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सगे भाइयों समेत तीन को एक-एक साल की सजा
Updated Thu, 30 Aug 2018 11:52 PM IST
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मऊ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट लोकेश नागर ने मारपीट के 35 वर्ष पुराने क्रास केस के मामले में एक पक्ष के नामजद छह आरोपियों में तीन को दोषी पाते हुए एक-एक वर्ष की सजा के साथ ही कुल दो-दो हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। अर्थदंड न देने पर दोषी 15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतेंगे। केस के छह आरोपियों में तीन को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया। दोनों ओर से तीन-तीन आरोपियों की मौत हो चुकी थी। इस लिए उनके विरुद्व मुकदमें की कार्यवाही समाप्त कर दी गई। मामला कोतवाली घोसी क्षेत्र का है।
मामले के अनुसार, पिड़ऊत सिंहपुर मंझनपुर गांव निवासी शेखा पुत्र जग्गन की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें गांव के ही गुरुदत्त पुत्र सरजू , शिवचन पुत्र अर्जुन, जय प्रकाश और छोटेलाल पुत्रगण शिवचन, दधिबल और शिजोर पुत्रगण गुरुदत्त को आरोपी बनाया गया। वही गुरुदत्त पुत्र सरजू ने न्यायालय में परिवाद दाखिल किया। इसमें कैलाश, बृजराज, बलिराम, शेखा, सूरत और रामसुधार को आरोपी बनाया। कथन था कि 25 अप्रैल 1983 को जमीन के विवाद और पुरानी रंजिश में आरोपियों नेा मारपीट की। जिसमें एक पक्ष के शेखा और बलिराम तथा दूसरे पक्ष के गुरुदत्त, शिवजोर और दधिवल को चोटें आई।
अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एपीओ राजेश कुमार मल्ल ने तीन गवाह पेश किए। वहीं दूसरे पक्ष से चार गवाह पेश हुए। सीजेएम ने र्कों को सुनने के बाद एक जयप्रकाश, छोटेलाल और दधिबल को एक-एक साल की सजा के साथ हीदो-दो हजार रुपया अर्थदंड लगाया। दूसरे पक्ष के कैलाश, बलिराम और सूरत को संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त कर दिया। तीन आरोपी गुरुदत्त, शिवचन और शिजोर तथा दूसरे पक्ष के बृजराज, शेखा और रामसुधार की मृत्यु हो जाने के चलते उनके विरुद्ध मुकदमा की कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
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मामले के अनुसार, पिड़ऊत सिंहपुर मंझनपुर गांव निवासी शेखा पुत्र जग्गन की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें गांव के ही गुरुदत्त पुत्र सरजू , शिवचन पुत्र अर्जुन, जय प्रकाश और छोटेलाल पुत्रगण शिवचन, दधिबल और शिजोर पुत्रगण गुरुदत्त को आरोपी बनाया गया। वही गुरुदत्त पुत्र सरजू ने न्यायालय में परिवाद दाखिल किया। इसमें कैलाश, बृजराज, बलिराम, शेखा, सूरत और रामसुधार को आरोपी बनाया। कथन था कि 25 अप्रैल 1983 को जमीन के विवाद और पुरानी रंजिश में आरोपियों नेा मारपीट की। जिसमें एक पक्ष के शेखा और बलिराम तथा दूसरे पक्ष के गुरुदत्त, शिवजोर और दधिवल को चोटें आई।
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अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एपीओ राजेश कुमार मल्ल ने तीन गवाह पेश किए। वहीं दूसरे पक्ष से चार गवाह पेश हुए। सीजेएम ने र्कों को सुनने के बाद एक जयप्रकाश, छोटेलाल और दधिबल को एक-एक साल की सजा के साथ हीदो-दो हजार रुपया अर्थदंड लगाया। दूसरे पक्ष के कैलाश, बलिराम और सूरत को संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त कर दिया। तीन आरोपी गुरुदत्त, शिवचन और शिजोर तथा दूसरे पक्ष के बृजराज, शेखा और रामसुधार की मृत्यु हो जाने के चलते उनके विरुद्ध मुकदमा की कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
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