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Mathura News: डाकू गोवर्धन भी हुआ श्रीकृष्ण का भक्त
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मथुरा। श्रीरामायण प्रचारिणी समिति द्वारा चित्रकूट पर आयोजित गौरांग लीला में दर्शकों ने श्रीकृष्ण की अद्भुत लीला का अनुभव किया। व्यास कृष्णमुरारी ने गोवर्धन डाकू प्रसंग का मंचन करते हुए बताया कि एक राजा के यहां डकैती डालने के लिए आया डाकू पंडित परशुराम की कथा में घुस आता है। वहीं, कृष्ण के शृंगार और बहुमूल्य आभूषणों का वर्णन कर वह उनकी लीला से मंत्रमुग्ध हो जाता है।
कथा में डाकू गोवर्धन, पंडित परशुराम से कृष्ण के माखन प्रेम और उनकी मुलाकात की जानकारी प्राप्त कर वृंदावन की ओर निकल पड़ता है। उधर, पंडित की पुत्री कर्मती बाई भी गोपियों की भांति कृष्ण से मिलने के लिए वृंदावन की ओर बढ़ती हैं। भूखी और प्यासी कर्मती को प्रेम बंधन में बांधकर श्रीकृष्ण स्वयं भोजन कराते हैं और हाथों से भोजन करवाते हैं।
जैसे ही डाकू गोवर्धन वृंदावन में कृष्ण की बंशी की धुन सुनता है और उन्हें देखता है, कृष्ण का स्पर्श पाकर उसका हृदय परिवर्तन हो जाता है और वह प्रायश्चित कर अपनी इच्छा पूरी कराता है।
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प्रातः कालीन में हुई कथा में व्यास जी ने जगन्नाथ व माधव नामक दो दानवी प्रवृत्ति के व्यक्तियों की कथा श्रवण कराई। संत हरिदास ने गली-गली, नगर-नगर संकीर्तन कर लोगों को प्रभु भक्ति में लीन कराया और यह बताया कि गौर ही कृष्ण है और कृष्ण ही गौर हैं। कथा श्रवण के लिए प्रयागराज से संत शांतनु महाराज पधारे। प्रभात सर्राफ ने उनका पटुका पहनाकर स्वागत किया। संचालन लछमन प्रसाद यादव ने किया। मूलचंद गर्ग, माधव शरण अग्रवाल, कल्याण दास बृजवासी, सुमित अग्रवाल और योगेश वार्ष्णेय ने प्रभु स्वरूपों की आरती की।
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कथा में डाकू गोवर्धन, पंडित परशुराम से कृष्ण के माखन प्रेम और उनकी मुलाकात की जानकारी प्राप्त कर वृंदावन की ओर निकल पड़ता है। उधर, पंडित की पुत्री कर्मती बाई भी गोपियों की भांति कृष्ण से मिलने के लिए वृंदावन की ओर बढ़ती हैं। भूखी और प्यासी कर्मती को प्रेम बंधन में बांधकर श्रीकृष्ण स्वयं भोजन कराते हैं और हाथों से भोजन करवाते हैं।
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जैसे ही डाकू गोवर्धन वृंदावन में कृष्ण की बंशी की धुन सुनता है और उन्हें देखता है, कृष्ण का स्पर्श पाकर उसका हृदय परिवर्तन हो जाता है और वह प्रायश्चित कर अपनी इच्छा पूरी कराता है।
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प्रातः कालीन में हुई कथा में व्यास जी ने जगन्नाथ व माधव नामक दो दानवी प्रवृत्ति के व्यक्तियों की कथा श्रवण कराई। संत हरिदास ने गली-गली, नगर-नगर संकीर्तन कर लोगों को प्रभु भक्ति में लीन कराया और यह बताया कि गौर ही कृष्ण है और कृष्ण ही गौर हैं। कथा श्रवण के लिए प्रयागराज से संत शांतनु महाराज पधारे। प्रभात सर्राफ ने उनका पटुका पहनाकर स्वागत किया। संचालन लछमन प्रसाद यादव ने किया। मूलचंद गर्ग, माधव शरण अग्रवाल, कल्याण दास बृजवासी, सुमित अग्रवाल और योगेश वार्ष्णेय ने प्रभु स्वरूपों की आरती की।