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Mathura News: सर्वाधिक जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने वाली गांव पंचायतों की होगी जांच
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मथुरा। फर्जी जन्मप्रमाण पत्र खुलासे के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। प्रशासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय टीम अब छाता की गांव पंचायत फालिन और गुहिता दसविस्वा के साथ-साथ जिले की प्रत्येक गांव पंचायत में जारी जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्रों की जांच करेगी। जांच में सर्वाधिक जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने वाली गांव पंचायतों पर ज्यादा जोर दिया जाएगा। सोमवार को छाता से जांच की शुरूआत होगी।
कोतवाली पुलिस ने जनसेवा केंद्र की आड़ में फर्जी जन्मप्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया था। जनसेवा केंद्र संचालक समेत पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। हालांकि आरोपियों को कोर्ट से जमानत मिल गई है। इधर, पुलिस की प्रारंभिक जांच में छाता की गांव पंचायत फालिन और गुहिता दसविस्वा के गांव पंचायत सचिव चंद्रपाल की संदिग्ध भूमिका बताई जा रही है। माना जा रहा है कि सचिव और जनसेवा केंद्र संचालक की मिलीभगत से यह खेल चल रहा था। इस खेल में कई अन्य के शामिल होने की भी आशंका जताई जा रही है।
डीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम प्रशासन अमरेश कुमार की अध्यक्षता में डीपीआरओ धनंजय जायसवाल और एसडीएम छाता वैभव गुप्ता की तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। टीम सोमवार को गांव पंचायत फालिन और गुहिता दसविस्वा के ग्रामीणों के बनाए गए फर्जी जन्मप्रमाण पत्रों की जांच करेंगे। डीपीआरओ ने बताया कि दोनों ग्राम पंचायतों में फरवरी 2025 से लेकर 24 दिसंबर तक सचिव की आईडी से बने हुए जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्रों की जांच की जाएगी। मोबाइल फोन की गतिविधियां भी देखी जाएंगी। देखा जाएगा कि आरोपियों ने कितने बाहरी व्यक्तियों के जन्मप्रमाण पत्र बनाए हैं। अन्य गांव पंचायतों के सचिव की आईडी भी चेक की जाएगी और देखा जाएगा कि किस गांव पंचायत में सर्वाधिक जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए हैं। आईडी में संदिग्धता मिलने पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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कोतवाली पुलिस ने जनसेवा केंद्र की आड़ में फर्जी जन्मप्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया था। जनसेवा केंद्र संचालक समेत पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। हालांकि आरोपियों को कोर्ट से जमानत मिल गई है। इधर, पुलिस की प्रारंभिक जांच में छाता की गांव पंचायत फालिन और गुहिता दसविस्वा के गांव पंचायत सचिव चंद्रपाल की संदिग्ध भूमिका बताई जा रही है। माना जा रहा है कि सचिव और जनसेवा केंद्र संचालक की मिलीभगत से यह खेल चल रहा था। इस खेल में कई अन्य के शामिल होने की भी आशंका जताई जा रही है।
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डीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम प्रशासन अमरेश कुमार की अध्यक्षता में डीपीआरओ धनंजय जायसवाल और एसडीएम छाता वैभव गुप्ता की तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। टीम सोमवार को गांव पंचायत फालिन और गुहिता दसविस्वा के ग्रामीणों के बनाए गए फर्जी जन्मप्रमाण पत्रों की जांच करेंगे। डीपीआरओ ने बताया कि दोनों ग्राम पंचायतों में फरवरी 2025 से लेकर 24 दिसंबर तक सचिव की आईडी से बने हुए जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्रों की जांच की जाएगी। मोबाइल फोन की गतिविधियां भी देखी जाएंगी। देखा जाएगा कि आरोपियों ने कितने बाहरी व्यक्तियों के जन्मप्रमाण पत्र बनाए हैं। अन्य गांव पंचायतों के सचिव की आईडी भी चेक की जाएगी और देखा जाएगा कि किस गांव पंचायत में सर्वाधिक जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए हैं। आईडी में संदिग्धता मिलने पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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