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Mathura News: सीमा की रखवाली के लिए वीरों को तैयार करती है गांव जाबरा की मिट्टी
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मांट (मथुरा)। क्षेत्र के जाबरा गांव की मिट्टी सीमाओं की रखवाली करने वाले सैनिक तैयार करती है। यहां हर घर से कोई न कोई बेटा सरहद की रक्षा कर रहा है। यहां के युवा भारतीय सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस गांव के सौ से अधिक युवा सेना में हैं और वर्तमान में देश की अलग-अलग की सीमाओं पर तैनात हैं। करीब इतने ही इस गांव में पूर्व सैनिक हैं।
जिले में काफी सैन्यकर्मी इसी गांव में हैं। कई पूर्व सैनिक ऐसे भी हैं, जिन्होंने भारत-चीन युद्ध, भारत-पाकिस्तान युद्धों में भाग लिया। पूर्व सैनिकों ने बताया कि शुरू से ही गांव के हर बच्चे में सेना में जाने का जुनून सवार रहता है। उनकी परवरिश भी उसी तरह की जाती है। सीमा पर तैनात परिजन ने बताया है कि उनका सौभाग्य है उनका बेटा देश की रक्षा कर रहा है। ग्रामीण अशोक चौधरी बताते हैं कि उन्हें इस बात का गर्व है कि उनके गांव से नौसेना, थल सेना और वायु सेना में शामिल हैं। सौ से अधिक कुछ ऐसा भी युवा हैं जो सेना में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
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जाटों के इन गांवों में हर तीसरे घर में एक सैनिक
क्षेत्र के इन गांवों में हर तीसरे घर से एक सैनिक है। इनमें जाबरा, दरबे, नसीटी, अरुआ, जैसवां, पपरेला, खुर्रम, नगला हरदयाल, नगला सीताराम, गढ़ी आशा, जसौली, कसेरा, ढकू, अधियांर, लक्ष्मीनगर समेत दर्जनों गांवों में करीब एक हजार से अधिक सैनिक हैं। ये युवा मेजर, कर्नल, लेफ्टिनेंट, ब्रिगेडियर समेत सभी पदों पर हैं।
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सीमा पर जाने के लिए तैयार हैं गांव के पूर्व सैनिक
गांव भीम निवासी हाकिम सिंह और नाहर सिंह ने बताया कि 1971 में भारत-पाकिस्तान में युद्ध हुआ था तो उन्होंने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया था। वहीं जाबरा के पूर्व सैनिक रेशम सिंह पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध लड़ा था। उनका बेटा भी सेना में जाने की तैयारी कर रहा है।
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जिले में काफी सैन्यकर्मी इसी गांव में हैं। कई पूर्व सैनिक ऐसे भी हैं, जिन्होंने भारत-चीन युद्ध, भारत-पाकिस्तान युद्धों में भाग लिया। पूर्व सैनिकों ने बताया कि शुरू से ही गांव के हर बच्चे में सेना में जाने का जुनून सवार रहता है। उनकी परवरिश भी उसी तरह की जाती है। सीमा पर तैनात परिजन ने बताया है कि उनका सौभाग्य है उनका बेटा देश की रक्षा कर रहा है। ग्रामीण अशोक चौधरी बताते हैं कि उन्हें इस बात का गर्व है कि उनके गांव से नौसेना, थल सेना और वायु सेना में शामिल हैं। सौ से अधिक कुछ ऐसा भी युवा हैं जो सेना में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
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जाटों के इन गांवों में हर तीसरे घर में एक सैनिक
क्षेत्र के इन गांवों में हर तीसरे घर से एक सैनिक है। इनमें जाबरा, दरबे, नसीटी, अरुआ, जैसवां, पपरेला, खुर्रम, नगला हरदयाल, नगला सीताराम, गढ़ी आशा, जसौली, कसेरा, ढकू, अधियांर, लक्ष्मीनगर समेत दर्जनों गांवों में करीब एक हजार से अधिक सैनिक हैं। ये युवा मेजर, कर्नल, लेफ्टिनेंट, ब्रिगेडियर समेत सभी पदों पर हैं।
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सीमा पर जाने के लिए तैयार हैं गांव के पूर्व सैनिक
गांव भीम निवासी हाकिम सिंह और नाहर सिंह ने बताया कि 1971 में भारत-पाकिस्तान में युद्ध हुआ था तो उन्होंने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया था। वहीं जाबरा के पूर्व सैनिक रेशम सिंह पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध लड़ा था। उनका बेटा भी सेना में जाने की तैयारी कर रहा है।