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पशुपालकों को किया गया जागरूक
Updated Sun, 14 Jan 2018 12:09 AM IST
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रतनपुरा। स्थानीय बाजार में सचल वाहन स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इसमें पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने गांव में भ्रमण कर पशुओं में होने वाली बीमारी और उससे होने वाले बचाव के बारे में लोगों को जागरुक करने का प्रयास किया।
इस मौके पर पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विनय कुमार पांडेय ने कहा कि पशुओं को खुली जगह में न रखें। ढके स्थानों में रखे।रोशनदान, दरवाजों और खिड़कियों को टाट और बोरे से ढक दें।पशुशाला में गोबर और मूत्र निकास की समुचित व्यवस्था करें ताकि जल जमाव न होने पाए। पशुशाला को नमी और सीलन से बचाएं। ऐसी व्यवस्था करें कि सूर्य की रोशनी पशुशाला में देर तक रहे।बासी पानी पशुओं को न पिलाएं।
बिछावन में पुआल का प्रयोग करें।पशुओं को जूट के बोरे को ऐसे पहनाएं जिससे वे खिसके नहीं। गर्मी के लिए पशुओं के पास अलाव जलाकर रखें।नवजात पशु को खीस और एमिनो पॉवर जरूर पिलाएं, इससे बीमारी से लडने की क्षमता में वृद्धि होती है और नवजात पशुओं की बढ़ोतरी भी तेजी से होता है।गर्भित पशु का विशेष ध्यान रखें।बिछावन समय-समय पर बदलते रहें।अलाव जलाएं पर पशु की पहुंच से दूर रखें। इसके लिए पशु के गले की रस्सी छोटी बांधे ताकि पशु अलाव तक न पहुंच सके।ठंड से प्रभावित पशु के शरीर में कपकपी, बुखार के लक्षण होते हैं तो तत्काल निकटवर्ती पशु चिकित्सक को दिखाएं।शिविर में पशुधन प्रसार अधिकारी विनोद कुमार, जितेंद्र चौहान, जितेंद्र कुमार, विनोद कुमार, राजेश कुमार भारती, जेके पाल आदि शामिल रहे।
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इस मौके पर पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विनय कुमार पांडेय ने कहा कि पशुओं को खुली जगह में न रखें। ढके स्थानों में रखे।रोशनदान, दरवाजों और खिड़कियों को टाट और बोरे से ढक दें।पशुशाला में गोबर और मूत्र निकास की समुचित व्यवस्था करें ताकि जल जमाव न होने पाए। पशुशाला को नमी और सीलन से बचाएं। ऐसी व्यवस्था करें कि सूर्य की रोशनी पशुशाला में देर तक रहे।बासी पानी पशुओं को न पिलाएं।
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बिछावन में पुआल का प्रयोग करें।पशुओं को जूट के बोरे को ऐसे पहनाएं जिससे वे खिसके नहीं। गर्मी के लिए पशुओं के पास अलाव जलाकर रखें।नवजात पशु को खीस और एमिनो पॉवर जरूर पिलाएं, इससे बीमारी से लडने की क्षमता में वृद्धि होती है और नवजात पशुओं की बढ़ोतरी भी तेजी से होता है।गर्भित पशु का विशेष ध्यान रखें।बिछावन समय-समय पर बदलते रहें।अलाव जलाएं पर पशु की पहुंच से दूर रखें। इसके लिए पशु के गले की रस्सी छोटी बांधे ताकि पशु अलाव तक न पहुंच सके।ठंड से प्रभावित पशु के शरीर में कपकपी, बुखार के लक्षण होते हैं तो तत्काल निकटवर्ती पशु चिकित्सक को दिखाएं।शिविर में पशुधन प्रसार अधिकारी विनोद कुमार, जितेंद्र चौहान, जितेंद्र कुमार, विनोद कुमार, राजेश कुमार भारती, जेके पाल आदि शामिल रहे।
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