें से 1061 शौचालय फाल्स पाए गए है,जबकि 2034 शौचालय नहीं बन पाए हैं। गांव में जो शौचालय बने हैं, उनमें भी अधिकांश आधे अधूरे हैं। किसी शौचालय में दरवाजा नहीं् है , किसी पर छ त ही नहीं है। जिनके घरों पर शौचालय बन भी गए हैं, उन परिवारों के लोग अब भी खुले में शौच जा रहे हैं।
मर्यादपुर के डा.बसर उस्मानी का कहना है कि जब तक लोगों की सोच नहीं बदलेंगी तब तक कोई परिवर्तन संभव नहीं है। दिघेड़ा गांव के राम नरायन सिंह और कमरौली गांव के चंद्रिका यादव का कहना है कि कमीशनखोरी के चलते शौचालयों की गुणवत्ता काफी खराब है। बनते ही इनमें टूट फूट होने लग जा रही है। इसके अतिरिक्त सोच में बदलाव के चलते ही गांवों में स्वच्छ वातावरण बनेगा।
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कोट
3440 शौचालयों का नया लक्ष्य मिला है। इस माह के अंत तक लक्ष्य पूर्ण कर लिया जाएगा। लाभार्थी की लापरवाही मिलने पर खाद्यान्न बन्द कर दिया जायेगा।इ सके साथ ही संबंधित सेक्रेटरी से जवाब तलब किया जायेगा। सुवेदिता सिंह, खंड विकास अधिकारी
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ओडीएफ मुक्त करने की तमाम मुहिम चलाई गई लेकिन फतहपुर मंडाव ब्लाक के 78 ग्राम पंचायतों में से केवल अहिरूपुर और तिघरा पूरी ग्राम पंचायतें ओडीएफ हो पाई हैं। इनके अलावा अन्य ग्राम पंचायतों के एक या दो पुरवे यानी राजस्व गांव ही ओडीएफ घोषित करके खानापूरी की गई है। कागजों पर192 राजस्व गांवों में154 को ओडीएफ घोषित किया है। बेस लाईन सर्वे 2012 के अनुसार फतहपुर मंडाव के 78 ग्राम पंचायतों के लिए 19892 शौचालयों का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इनके निर्माण के लिए 13.87 करोड़ चार हजार रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसके सापेक्ष 16797 शौचालयों का निर्माण बीस करोड़ 15 लाख 64 हजार रुपयों की लागत से हुआ है। इनमें से 1061 शौचालय फाल्स पाए गए है,जबकि 2034 शौचालय नहीं बन पाए हैं। गांव में जो शौचालय बने हैं, उनमें भी अधिकांश आधे अधूरे हैं। किसी शौचालय में दरवाजा नहीं् है , किसी पर छ त ही नहीं है। जिनके घरों पर शौचालय बन भी गए हैं, उन परिवारों के लोग अब भी खुले में शौच जा रहे हैं।
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मर्यादपुर के डा.बसर उस्मानी का कहना है कि जब तक लोगों की सोच नहीं बदलेंगी तब तक कोई परिवर्तन संभव नहीं है। दिघेड़ा गांव के राम नरायन सिंह और कमरौली गांव के चंद्रिका यादव का कहना है कि कमीशनखोरी के चलते शौचालयों की गुणवत्ता काफी खराब है। बनते ही इनमें टूट फूट होने लग जा रही है। इसके अतिरिक्त सोच में बदलाव के चलते ही गांवों में स्वच्छ वातावरण बनेगा।
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3440 शौचालयों का नया लक्ष्य मिला है। इस माह के अंत तक लक्ष्य पूर्ण कर लिया जाएगा। लाभार्थी की लापरवाही मिलने पर खाद्यान्न बन्द कर दिया जायेगा।इ सके साथ ही संबंधित सेक्रेटरी से जवाब तलब किया जायेगा। सुवेदिता सिंह, खंड विकास अधिकारी