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समय सीमा समाप्त, नहीं फाइनल हो सकी समायोजन सूची
Updated Tue, 18 Jul 2017 11:06 PM IST
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मऊ। प्रदेश में नई सरकार गठन के चार माह बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग में सुधार होता नजर नहीं आ रहा है। शासन द्वारा दी गई मियाद पूरी हो गई लेकिन अभी तक शिक्षकों के स्थानांतरण समायोजन की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी है। इससे जहां शिक्षकों में उहापोह की स्थिति बनी हुई है वहीं शैक्षिक गुुणवत्ता प्रभावित हो रही है। शासन की तरफ से 18 जुलाई तक स्थानांतरण समायोजन प्रक्रिया पूरी करने का फरमान दिया गया था।
जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। निजी विद्यालयों की तर्ज पर परिषदीय विद्यालयों में नया शिक्षा सत्र अप्रैल माह में शुरू तो किया गया, लेकिन अन्य व्यवस्था में बदलाव नहीं किया जा सका है। ऐसे में बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा नहीं मिल पा रही है। गुणवत्तापरक शिक्षा का हाल यह है कि गत 17 जुलाई को जिलाधिकारी द्वारा प्राथमिक विद्यालय खुखुंदवा तथा प्राथमिक विद्यालय भदसा का औचक निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण में दूसरी कक्षा के बच्चे अपना नाम तक लिख पा रहे थे। जबकि विभागीय रिपोर्ट में सब कुछ ओके दिखा दिया जा रहा है। विद्यालयों में शत प्रतिशन नामांकन के लिए जहां विशेष अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन विभागीय अधिकारियों के उदासीन रवैए से स्कूल चलो अभियान को गति नहीं मिल पा रही है। परिषदीय विद्यालयों में 1.31 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। जबकि लगभग 5234 शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षा सत्र का चौथा माह चल रहा है अभी तक स्थानांतरण समायोजन होना तो दूर सूची फाइनल तक नहीं की जा सकी है। ऐसे में शिक्षक पूरे मनोयोग से काम नहीं कर पा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो विभाग की तरफ से 600 सरप्लस शिक्षकों का सर्वे किया गया है। शासन की तरफ से 18 जुलाई तक स्थानांतरण समायोजन प्रक्रिया को पूरा कर लेने का फरमान जारी किया गया था। इस बाबत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार का कहना है कि स्थानांतरण समायोजन प्रक्रिया पूरी करने के लिए जिलास्तरीय कमेटी गठित कर दी गई है। एक सप्ताह के अंदर प्रक्रिया को पूरा कर ली जाएगी।
इनसेट
मऊ। बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से स्थानांतरण समायोजन के मामले में एक नया फरमान जारी किया गया है। नए शासनादेश के तहत 18 जुलाई को प्रक्रिया पूरी करने के बाद विभाग की तरफ से बनाए गए फार्मेट मेें फाइनल सूची को 20 जुलाई तक शासन को भेजने के साथ ही एनआईसी पर अपलोड किया जाना है।
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क्या कहते हैं शिक्षक
विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अंजनी कुमार सिंह का कहना है कि स्थानांतरण समायोजन प्रक्रिया में विलंब होने से शिक्षक सशंकित और ऊहापोह में हैं। प्रक्रिया समय से पूरी होती तो समस्त शिक्षक उत्साह के साथ काम करते। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष कृष्णानंद राय का कहना है कि स्थानांतण समायोजन की प्रक्रिया विलंब समझ से परे है। प्रक्रिया को समय से पूरा करने की व्यवस्था की जाए।
इनसेट
स्थानांतरण समायोजन प्रक्रिया में तकनीकी पेंच
मऊ। परिषदीय विद्यालयों में स्थानांतरण समायोजन प्रक्रिया में तकनीकी पेंच फंसता नजर आ रहा है। शासन की तरफ से ऐसे स्कूल में जहां उर्दू पढ़ने वाले कम से कम 10 बच्चे थे वहां पर एक-एक उर्दू शिक्षकों की तैनाती की गई। जिले में लगभग 200 उर्दू शिक्षकों की तैनाती की जा चुकी है। शासनादेश में यह भी कहा गया था कि उर्दू शिक्षक का स्थानांतरण उसी स्थिति में होगा जब उक्त विद्यालय में पद खाली रहेगा। लेकिन शासनादेश को ताक पर रखकर परदहां, कोपागंज, रानीपुर सहित अन्य ब्लाकों के विभिन्न विद्यालयों पर में उर्दू शिक्षकों को समायोजित कर दिया गया। हालत यह है कि किसी विद्यालय पर पांच से छह उर्दू शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है। जबकि इन विद्यालयों पर एक भी उर्दू के छात्र नहीं हैं। ऐसी स्थिति में यह मांग उठने लगी है कि शासनादेश के अनुरुप उर्दू शिक्षकों को चिंहित स्कूलों में ही तैनात किया जाए। समस्या का निस्तारण न होने की स्थिति में बशिक्षक आंदोलित हो सकते हैं।
