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कटघरा शंकर सब्जीमंडी बदहाल
Updated Mon, 02 Jul 2018 01:08 AM IST
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क्षेत्र के कटघरा शंकर की सब्जी मंडी बदहाल है। यहां स्ट्रीट लाईट से लेकर सुविधाओं का बेहद अभाव है। साल में लाखों रुपये मंडी समिति द्वारा वसूले जाने के बाद भी न तो पेयजल आदि की व्यवस्था है और न ही व्यापारियों की सुविधा के लिए कोई कदम उठाया गया है। नई मंडी के लिए क्षेत्रीय विधायक और सूबे के मंत्री दारासिंह चौहान ने चुनाव के समय मंडी बनवाने की बात कही थी लेकिन अभी उस पर अमल होता नजर नहीं आ रहा है। स्थानीय व्यापारियों ने बगल में स्थित निष्प्रयोज्य पड़े सांस्कृतिक मंच की जमीन पर मंडी बनाने की मांग की है।
मधुबन से तीन किलोमीटर दूर मधुबन बेल्थरा रोड मार्ग पर कटघर ाशंकर तिराहे पर दो दशक से सब्जी मंडी लगती है। क्षेत्र के गोंठाबारी, हसनपुर, नेमडांड़, उंदुरा, बहरामपुर ,पलिया, अहिरौली, ककराडीह, नरायनपुर सहित सैकड़ो ऐसे गांव है जहां सब्जी की ब्यापक पैमाने पर गोभी, पालक, मिर्चा, टमाटर,बोड़ो, सूरन, तरोई, नेनुआ करेली, लौकी, काशीफल, मूली आदि का अचछा उत्पादन होता है। किसान इन्हें लेकर इस मंडी में आते हैं। मंडी में घोसी, दोहरीघाट, बेल्थरा, इंदारा, मझवारा आदि दूर दूर के सब्जी विक्रेता आकर खरीददारी करके अपने कस्बों, चट्टी चौराहों आदि पर बेचकर रोजी रोटी चलाते हैं। जबकि आलू, प्याज, अदरक, टमाटर, नींबू, फूलगोभी आदि सब्जियां बाहर से भी आती है। जिससे मंडी समिति को लाखों रुपये का राजस्व मिलता है।
मंडी के लिए जगह न होने से यहां सैकड़ो किसान अपनी सब्जियां सड़क के किनारे ही लगाते हैं जिससे सड़क और संकरी हो जाती है और एक दो वाहन के गुजरने, कुछ वाहन मालिकों द्वारा सड़क पर ही अपनी गाड़ी पर सब्जी लादने तथा सवारी गाड़ियों के आवागमन से ही सड़क पर घण्टों जाम लग जाता है। यही नही शहीद स्मारक के सामने रखी गुमटियां भी परेशानी की सबब बनती है।
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इनसेट
सब्जी उत्पादकों की संख्या बढ़ी पर जगह नहीं मिली
मधुबन।मंडी में सब्जियां लेकर आने वाले किसानों की संख्या दिनोंदिन बढ्ती रहने से कटघराशंकर में सब्जी मंडी की जगह छोटी पड़ने से भी जाम की स्थिति बनी रहती है।इससे निजात पाने के लिए कटघराशंकर के प्रधान अवधेश गिरी ,व्यापार मंडल के अश्वनी मल्ल, मनोज गुप्ता, जमील भाई, राजा सोनकर, दुर्गा प्रसाद, राधेश्याम गुप्ता, अनिल गुप्ता आदि ने कटघराशंकर में ही महज 100 मीटर की दूरी पर दो एकड़ से अधिक में स्थित निष्प्रयोज्य पड़े सांस्कृतिक मंच की जमीन को मंडी समिति के नाम करके वहीं सब्जी मंडी और फल संरक्षण शीत गृह बनाने की मांग की है।
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मधुबन से तीन किलोमीटर दूर मधुबन बेल्थरा रोड मार्ग पर कटघर ाशंकर तिराहे पर दो दशक से सब्जी मंडी लगती है। क्षेत्र के गोंठाबारी, हसनपुर, नेमडांड़, उंदुरा, बहरामपुर ,पलिया, अहिरौली, ककराडीह, नरायनपुर सहित सैकड़ो ऐसे गांव है जहां सब्जी की ब्यापक पैमाने पर गोभी, पालक, मिर्चा, टमाटर,बोड़ो, सूरन, तरोई, नेनुआ करेली, लौकी, काशीफल, मूली आदि का अचछा उत्पादन होता है। किसान इन्हें लेकर इस मंडी में आते हैं। मंडी में घोसी, दोहरीघाट, बेल्थरा, इंदारा, मझवारा आदि दूर दूर के सब्जी विक्रेता आकर खरीददारी करके अपने कस्बों, चट्टी चौराहों आदि पर बेचकर रोजी रोटी चलाते हैं। जबकि आलू, प्याज, अदरक, टमाटर, नींबू, फूलगोभी आदि सब्जियां बाहर से भी आती है। जिससे मंडी समिति को लाखों रुपये का राजस्व मिलता है।
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मंडी के लिए जगह न होने से यहां सैकड़ो किसान अपनी सब्जियां सड़क के किनारे ही लगाते हैं जिससे सड़क और संकरी हो जाती है और एक दो वाहन के गुजरने, कुछ वाहन मालिकों द्वारा सड़क पर ही अपनी गाड़ी पर सब्जी लादने तथा सवारी गाड़ियों के आवागमन से ही सड़क पर घण्टों जाम लग जाता है। यही नही शहीद स्मारक के सामने रखी गुमटियां भी परेशानी की सबब बनती है।
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सब्जी उत्पादकों की संख्या बढ़ी पर जगह नहीं मिली
मधुबन।मंडी में सब्जियां लेकर आने वाले किसानों की संख्या दिनोंदिन बढ्ती रहने से कटघराशंकर में सब्जी मंडी की जगह छोटी पड़ने से भी जाम की स्थिति बनी रहती है।इससे निजात पाने के लिए कटघराशंकर के प्रधान अवधेश गिरी ,व्यापार मंडल के अश्वनी मल्ल, मनोज गुप्ता, जमील भाई, राजा सोनकर, दुर्गा प्रसाद, राधेश्याम गुप्ता, अनिल गुप्ता आदि ने कटघराशंकर में ही महज 100 मीटर की दूरी पर दो एकड़ से अधिक में स्थित निष्प्रयोज्य पड़े सांस्कृतिक मंच की जमीन को मंडी समिति के नाम करके वहीं सब्जी मंडी और फल संरक्षण शीत गृह बनाने की मांग की है।