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अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को नहीं मिला मौसमी फल
Updated Tue, 10 Jul 2018 12:56 AM IST
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सर्व शिक्षा अभियान पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने के बाद भी परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। परिषदीय विद्यालयों में सोमवार के दिन बच्चों को मिड-डे-मील में मीनू के साथ ही मौसमी फल वितरित करने का नियम है, लेकिन अधिकांश विद्यालयों मेें बच्चों को फल मयस्सर नहीं हुआ। कई विद्यालयों में मिड-डे-मील मीनू के अनुरुप नहीं बना मिला। भूखों पेट ही बच्चों को घर जाना पड़ा। वहीं, प्रधानाध्यापक ग्राम प्रधान द्वारा मुहैया न कराने की बात कहकर मामले से पल्ला झाड़ ले रहे हैं। जबकि अधिकारी मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे।
जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। विद्यालयों में शत प्रतिशत नामांकन तथा ठहराव के लिए मिड-डे-मील सहित तमाम योजनाएं संचालित की गई हैं। लगभग सात करोड़ रुपया एमडीएम वार्षिक बजट है। इसके बाद भी बच्चों को मीनू के अनुरुप भोजन तथा फल नहीं मिल पा रहा है। रविवार के अवकाश के बाद विद्यालय आने में बच्चे कतराते हैं इसके लिए शासन की तरफ से बच्चों को सोमवार के दिन मिड-डे-मील रोटी सब्जी के साथ ही मौसमी फल देने का नियम लागू किया गया है। विभाग की तरफ से प्रधानाध्यापक तथा ग्राम प्रधान के संयुक्त खाते में कनवर्जन राशि भी भेजी जा रही है। इसके बाद भी सोमवार के दिन जिले के अधिकांश विद्यालयों में मौसमी फल वितरित नहीं किया जा सका। विद्यालयों के प्रधानाध्यापक ग्राम प्रधान को दोषी ठहरा रहे हैं। जबकि ग्राम प्रधान प्रधानाध्यापकों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। जबकि जिला समन्वयक एमडीएम अमित कुमार श्रीवास्तव ने कुछ भी बताने से इंकार किया। इस बाबत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी त्रिपाठी का कहना है कि खंड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। विद्यालयों में शत प्रतिशत नामांकन तथा ठहराव के लिए मिड-डे-मील सहित तमाम योजनाएं संचालित की गई हैं। लगभग सात करोड़ रुपया एमडीएम वार्षिक बजट है। इसके बाद भी बच्चों को मीनू के अनुरुप भोजन तथा फल नहीं मिल पा रहा है। रविवार के अवकाश के बाद विद्यालय आने में बच्चे कतराते हैं इसके लिए शासन की तरफ से बच्चों को सोमवार के दिन मिड-डे-मील रोटी सब्जी के साथ ही मौसमी फल देने का नियम लागू किया गया है। विभाग की तरफ से प्रधानाध्यापक तथा ग्राम प्रधान के संयुक्त खाते में कनवर्जन राशि भी भेजी जा रही है। इसके बाद भी सोमवार के दिन जिले के अधिकांश विद्यालयों में मौसमी फल वितरित नहीं किया जा सका। विद्यालयों के प्रधानाध्यापक ग्राम प्रधान को दोषी ठहरा रहे हैं। जबकि ग्राम प्रधान प्रधानाध्यापकों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। जबकि जिला समन्वयक एमडीएम अमित कुमार श्रीवास्तव ने कुछ भी बताने से इंकार किया। इस बाबत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी त्रिपाठी का कहना है कि खंड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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