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‘नष्ट हो रहा ब्रज वृंदावन का मूल स्वरूप’
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वृंदावन (मथुरा)। श्रीराधाकृष्ण की लीलास्थली वृंदावन के नष्ट होते मूल स्वरूप को लेकर चिंतित ब्रज वृंदावन हेरिटेज एलायंस ने विकास प्रक्रिया में ब्रजवासियों को जोड़ने की मांग उठाई है। इस धार्मिक नगरी की दिन प्रतिदिन बदलती स्थिति पर चिंतन करते हुए एलायंस के पदाधिकारियों ने अब जिला प्रशासन से लेकर शासन तक इसके लिए अपनी आवाज को उठाने की रणनीति तैयार की।
सोमवार को श्रीगोविंद देव मंदिर में संगठन के राष्ट्रीय संयोजक आचार्य नरेश नारायण की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में ब्रज वृंदावन के मूल स्वरूप के संरक्षण पर चर्चा की। इसमें वक्ताओं ने यहां ऐतिहासिक धरोहरों, यमुना की दयनीय दशा, वन-उपवन एवं प्राचीन देवालयों की जीर्ण-शीर्ण अवस्था पर चिंता जाहिर की। कहा कि अब देश-विदेश से आने वाले भक्तों को धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण से वृंदावन के दर्शन नहीं हो पाता है। वे अब आधुनिक होटल, गेस्ट हाउस, पार्क तथा नए-नए मंदिरों के दर्शन तक सीमित हो गए हैं। यमुना के प्राचीन घाट, प्राचीन मंदिर एवं देवालय, वन-उपवन ब्रज के मूल स्वरूप का हिस्सा होने के बाद भी श्रद्धालुओं से दूर हो गए हैं।
इस चिंताजनक स्थिति से बचने के लिए अब संगठन ने शासन-प्रशासन स्तर पर वार्ता के लिए दामोदर शास्त्री को समन्वयक बनाया गया। साथ ही प्रशासन की विकास नीति से ब्रजवासियों को जोड़ने के लिए संबंधित क्षेत्रों के जानकारों का पैनल बनाने का भी निर्णय लिया। बैठक में आचार्य नरेश नारायण, गोविंद खंडेलवाल, सुमित गौतम, दानबिहारी लाल शर्मा, तमाल कृष्ण दास, सिद्धार्थ शुक्ला, कन्हैया लाल गुप्ता, रूपकिशोर वर्मा, कुंजबिहारी पाठक, जगन्नाथ पोद्दार, भरत गौतम, हरिवंश गौतम, पलाश अग्रवाल, आचार्य दीपक गोस्वामी, गोविंद पंडित आदि उपस्थित थे।
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सोमवार को श्रीगोविंद देव मंदिर में संगठन के राष्ट्रीय संयोजक आचार्य नरेश नारायण की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में ब्रज वृंदावन के मूल स्वरूप के संरक्षण पर चर्चा की। इसमें वक्ताओं ने यहां ऐतिहासिक धरोहरों, यमुना की दयनीय दशा, वन-उपवन एवं प्राचीन देवालयों की जीर्ण-शीर्ण अवस्था पर चिंता जाहिर की। कहा कि अब देश-विदेश से आने वाले भक्तों को धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण से वृंदावन के दर्शन नहीं हो पाता है। वे अब आधुनिक होटल, गेस्ट हाउस, पार्क तथा नए-नए मंदिरों के दर्शन तक सीमित हो गए हैं। यमुना के प्राचीन घाट, प्राचीन मंदिर एवं देवालय, वन-उपवन ब्रज के मूल स्वरूप का हिस्सा होने के बाद भी श्रद्धालुओं से दूर हो गए हैं।
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इस चिंताजनक स्थिति से बचने के लिए अब संगठन ने शासन-प्रशासन स्तर पर वार्ता के लिए दामोदर शास्त्री को समन्वयक बनाया गया। साथ ही प्रशासन की विकास नीति से ब्रजवासियों को जोड़ने के लिए संबंधित क्षेत्रों के जानकारों का पैनल बनाने का भी निर्णय लिया। बैठक में आचार्य नरेश नारायण, गोविंद खंडेलवाल, सुमित गौतम, दानबिहारी लाल शर्मा, तमाल कृष्ण दास, सिद्धार्थ शुक्ला, कन्हैया लाल गुप्ता, रूपकिशोर वर्मा, कुंजबिहारी पाठक, जगन्नाथ पोद्दार, भरत गौतम, हरिवंश गौतम, पलाश अग्रवाल, आचार्य दीपक गोस्वामी, गोविंद पंडित आदि उपस्थित थे।
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