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मथुरा: वसंत पंचमी से ब्रज में शुरू हो जाएगा 40 दिवसीय होली का खुमार
Fri, 12 Feb 2021 10:46 AM IST
आगरा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 12 Feb 2021 10:46 AM IST
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बरसाना की लठमार होली (फाइल)
- फोटो : Amar Ujala
सब जग होरी या ब्रज होरा। मथुरा के मंदिरों में होने वाली होली का डंका पूरे विश्व में है। भगवान श्रीकृष्ण की नगरी में होली का महोत्सव वसंत पंचमी से मनाया जाता है। इस 40 दिवसीय महोत्सव में यहां के प्रमुख मंदिरों के उत्सव अद्भुत है। नंदगांव, बरसाना, श्रीकृष्ण जन्मस्थान की लठामार होली इस उत्सव का प्रमुख आकर्षण है।
बीते साल मथुरा में होली देखने के लिए रिकॉर्ड 10 लाख श्रद्धालु आए थे। इनमें विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या भी अच्छी खासी थी। लेकिन होली के बाद विश्वभर में फैले कोरोना संक्रमण ने सभी आयोजनों पर ब्रेक लगा दिया। मंदिर बंद हो गए और आयोजनों में लोगों की संख्या तय कर दी गई। लगभग एक वर्ष के बाद होली का त्योहार सामने है। मंदिरों में होली की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
ज्योतिषाचार्य आचार्य श्यामदत्त चतुर्वेदी ने बताया कि देश में होली दो या तीन दिन की होती है, लेकिन ब्रज में होली चालीस दिन मनाई जाती है। हर दिन नए उत्सव और आयोजनों के साथ। ब्रज की परंपरा के अनुसार ठाकुरजी अपने भक्तों के साथ चालीस दिन होली खेलते हैं। भक्त भी अपने आराध्य के प्रसाद रूपी गुलाल में सराबोर होकर धन्य मानते हैं।
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बीते साल मथुरा में होली देखने के लिए रिकॉर्ड 10 लाख श्रद्धालु आए थे। इनमें विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या भी अच्छी खासी थी। लेकिन होली के बाद विश्वभर में फैले कोरोना संक्रमण ने सभी आयोजनों पर ब्रेक लगा दिया। मंदिर बंद हो गए और आयोजनों में लोगों की संख्या तय कर दी गई। लगभग एक वर्ष के बाद होली का त्योहार सामने है। मंदिरों में होली की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
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ज्योतिषाचार्य आचार्य श्यामदत्त चतुर्वेदी ने बताया कि देश में होली दो या तीन दिन की होती है, लेकिन ब्रज में होली चालीस दिन मनाई जाती है। हर दिन नए उत्सव और आयोजनों के साथ। ब्रज की परंपरा के अनुसार ठाकुरजी अपने भक्तों के साथ चालीस दिन होली खेलते हैं। भक्त भी अपने आराध्य के प्रसाद रूपी गुलाल में सराबोर होकर धन्य मानते हैं।
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वसंत पंचमी से राजाधिराज के समक्ष धराए जाएंगे गुलाल
द्वारिकाधीश मंदिर में 16 फरवरी वसंत पंचमी से राजाधिराज होली खेलने के लिए तैयार हो जाएंगे। मंदिर के सेवायत सोने-चांदी के थालों में रंग-बिरंगे गुलाल ठाकुरजी के समक्ष धराएंगे। पूर्णिमा पर मंदिर में ढांढ़ा गढ़ जाएगा और पड़वा से मंदिर में होली के पद और रसिया गायन शुरू होंगे। वहीं, कोरोना की बंदिशें अभी लगी हुईं हैं। गाइडलाइन का पालन करते हुए मंदिर में 65 वर्ष से अधिक और दस वर्ष से कम उम्र के बच्चे के अलावा गर्भवती महिला को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।- राकेश तिवारी एडवोकेट, मीडिया प्रभारी द्वारिकाधीश मंदिर, मथुरा
वसंत पंचमी को बांकेबिहार मंदिर में उड़ेगा गुलाल
जन-जन के आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के आयोजन भी उन्हीं की तरह निराले हैं। इन्हीं आयोजनों में होली महोत्सव भी शामिल है। वसंत पंचमी को ठाकुर बांकेबिहारी भक्तों के साथ गुलाल की होली खेलकर ब्रज में चालीस दिवसीय होली का शुभारंभ करेंगे। वसंत के दिन तीनों आरतियों में भक्तों पर गुलाल बरसाया जाएगा। इस दिन ठाकुरजी वसंती रंग की पोशाक धारण करेंगे। वसंत पंचमी के दिन से सवा महीने तक ठाकुरजी के गालों पर गुलाल लगाया जाएगा और मंदिर में होली के पद सुनाए जाएंगे। - रघु गोस्वामी, सेवायत ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर, वृंदावन
द्वारिकाधीश मंदिर में 16 फरवरी वसंत पंचमी से राजाधिराज होली खेलने के लिए तैयार हो जाएंगे। मंदिर के सेवायत सोने-चांदी के थालों में रंग-बिरंगे गुलाल ठाकुरजी के समक्ष धराएंगे। पूर्णिमा पर मंदिर में ढांढ़ा गढ़ जाएगा और पड़वा से मंदिर में होली के पद और रसिया गायन शुरू होंगे। वहीं, कोरोना की बंदिशें अभी लगी हुईं हैं। गाइडलाइन का पालन करते हुए मंदिर में 65 वर्ष से अधिक और दस वर्ष से कम उम्र के बच्चे के अलावा गर्भवती महिला को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।- राकेश तिवारी एडवोकेट, मीडिया प्रभारी द्वारिकाधीश मंदिर, मथुरा
वसंत पंचमी को बांकेबिहार मंदिर में उड़ेगा गुलाल
जन-जन के आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के आयोजन भी उन्हीं की तरह निराले हैं। इन्हीं आयोजनों में होली महोत्सव भी शामिल है। वसंत पंचमी को ठाकुर बांकेबिहारी भक्तों के साथ गुलाल की होली खेलकर ब्रज में चालीस दिवसीय होली का शुभारंभ करेंगे। वसंत के दिन तीनों आरतियों में भक्तों पर गुलाल बरसाया जाएगा। इस दिन ठाकुरजी वसंती रंग की पोशाक धारण करेंगे। वसंत पंचमी के दिन से सवा महीने तक ठाकुरजी के गालों पर गुलाल लगाया जाएगा और मंदिर में होली के पद सुनाए जाएंगे। - रघु गोस्वामी, सेवायत ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर, वृंदावन