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समाज के रोकने से रुकेंगे अपराध: इंद्रेश कुमार
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Sun, 14 Jun 2015 11:39 PM IST
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वात्सल्य ग्राम में बालिका व्यक्तित्व विकास शिविर में रविवार को बौद्धिक सत्र चला। राष्ट्रीय मुस्लिम मंच और राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के संस्थापक इन्द्रेष कुमार ने देश के हालात पर शिविरार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज देश में नैतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है। सरकार अपराध को समाप्त नहीं कर सकती उनको रोक सकती है, अपराध के प्रति भय पैदा कर सकती है। अपराध यदि रुकेगा तो समाज के रोकने से ही रुकेगा।
इन्द्रेष कुमार ने कहा कि यदि हमें बेटियों और माताओं पर होने वाले अत्याचारों को रोकना है तो सबसे पहले बच्चों को संस्कारित करना होगा। विशेष रूप से बेटियों को शिक्षित करना अनिवार्य होना चाहिए। पहले हम किसी अपरिचित महिला को मां के समान, बेटी-बहन के समान मानते थे। उसे वही सम्मान भी दिया करते थे। किन्तु आज महिला को औरत मात्र समझते हैं। संबंध बदलने से भाव भी बदल जाते हैं इसीलिए आपराधिक प्रवृतियां बढ़ती जा रही है। इसे रोकने के लिए हमें समाज में संस्कारों का बीजारोपण करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि हमारे रिश्तों के अर्थ बदलते जा रहे हैं। अब हम पाश्चात्य संस्कृति को जीने का प्रयास करने लगे हैं। चीन में 18 प्रतिशत कन्या भ्रूण हत्याएं होती है। चीन में कन्या भ्रूण हत्या को अपराध की सूची से अलग कर दिया। किंतु भारत में यह सब अपराध माना जाता है।
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शिविर में संजय भैया, डा. एके राय, विभोर प्रकाशम, साध्वी स्वरूप गिरि, देवेंद्र प्रकाश दुबे, बालजी चतुर्वेदी, डा. कैलाश द्विवेदी, कमलेश चन्द्र पांडेय, दीप्ति शर्मा और उमाशंकर राही उपस्थित रहे। पांच जून से चल रहे दस दिवसीय आवासीय वात्सल्य बालिका व्यक्तित्व विकास शिविर का समापन 15 जून की शाम को शारीरिक और सांस्कृतिक प्रदर्शन के साथ वात्सल्य ग्राम में होगा।
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इन्द्रेष कुमार ने कहा कि यदि हमें बेटियों और माताओं पर होने वाले अत्याचारों को रोकना है तो सबसे पहले बच्चों को संस्कारित करना होगा। विशेष रूप से बेटियों को शिक्षित करना अनिवार्य होना चाहिए। पहले हम किसी अपरिचित महिला को मां के समान, बेटी-बहन के समान मानते थे। उसे वही सम्मान भी दिया करते थे। किन्तु आज महिला को औरत मात्र समझते हैं। संबंध बदलने से भाव भी बदल जाते हैं इसीलिए आपराधिक प्रवृतियां बढ़ती जा रही है। इसे रोकने के लिए हमें समाज में संस्कारों का बीजारोपण करना पड़ेगा।
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उन्होंने कहा कि हमारे रिश्तों के अर्थ बदलते जा रहे हैं। अब हम पाश्चात्य संस्कृति को जीने का प्रयास करने लगे हैं। चीन में 18 प्रतिशत कन्या भ्रूण हत्याएं होती है। चीन में कन्या भ्रूण हत्या को अपराध की सूची से अलग कर दिया। किंतु भारत में यह सब अपराध माना जाता है।
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शिविर में संजय भैया, डा. एके राय, विभोर प्रकाशम, साध्वी स्वरूप गिरि, देवेंद्र प्रकाश दुबे, बालजी चतुर्वेदी, डा. कैलाश द्विवेदी, कमलेश चन्द्र पांडेय, दीप्ति शर्मा और उमाशंकर राही उपस्थित रहे। पांच जून से चल रहे दस दिवसीय आवासीय वात्सल्य बालिका व्यक्तित्व विकास शिविर का समापन 15 जून की शाम को शारीरिक और सांस्कृतिक प्रदर्शन के साथ वात्सल्य ग्राम में होगा।