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मानसून की बेरुखी से किसान बेचैन
Updated Thu, 12 Jul 2018 12:24 AM IST
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रानीपुुर। मानसून की बेरुखी ने अब किसानों को बेचैन कर दिया है। लेकिन बरसात की आस में उनकी निगाहे बार-बार आसमान की ओर उठ रही। जबकि उधर अघोषित बिजली कटौती भी परेशानी खड़ी कर रही। जिससे सिंचाई नहीं हो पा रही।
ऐसे तो मानसून 15 जून से से शुरु हो जाना था, लेकिन एक माह बीतने के बाद भी बारिश न होने से किसानों के माथे में चिंता की लकीरे खींचनी शुरू हो गई हैं। मानसून की बेरुखी के साथ बिजली विभाग द्वारा जारी अघोषित कटौती किसानों के चिंता दोगुनी कर रही हैं। बता दे कि ब्लाक क्षेत्र के रानीपुर, खुरहट, पलिया, काझा, फतेहपुर, चकिया, गोकुलपुरा, पिरुआ, धर्मसिपुर, पड़री, अकबरपुर, चकिया, दौलसेपुर, आदि क्षेत्रो में धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है। क्षेत्र के किसान धान की रोपाई के लिए धान की नर्सरी लगाये हुए है। लेकिन वर्षा न होने के कारण धान की नर्सरी सुख रही है। वहीं खेतो में बड़ी बड़ी दरारें पड़ गयी है। क्षेत्र के किसान संजय, गुड्डू सिह, दिनेश, बिनोद, श्यामलाल आदि किसानों का कहना हैं कि किसी निजी संसाधनों से पानी चला कर धान की नर्सरी को बचाने का प्रयास कर रहे है। लेकिन बिजली न होने के चलते उन्हें डीजल से सिंचाई करना पड़ रहा हैं।
किसानों कहना है कि सब कुछ जानते हुए भी बिजली विभाग के अधिकारियों द्वारा मनमानी कटौती की जा रही हैं। फलस्वरूप 20 घंटे में बमुश्किल से 5 से 6 घंटे ही बिजली मिल रही।
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ऐसे तो मानसून 15 जून से से शुरु हो जाना था, लेकिन एक माह बीतने के बाद भी बारिश न होने से किसानों के माथे में चिंता की लकीरे खींचनी शुरू हो गई हैं। मानसून की बेरुखी के साथ बिजली विभाग द्वारा जारी अघोषित कटौती किसानों के चिंता दोगुनी कर रही हैं। बता दे कि ब्लाक क्षेत्र के रानीपुर, खुरहट, पलिया, काझा, फतेहपुर, चकिया, गोकुलपुरा, पिरुआ, धर्मसिपुर, पड़री, अकबरपुर, चकिया, दौलसेपुर, आदि क्षेत्रो में धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है। क्षेत्र के किसान धान की रोपाई के लिए धान की नर्सरी लगाये हुए है। लेकिन वर्षा न होने के कारण धान की नर्सरी सुख रही है। वहीं खेतो में बड़ी बड़ी दरारें पड़ गयी है। क्षेत्र के किसान संजय, गुड्डू सिह, दिनेश, बिनोद, श्यामलाल आदि किसानों का कहना हैं कि किसी निजी संसाधनों से पानी चला कर धान की नर्सरी को बचाने का प्रयास कर रहे है। लेकिन बिजली न होने के चलते उन्हें डीजल से सिंचाई करना पड़ रहा हैं।
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किसानों कहना है कि सब कुछ जानते हुए भी बिजली विभाग के अधिकारियों द्वारा मनमानी कटौती की जा रही हैं। फलस्वरूप 20 घंटे में बमुश्किल से 5 से 6 घंटे ही बिजली मिल रही।
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