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घाघरा में उफान से तटवर्ती इलाकों में दहशत
Updated Wed, 29 Aug 2018 01:56 AM IST
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दोहरीघाट/दुबारी। मंगलवार को एक बार फिर घाघरा में एकाएक उफान आने से कस्बा सहित तटवर्ती इलाकों के लोगों के माथे पर चिंता की लकीर दिखाई दे रही है। नदी के उग्र होने के आसार से लोगों की नींद उड़ गई है। 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 10 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। नदी के रौद्र रूप धारण करने से ऐतिहासिक धरोहरों और तटवर्ती इलाकों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। वहीं, मधुबन तहसील के देवारा में संपर्क मार्ग डूबे हैं। फसलों के जलमग्न होने से पशुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो गया है।
सोमवार को जलस्तर में घटाव के बाद मंगलवार को घाघरा में एकाएक उफान आने से तटवर्ती इलाकों में बेचैनी बढ़ गई है। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो मंगलवार को नदी का जलस्तर 70.22 मीटर रहा। सोमवार को जलस्तर 70.12 मीटर था। 24 घंटे में घाघरा के जलस्तर में 10 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। गौरीशंकर घाट पर खतरे का निशान 69.90 मीटर है। इस समय घाघरा खतरे के निशान से 32 सेमी ऊपर बह रही है। घाघरा एक बार फिर रौद्र रूप धारण करने से नगर सहित तटवर्ती इलाकों में दहशत व्याप्त हो गई है। तटवर्ती इलाकों की हजारों एकड़ फसल पानी में डूबी हुई है। इससे पशुओं के चारे की विकट स्थिति पैदा हो गई है। नदी के उग्र रूप धारण करने से नगर की ऐतिहासिक धरोहरें मुक्तिधाम, दुर्गा मंदिर, शाही मस्जिद, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला और मुक्तिधाम पर संकट के बादल मंडराने लगा है। वहीं, तटवर्ती इलाकों धनौली रामपुर, नई बाजार, नौली, चिऊंटीडांड़, लामी, तारनपुर, कादीपुर, हरधौली, बहादुरपुर, बुढावर, पतनई, सरयां, ठिकरहिया, नगरीपार, रसूलपुर, सूरजपुर सहित दर्जनों गांवों के लोग दहशत में जी रहे हैं। घाघरा की लहरें मुक्तिधाम पर टक्कर मार रही हैं। नदी के जलस्तर में वृद्धि होने से मधुबन तहसील के देवारा में फसलें जलमग्न होने से पशुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। परसिया हाहा नाला पर नदी का जलस्तर मंगलवार को 66.03 रहा। जबकि खतरा निशान 66.31 मीटर है। क्षेत्र के दर्जनों मार्ग पानी में डूब चुके हैं। चक्की मुसाडोही, चौहानपुर, बरोहा, गजियापुर, परसिया जयराम गिरी, बिंटोलिया, जरलहवा, नई बस्ती, खैरा नकीहवा, शीशवा, हरीलाल का पुरवा, मनमन का पुरवा, बिशुन का पुरा, किशुन का पुरा हाता, नरहाघाट, भगत का पुरवा, बैरकंटा पुरवा, मोलनापुर सहित एक दर्जन से अधिक गांव पानी के घेरे में आ गए हैं। पशुओं की चारा के लिए समस्या प्रतिदिन हो रही है लेकिन नाव की व्यवस्था नहीं की जा सकी है।
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सोमवार को जलस्तर में घटाव के बाद मंगलवार को घाघरा में एकाएक उफान आने से तटवर्ती इलाकों में बेचैनी बढ़ गई है। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो मंगलवार को नदी का जलस्तर 70.22 मीटर रहा। सोमवार को जलस्तर 70.12 मीटर था। 24 घंटे में घाघरा के जलस्तर में 10 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। गौरीशंकर घाट पर खतरे का निशान 69.90 मीटर है। इस समय घाघरा खतरे के निशान से 32 सेमी ऊपर बह रही है। घाघरा एक बार फिर रौद्र रूप धारण करने से नगर सहित तटवर्ती इलाकों में दहशत व्याप्त हो गई है। तटवर्ती इलाकों की हजारों एकड़ फसल पानी में डूबी हुई है। इससे पशुओं के चारे की विकट स्थिति पैदा हो गई है। नदी के उग्र रूप धारण करने से नगर की ऐतिहासिक धरोहरें मुक्तिधाम, दुर्गा मंदिर, शाही मस्जिद, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला और मुक्तिधाम पर संकट के बादल मंडराने लगा है। वहीं, तटवर्ती इलाकों धनौली रामपुर, नई बाजार, नौली, चिऊंटीडांड़, लामी, तारनपुर, कादीपुर, हरधौली, बहादुरपुर, बुढावर, पतनई, सरयां, ठिकरहिया, नगरीपार, रसूलपुर, सूरजपुर सहित दर्जनों गांवों के लोग दहशत में जी रहे हैं। घाघरा की लहरें मुक्तिधाम पर टक्कर मार रही हैं। नदी के जलस्तर में वृद्धि होने से मधुबन तहसील के देवारा में फसलें जलमग्न होने से पशुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। परसिया हाहा नाला पर नदी का जलस्तर मंगलवार को 66.03 रहा। जबकि खतरा निशान 66.31 मीटर है। क्षेत्र के दर्जनों मार्ग पानी में डूब चुके हैं। चक्की मुसाडोही, चौहानपुर, बरोहा, गजियापुर, परसिया जयराम गिरी, बिंटोलिया, जरलहवा, नई बस्ती, खैरा नकीहवा, शीशवा, हरीलाल का पुरवा, मनमन का पुरवा, बिशुन का पुरा, किशुन का पुरा हाता, नरहाघाट, भगत का पुरवा, बैरकंटा पुरवा, मोलनापुर सहित एक दर्जन से अधिक गांव पानी के घेरे में आ गए हैं। पशुओं की चारा के लिए समस्या प्रतिदिन हो रही है लेकिन नाव की व्यवस्था नहीं की जा सकी है।
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