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अब टूटने लगा कुंभ मेला से वृंदावन विकास का सपना
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वृंदावन। हरिद्वार कुंभ से पहले वृंदावन में यमुना के तट पर होने वाले संतों समागम के लिए देखा गया पर्यटन विकास का सपना अब टूटता नजर आ रहा है। इससे जुड़ी वृंदावन विकास की करीब दो हजार करोड़ की योजनाएं फाइलों में कैद हो गई हैं। कोरोना संक्रमण के चलते अब इन प्रस्तावित वृंदावन विकास योजनाओं पर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ शासन के स्तर पर भी चर्चा नहीं होती है।
मार्च 2021 में हरिद्वार कुंभ मेला शुरू होना है। इसके 40 दिन पहले संतों समागम वृंदावन में यमुना के तट पर होने की परंपरा है। इसी को भव्य रूप देने के लिए इस साल के प्रारंभ में ही तैयारियां शुरू हो गई थीं। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में तो उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने वृंदावन में बैठक भी ली थी। करीब दो हजार करोड़ का विकास प्लान तैयार किया था, जिसमें 40 हेक्टेयर मेला क्षेत्र पर 648 करोड़ के खर्च का प्रस्ताव था। इसके अलावा 13 सौ करोड़ की एक नई दो लेन सड़क भी प्रस्तावित की थी, जो यमुना एक्सप्रेस-वे को एक नए रास्ते से वृंदावन को जोड़ती। कुंभ मेला के माध्यम से भगवान श्रीराधा-कृष्ण की लीला स्थली वृंदावन को मिलने वाली विकास की इस सौगात पर कोरोना संक्रमण ने ग्रहण लगा दिया है। अब विकास की योजनाओं की फाइलेें बंद हो गई हैं।
खास बातें
- यमुना किनारे केशीघाट और देवराहा बाबा घाट के बीच करीब 40 हेक्टेयर भूमि पर होना था संत समागम
- जनवरी माह के दौरान लोकनिर्माण विभाग ने शासन को 648.56 लाख रुपये के खर्च का भेजा था प्रस्ताव।
- यमुना के किनारे 40 दिन तक होने वाले संत समागम में करीब 20 हजार साधु-संतों के आने की थी संभावना
- यमुना में पानी की स्थिति को देखते हुए अर्द्धकुंभ के नाम से प्रसिद्ध संत समागम में संतों के स्नान के लिए होनी थी
- यमुना पर पांटून पुल, 25 बेड का अस्पताल, केशीघाट और देवराहा बाबा घाट के बीच 2 पांटून पुल का था प्रस्ताव
- यमुना एक्सप्रेस वे, मांट कट से बेलवन होते हुए जुगलघाट से वृंदावन परिमार्ग का दो लेन मार्ग का निर्माण का भी शासन को दिया था प्रस्ताव।
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मार्च 2021 में हरिद्वार कुंभ मेला शुरू होना है। इसके 40 दिन पहले संतों समागम वृंदावन में यमुना के तट पर होने की परंपरा है। इसी को भव्य रूप देने के लिए इस साल के प्रारंभ में ही तैयारियां शुरू हो गई थीं। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में तो उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने वृंदावन में बैठक भी ली थी। करीब दो हजार करोड़ का विकास प्लान तैयार किया था, जिसमें 40 हेक्टेयर मेला क्षेत्र पर 648 करोड़ के खर्च का प्रस्ताव था। इसके अलावा 13 सौ करोड़ की एक नई दो लेन सड़क भी प्रस्तावित की थी, जो यमुना एक्सप्रेस-वे को एक नए रास्ते से वृंदावन को जोड़ती। कुंभ मेला के माध्यम से भगवान श्रीराधा-कृष्ण की लीला स्थली वृंदावन को मिलने वाली विकास की इस सौगात पर कोरोना संक्रमण ने ग्रहण लगा दिया है। अब विकास की योजनाओं की फाइलेें बंद हो गई हैं।
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खास बातें
- यमुना किनारे केशीघाट और देवराहा बाबा घाट के बीच करीब 40 हेक्टेयर भूमि पर होना था संत समागम
- जनवरी माह के दौरान लोकनिर्माण विभाग ने शासन को 648.56 लाख रुपये के खर्च का भेजा था प्रस्ताव।
- यमुना के किनारे 40 दिन तक होने वाले संत समागम में करीब 20 हजार साधु-संतों के आने की थी संभावना
- यमुना में पानी की स्थिति को देखते हुए अर्द्धकुंभ के नाम से प्रसिद्ध संत समागम में संतों के स्नान के लिए होनी थी
- यमुना पर पांटून पुल, 25 बेड का अस्पताल, केशीघाट और देवराहा बाबा घाट के बीच 2 पांटून पुल का था प्रस्ताव
- यमुना एक्सप्रेस वे, मांट कट से बेलवन होते हुए जुगलघाट से वृंदावन परिमार्ग का दो लेन मार्ग का निर्माण का भी शासन को दिया था प्रस्ताव।