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खतरे के निशान की ओर बढ़ रही घाघरा
Updated Fri, 27 Jul 2018 11:16 PM IST
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घाघरा नदी खतरे के निशान की ओर बढ़ रही है। पिछले 24 घंटे में नदी का जलस्तर 23 सेमी बढ़ गया है। ऐसे में तटवर्ती इलाके के लोगों की धड़कनें बढ़ गई हैं। नदी में उठ रही लहरें मुक्तिधाम पर स्थित भारत माता मंदिर तथा शवदाह स्थल पर टक्कर मार रही है।
नदी के जलस्तर में बढ़ोत्तरी जारी रहने से तटवर्ती इलाकों के लोग चिंतित हो उठे हैं। पिछले तीन दिनों से घाघरा के जलस्तर में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। घाघरा की लहरे मुक्तिधाम पर स्थित भारत माता मंदिर तथा शवदाह स्थल पर टक्कर मार रही है ।जिससे स्थिति विषम हो गई है। इन स्थलों पर खतरा बढ़ता जा रहा है। वहीं नगर की ऐतिहासिक धरोहरें मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर, दुर्गा मंदिर, लोक निर्माण का डाक बंगला, हनुमान मंदिर, शाही मस्जिद, खाकी बाबा की कुटी सहित ऐतिहासिक धरोहरों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।
गौरीशंकर घाट पर शुक्रवार को घाघरा का जलस्तर 69.20 मीटर दर्ज किया गया। जबकि गुरुवार को जलस्तर 68.97 मीटर रहा। इस तरह 24 घंटे में घाघरा केा जलस्तर में 23 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। सिंचाई विभाग की तरफ से नगर की ऐतिहासिक धरोहरों को कटान से बचाने के लिए ठोस उपाय नहीं किए जाने से नगरवासियों में नाराजगी है। यदि समय रहते धरोहरो को बचाने का उपाय नही किया गया तो इन धरोहरों के साथ साथ नगर का अस्तित्व भी खतरे मे पड़ सकता है।
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नदी के जलस्तर में बढ़ोत्तरी जारी रहने से तटवर्ती इलाकों के लोग चिंतित हो उठे हैं। पिछले तीन दिनों से घाघरा के जलस्तर में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। घाघरा की लहरे मुक्तिधाम पर स्थित भारत माता मंदिर तथा शवदाह स्थल पर टक्कर मार रही है ।जिससे स्थिति विषम हो गई है। इन स्थलों पर खतरा बढ़ता जा रहा है। वहीं नगर की ऐतिहासिक धरोहरें मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर, दुर्गा मंदिर, लोक निर्माण का डाक बंगला, हनुमान मंदिर, शाही मस्जिद, खाकी बाबा की कुटी सहित ऐतिहासिक धरोहरों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।
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गौरीशंकर घाट पर शुक्रवार को घाघरा का जलस्तर 69.20 मीटर दर्ज किया गया। जबकि गुरुवार को जलस्तर 68.97 मीटर रहा। इस तरह 24 घंटे में घाघरा केा जलस्तर में 23 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। सिंचाई विभाग की तरफ से नगर की ऐतिहासिक धरोहरों को कटान से बचाने के लिए ठोस उपाय नहीं किए जाने से नगरवासियों में नाराजगी है। यदि समय रहते धरोहरो को बचाने का उपाय नही किया गया तो इन धरोहरों के साथ साथ नगर का अस्तित्व भी खतरे मे पड़ सकता है।
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