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नहरो में उड़ रही धूल
Updated Fri, 25 May 2018 12:28 AM IST
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शारदा सहायक खंड 32 मुख्य नहर सहित दर्जनों माइनरें किसानों के लिए सफेद हाथी साबित हो रही है। नहर में पानी न आने से जायद की फसल सूख रही। सनई, ढैचा व धान की नर्सरी की तैयारी प्रभावित हो रही है। शिकायत के बाद भी जहां अधिकारी आंखें मूंदे हैं तो वहीं अब किसान शिकायत का असर न देख आंदोलन की रणनीति में जुट गए हैं।
शारदा सहायक खंड 32 की हालत बदतर होती जा रही है। नहर की सिंचित क्षमता मऊ-बलिया मिलाकर 52 हजार हेक्टेयर है। मुख्य नहर सहित 34 माइनरों में पानी न आने से उसमें धूल उड़ रही है। ऐसे में हजारों हेक्टेयर भूमि पर खेती भगवान भरोसे हो गई है। शारदा सहायक खंड 32 मुख्य नहर सहित कई माइनरें बड़रांव ब्लाक क्षेत्र के पूनापार, भटौली, उम्मरपुर, सरबसपुर, मांदीदुल्लह, सपनौती, शुकलौली, रेयांव, विशुनाथपुर, उसरी, कुसुम्हां सहित दर्जनों गांवों से होकर गुजरी है। जायद की फसल में सिंचाई की सख्त जरूरत है, लेकिन नहर में पानी न छोड़े जाने से किसान फसल को लेकर चिंतित हैं। नहर सूखी रहने से लौकी, नेनुआं, सरपुतिया, करेला, कोंहड़ा, बोड़ो, खीरा, ककड़ी, मूंग, सूरजमुखी आदि जायद की फसलें सिंचाई के अभाव में मुरझा रही है। पंपिंगसेट से सिंचाई पर खेती की लागत बढ़ जा रही है। सिंचाई के अभाव में उक्त फसलों की पैदावार भी आधी हो गई है। धान की नर्सरी की तैयारी तक नहीं हो पाई है।
क्षेत्रीय किसान किनेलाल, रजनीश राय, अमन कुमार, साधू यादव, रामशकल सिंह का कहना है कि विभाग के आला अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा किसान भुगत रहे। गन्ना की नगदी फसल सूख रही है। उड़द, मूंग और धान की नर्सरी की तैयारी प्रभावित हो रही है। प्रधान अभय शंकर सिंह, विश्रा शाही, रामप्यारे यादव, महाचंद चौहान का कहना है कि करोड़ों की लागत से बनी नहर का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। विभागीय लापरवाही से आजिज आए इन किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द नहर में पानी की व्यवस्था नहीं की गई तो वह आंदोलन को बाध्य होंगे।
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कोट
जिले की नहर में पानी इस महीने के अंत तक पहुंच जाएगा। लखीमपुर स्थित शारदा नहर के बैराज से ही पानी छोड़े जाने में कुछ विलंब हुआ है। बैराज से पानी छोड़ा जा चुका है और वह लखनऊ तक आ भी गया है।
राजीव पांडेय, अधिशासी अभियंता
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शारदा सहायक खंड 32 की हालत बदतर होती जा रही है। नहर की सिंचित क्षमता मऊ-बलिया मिलाकर 52 हजार हेक्टेयर है। मुख्य नहर सहित 34 माइनरों में पानी न आने से उसमें धूल उड़ रही है। ऐसे में हजारों हेक्टेयर भूमि पर खेती भगवान भरोसे हो गई है। शारदा सहायक खंड 32 मुख्य नहर सहित कई माइनरें बड़रांव ब्लाक क्षेत्र के पूनापार, भटौली, उम्मरपुर, सरबसपुर, मांदीदुल्लह, सपनौती, शुकलौली, रेयांव, विशुनाथपुर, उसरी, कुसुम्हां सहित दर्जनों गांवों से होकर गुजरी है। जायद की फसल में सिंचाई की सख्त जरूरत है, लेकिन नहर में पानी न छोड़े जाने से किसान फसल को लेकर चिंतित हैं। नहर सूखी रहने से लौकी, नेनुआं, सरपुतिया, करेला, कोंहड़ा, बोड़ो, खीरा, ककड़ी, मूंग, सूरजमुखी आदि जायद की फसलें सिंचाई के अभाव में मुरझा रही है। पंपिंगसेट से सिंचाई पर खेती की लागत बढ़ जा रही है। सिंचाई के अभाव में उक्त फसलों की पैदावार भी आधी हो गई है। धान की नर्सरी की तैयारी तक नहीं हो पाई है।
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क्षेत्रीय किसान किनेलाल, रजनीश राय, अमन कुमार, साधू यादव, रामशकल सिंह का कहना है कि विभाग के आला अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा किसान भुगत रहे। गन्ना की नगदी फसल सूख रही है। उड़द, मूंग और धान की नर्सरी की तैयारी प्रभावित हो रही है। प्रधान अभय शंकर सिंह, विश्रा शाही, रामप्यारे यादव, महाचंद चौहान का कहना है कि करोड़ों की लागत से बनी नहर का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। विभागीय लापरवाही से आजिज आए इन किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द नहर में पानी की व्यवस्था नहीं की गई तो वह आंदोलन को बाध्य होंगे।
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कोट
जिले की नहर में पानी इस महीने के अंत तक पहुंच जाएगा। लखीमपुर स्थित शारदा नहर के बैराज से ही पानी छोड़े जाने में कुछ विलंब हुआ है। बैराज से पानी छोड़ा जा चुका है और वह लखनऊ तक आ भी गया है।
राजीव पांडेय, अधिशासी अभियंता