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जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। निजी विद्यालयों की तर्ज पर परिषदीय विद्यालयों में नया शिक्षा सत्र अप्रैल माह में शुरू तो किया गया, लेकिन अन्य व्यवस्था में बदलाव नहीं किया जा सका है। ऐसे में बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा नहीं मिल पा रही है। गुणवत्तापरक शिक्षा का हाल यह है कि गत 17 जुलाई को जिलाधिकारी द्वारा प्राथमिक विद्यालय खुखुंदवा तथा प्राथमिक विद्यालय भदसा का औचक निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण में दूसरी कक्षा के बच्चे अपना नाम तक लिख पा रहे थे। जबकि विभागीय रिपोर्ट में सब कुछ ओके दिखा दिया जा रहा है। विद्यालयों में शत प्रतिशन नामांकन के लिए जहां विशेष अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन विभागीय अधिकारियों के उदासीन रवैए से स्कूल चलो अभियान को गति नहीं मिल पा रही है। परिषदीय विद्यालयों में 1.31 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। जबकि लगभग 5234 शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षा सत्र का चौथा माह चल रहा है अभी तक स्थानांतरण समायोजन होना तो दूर सूची फाइनल तक नहीं की जा सकी है। ऐसे में शिक्षक पूरे मनोयोग से काम नहीं कर पा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो विभाग की तरफ से 600 सरप्लस शिक्षकों का सर्वे किया गया है। शासन की तरफ से 18 जुलाई तक स्थानांतरण समायोजन प्रक्रिया को पूरा कर लेने का फरमान जारी किया गया था। इस बाबत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार का कहना है कि स्थानांतरण समायोजन प्रक्रिया पूरी करने के लिए जिलास्तरीय कमेटी गठित कर दी गई है। एक सप्ताह के अंदर प्रक्रिया को पूरा कर ली जाएगी।
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मऊ। बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से स्थानांतरण समायोजन के मामले में एक नया फरमान जारी किया गया है। नए शासनादेश के तहत 18 जुलाई को प्रक्रिया पूरी करने के बाद विभाग की तरफ से बनाए गए फार्मेट मेें फाइनल सूची को 20 जुलाई तक शासन को भेजने के साथ ही एनआईसी पर अपलोड किया जाना है।
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क्या कहते हैं शिक्षक
विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अंजनी कुमार सिंह का कहना है कि स्थानांतरण समायोजन प्रक्रिया में विलंब होने से शिक्षक सशंकित और ऊहापोह में हैं। प्रक्रिया समय से पूरी होती तो समस्त शिक्षक उत्साह के साथ काम करते। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष कृष्णानंद राय का कहना है कि स्थानांतण समायोजन की प्रक्रिया विलंब समझ से परे है। प्रक्रिया को समय से पूरा करने की व्यवस्था की जाए।
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स्थानांतरण समायोजन प्रक्रिया में तकनीकी पेंच
मऊ। परिषदीय विद्यालयों में स्थानांतरण समायोजन प्रक्रिया में तकनीकी पेंच फंसता नजर आ रहा है। शासन की तरफ से ऐसे स्कूल में जहां उर्दू पढ़ने वाले कम से कम 10 बच्चे थे वहां पर एक-एक उर्दू शिक्षकों की तैनाती की गई। जिले में लगभग 200 उर्दू शिक्षकों की तैनाती की जा चुकी है। शासनादेश में यह भी कहा गया था कि उर्दू शिक्षक का स्थानांतरण उसी स्थिति में होगा जब उक्त विद्यालय में पद खाली रहेगा। लेकिन शासनादेश को ताक पर रखकर परदहां, कोपागंज, रानीपुर सहित अन्य ब्लाकों के विभिन्न विद्यालयों पर में उर्दू शिक्षकों को समायोजित कर दिया गया। हालत यह है कि किसी विद्यालय पर पांच से छह उर्दू शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है। जबकि इन विद्यालयों पर एक भी उर्दू के छात्र नहीं हैं। ऐसी स्थिति में यह मांग उठने लगी है कि शासनादेश के अनुरुप उर्दू शिक्षकों को चिंहित स्कूलों में ही तैनात किया जाए। समस्या का निस्तारण न होने की स्थिति में बशिक्षक आंदोलित हो सकते हैं।