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खरदूषण-मारिच वध के साथ सीता हरण
Updated Tue, 26 Sep 2017 11:39 PM IST
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मऊ। श्री रामलीला मेला समिति मऊनाथ भंजन के तत्वाधान में नगर क्षेत्र में विजय दशमी के अवसर पर आयोजित रामलीला के सजीव मंचन में सातवें दिन सूपर्णखा नासिका भग्न, खरदूषण-मारिच वध के साथ माता सीता हरण और जटायु राम मिलन के भक्तिभाव से प्रेरित दुुखद मंचन किया गया।
भगवान श्री राम पंचवटी में माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के संग बैठे प्रकृति का आनंद ले रहे थे, तभी रावण की बहन शूर्पणखा वहां पहुंच जाती है। इस दौरान वह प्रभु राम के साथ लक्ष्मण को देख वह मोहित हो जाती है। इस दौरान सूपर्णखा बन संवर के प्रभु के पास पहुंचकर उनके समक्ष शादी का प्रस्ताव रखती है। प्रभु ने विनोद किया वे स्वयं को शादीशुदा बताकर उसे लक्ष्मण के पास भेज दिया। लक्ष्मण ने खुद को प्रभु का सेवक बताया और वापस उसे राम के पास भेज दिए। ऐसे में शूर्पणखा को क्रोध आ गया, उसने अपनी कामना पूर्ति में माता सीता को बाधक माना। इस दौरान वह माता सीता पर हमला बोली। तभी प्रभु श्री राम का ईशारा पाकर लक्ष्मण ने उसकी नाक को काट दिया। इसके बाद खून से लथपथ सूपर्णखा खरदूषण के पास पहुंची, और उसे धिक्कारते हुए आपबीती बताई। बहन की हालत देख खरदूषण प्रभु श्री राम पर हमला कर देेता है। इस दौरान वह मारा जाता है। यह देख शूर्पणखा सीधे रावण के पास पहुंच जाती है। वहां आपबीती बताने के साथ ही वह फूट-फूट कर रोने लगी। रावण घटनाक्रम को जानने के बाद सोचने लगा कि जो व्यक्ति खरदूषण का अंत कर सकता है, तब वह कोई साधारण मनुष्य नहीं होगा। रावण अपने मामा मारिच को बुलाता है और उससे पूरी बात बताकर छल पूर्वक सीता मैया के हरण करने की योजना बनाता है। बोला बहन के अपमान का बदला यही सही होगा। मारिच सोने के हिरन का रूप धारण कर वन में पंचवटी के पास पहुंचता है। सोने के हिरन को देख माता सीता मुग्ध हो जाती है।
इस दौरान प्रभु की मुलाकात घायल जटायु से होती है। जटायु ने बताया कि माता सीता का हरण लंका पति रावण ने किया। जटायु ने बताया कि वो माता की रक्षा करने का प्रयास किए। इस दौरान रावण ने उन्हें घायल कर दिया। राम के गोद में जटायु की मौत हो जाती है। जटायु के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार कर प्रभु सीता का पता लगने के लिए आगे बढ़ जाते हैँ।
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भगवान श्री राम पंचवटी में माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के संग बैठे प्रकृति का आनंद ले रहे थे, तभी रावण की बहन शूर्पणखा वहां पहुंच जाती है। इस दौरान वह प्रभु राम के साथ लक्ष्मण को देख वह मोहित हो जाती है। इस दौरान सूपर्णखा बन संवर के प्रभु के पास पहुंचकर उनके समक्ष शादी का प्रस्ताव रखती है। प्रभु ने विनोद किया वे स्वयं को शादीशुदा बताकर उसे लक्ष्मण के पास भेज दिया। लक्ष्मण ने खुद को प्रभु का सेवक बताया और वापस उसे राम के पास भेज दिए। ऐसे में शूर्पणखा को क्रोध आ गया, उसने अपनी कामना पूर्ति में माता सीता को बाधक माना। इस दौरान वह माता सीता पर हमला बोली। तभी प्रभु श्री राम का ईशारा पाकर लक्ष्मण ने उसकी नाक को काट दिया। इसके बाद खून से लथपथ सूपर्णखा खरदूषण के पास पहुंची, और उसे धिक्कारते हुए आपबीती बताई। बहन की हालत देख खरदूषण प्रभु श्री राम पर हमला कर देेता है। इस दौरान वह मारा जाता है। यह देख शूर्पणखा सीधे रावण के पास पहुंच जाती है। वहां आपबीती बताने के साथ ही वह फूट-फूट कर रोने लगी। रावण घटनाक्रम को जानने के बाद सोचने लगा कि जो व्यक्ति खरदूषण का अंत कर सकता है, तब वह कोई साधारण मनुष्य नहीं होगा। रावण अपने मामा मारिच को बुलाता है और उससे पूरी बात बताकर छल पूर्वक सीता मैया के हरण करने की योजना बनाता है। बोला बहन के अपमान का बदला यही सही होगा। मारिच सोने के हिरन का रूप धारण कर वन में पंचवटी के पास पहुंचता है। सोने के हिरन को देख माता सीता मुग्ध हो जाती है।
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इस दौरान प्रभु की मुलाकात घायल जटायु से होती है। जटायु ने बताया कि माता सीता का हरण लंका पति रावण ने किया। जटायु ने बताया कि वो माता की रक्षा करने का प्रयास किए। इस दौरान रावण ने उन्हें घायल कर दिया। राम के गोद में जटायु की मौत हो जाती है। जटायु के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार कर प्रभु सीता का पता लगने के लिए आगे बढ़ जाते हैँ।
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