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Mathura News: कृष्णकालीन हरियाली में नजर आएंगे ब्रज के पौराणिक वन
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वन
- फोटो : mathura
मथुरा। मथुरा-वृंदावन की अप्रतिम सुंदरता का वर्णन धर्मग्रंथों में मिलता है। वह आभा कहीं खो गई है। कृष्णकालीन हरियाली के साक्षी वृक्षों की पांत नजर तो आती, लेकिन नीरस तनों, बिखरी-उलझीं सूखी टहनियों के रूप में। ये पेड़ शिलाओं के नीचे दबी जड़ों के संकेत देते हैं।
सालों साल तक हरियाली से अछूते रहने वाले 487 हेक्टेयर में फैले वन अब सुंदर हरियाली में नजर जाएंगे। यह वन विभाग के प्रयासों से संभव होगा। वन विभाग ने 487 हेक्टेयर में फैले वनों को संवारने की कवायद की है। इनमें कुछ पहाड़ियों के वन भी शामिल हैं। इन वनों में कृष्णकालीन पौधे कदंब, धौ (करधई), करील (टेंटी), पापरी, नागफनी, कैरी, ईमली, आंबल, पीपल गूलर समेत विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे। इसके बाद यहां द्वापरयुगी हरियाली देखने को मिलेगी।
डीएफओ रजनीकांत मित्तल ने बताया है कि ब्रज के पौराणिक वनों को संवारने की कवायद हैं। वन विभाग 487 हेक्टेयर में फैले जिले के विभिन्न वनों में कृष्णकालीन समेत अन्य प्रजातियों के पौधे रोपेगा। यह कार्य तीन चरणों में होगा। हालांकि पहले चरण में अभी तक 50 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधे रोपे जा चुके हैं। उन्होंने बताया है कि 487 हेक्टेयर में पौधे रोपे जाने के बाद तीन साल तक इनकी देखरेख की जाएगी।
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सालों साल तक हरियाली से अछूते रहने वाले 487 हेक्टेयर में फैले वन अब सुंदर हरियाली में नजर जाएंगे। यह वन विभाग के प्रयासों से संभव होगा। वन विभाग ने 487 हेक्टेयर में फैले वनों को संवारने की कवायद की है। इनमें कुछ पहाड़ियों के वन भी शामिल हैं। इन वनों में कृष्णकालीन पौधे कदंब, धौ (करधई), करील (टेंटी), पापरी, नागफनी, कैरी, ईमली, आंबल, पीपल गूलर समेत विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे। इसके बाद यहां द्वापरयुगी हरियाली देखने को मिलेगी।
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डीएफओ रजनीकांत मित्तल ने बताया है कि ब्रज के पौराणिक वनों को संवारने की कवायद हैं। वन विभाग 487 हेक्टेयर में फैले जिले के विभिन्न वनों में कृष्णकालीन समेत अन्य प्रजातियों के पौधे रोपेगा। यह कार्य तीन चरणों में होगा। हालांकि पहले चरण में अभी तक 50 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधे रोपे जा चुके हैं। उन्होंने बताया है कि 487 हेक्टेयर में पौधे रोपे जाने के बाद तीन साल तक इनकी देखरेख की जाएगी।
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