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आस्था का केंद्र है अष्टभुजी भवानी माई मंदिर
Updated Sun, 14 Oct 2018 12:09 AM IST
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मऊ। मधुबन तहसील क्षेत्र के निधियांव गांव स्थित अष्टभुजी भवानी माता मंदिर लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां देर शाम तक दूर दराज और विभिन्न जिलों से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मान्यता है कि सच्चे मन से पूजन अर्चन करने पर मांगी गई मनोकामना पूरी हो जाती है।
निधियांव गांव स्थित अष्टभुजी भवानी माई मंदिर पर हमेशा श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन नवरात्र में पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से भक्तों का हुजूम उमड़ता है। बताया जाता है कि राजा नृग द्वारा सैकड़ों वर्ष पूर्व काले पत्थर की अष्टभुजी माता की तीन फुट ऊंची प्रतिमा लगवाई गई थी। इस प्रतिमा को मुगल शासकों द्वारा कई बार उठाने का प्रयास किया गया। लेकिन वे अपनी मंशा में असफल रहे। स्थानीय लोगों ने चमत्कार माना। लोगों ने दूसरी प्रतिमा लाकर रख दी। किवदंती के अनुसार बहुत समय पहले उक्त प्रतिमा पास के पोखरे में मिली। उसी स्थान पर विधि विधान से स्थापित कर दी गई। अनोखी चर्चा सुनकर राहुल सांकृत्यायन ने भी पूजन कर शोध का कार्य किया था।
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निधियांव गांव स्थित अष्टभुजी भवानी माई मंदिर पर हमेशा श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन नवरात्र में पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से भक्तों का हुजूम उमड़ता है। बताया जाता है कि राजा नृग द्वारा सैकड़ों वर्ष पूर्व काले पत्थर की अष्टभुजी माता की तीन फुट ऊंची प्रतिमा लगवाई गई थी। इस प्रतिमा को मुगल शासकों द्वारा कई बार उठाने का प्रयास किया गया। लेकिन वे अपनी मंशा में असफल रहे। स्थानीय लोगों ने चमत्कार माना। लोगों ने दूसरी प्रतिमा लाकर रख दी। किवदंती के अनुसार बहुत समय पहले उक्त प्रतिमा पास के पोखरे में मिली। उसी स्थान पर विधि विधान से स्थापित कर दी गई। अनोखी चर्चा सुनकर राहुल सांकृत्यायन ने भी पूजन कर शोध का कार्य किया था।
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