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ब्रज की होली: श्रीराधारमण मंदिर में सोने की पिचकारी से होगी रंगों की बौछार, आठ दिन तक छाया रहेगा उल्लास
Sat, 02 Mar 2024 01:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 02 Mar 2024 01:15 PM IST
सार
प्राचीन सप्तदेवालयों में से एक श्रीराधारमण मंदिर में होलिका अष्टमी से पूर्णिमा तक आठ दिन टेसू के फूलों से बने रंग से होली खेली जाएगी।
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राधारमण मंदिर में होली
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वृंदावन के प्राचीन सप्तदेवालयों में से एक श्रीराधारमण मंदिर में होलिका अष्टमी से पूर्णिमा तक आठ दिन टेसू के फूलों से बने रंग से होली खेली जाएगी। मंदिर के सेवायत ठाकुरजी को सोने की पिचकारी से होली खिलाएंगे। इसके बाद श्रद्धालुओं पर रंग बरसाया जाएगा। इन आठ दिनों में शाम के समय ठाकुरजी की विशेष उत्सव आरती की जाएगी।
श्रीराधारमण मंदिर में सैकड़ों वर्ष पुरानी होली उत्सव की परंपरा का निर्वाह आगामी 18 मार्च से किया जाएगा, जिसकी तैयारियां मंदिर प्रबंधन द्वारा शुरू कर दी गईं हैं। मंदिर में होने वाली 40 दिवसीय होली में होलिका अष्टक 18 मार्च से पूर्णिमा 25 मार्च तक टेसू के फूलों से बने रंग से होली खेली जाएगी। मंदिर के सेवायत आचार्य पद्मनाभ गोस्वामी ने बताया कि आठ दिन की रंग की होली में पहले सेवायत गोस्वामी सोने की पिचकारी से टेसू के फूलों का रंग, गुलाब, हिना, केसर का इत्र की पिचकारी ठाकुर राधारमण महाराज के वस्त्रों पर चलाएंगे। ठाकुरजी के होली खेलने के बाद सेवायत गोस्वामी शाम करीब छह बजे उत्सव आरती करेंगे। इसके बाद प्रसादी टेसू के फूलों का रंग, गुलाबजल और इत्र से भारी चांदी की पिचकारी से श्रद्धालुओं पर बरसाएंगे।
सेवायत पद्मनाभ गास्वामी ने बताया कि आठ दिन पहले टेसू के फूलों के रंग, इत्र के साथ-साथ गुलाल और फूलों से ठाकुर राधारमण जी होली खेलते हैं, उसके बाद सेवायत गोस्वामी प्रसादी रंग, गुलाल और इत्र श्रद्धालुओं पर बरसाते हैं। होली के इन आठ दिनों में शाम को लगभग छह बजे उत्सव आरती की जाती है।
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श्रीराधारमण मंदिर में सैकड़ों वर्ष पुरानी होली उत्सव की परंपरा का निर्वाह आगामी 18 मार्च से किया जाएगा, जिसकी तैयारियां मंदिर प्रबंधन द्वारा शुरू कर दी गईं हैं। मंदिर में होने वाली 40 दिवसीय होली में होलिका अष्टक 18 मार्च से पूर्णिमा 25 मार्च तक टेसू के फूलों से बने रंग से होली खेली जाएगी। मंदिर के सेवायत आचार्य पद्मनाभ गोस्वामी ने बताया कि आठ दिन की रंग की होली में पहले सेवायत गोस्वामी सोने की पिचकारी से टेसू के फूलों का रंग, गुलाब, हिना, केसर का इत्र की पिचकारी ठाकुर राधारमण महाराज के वस्त्रों पर चलाएंगे। ठाकुरजी के होली खेलने के बाद सेवायत गोस्वामी शाम करीब छह बजे उत्सव आरती करेंगे। इसके बाद प्रसादी टेसू के फूलों का रंग, गुलाबजल और इत्र से भारी चांदी की पिचकारी से श्रद्धालुओं पर बरसाएंगे।
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सेवायत पद्मनाभ गास्वामी ने बताया कि आठ दिन पहले टेसू के फूलों के रंग, इत्र के साथ-साथ गुलाल और फूलों से ठाकुर राधारमण जी होली खेलते हैं, उसके बाद सेवायत गोस्वामी प्रसादी रंग, गुलाल और इत्र श्रद्धालुओं पर बरसाते हैं। होली के इन आठ दिनों में शाम को लगभग छह बजे उत्सव आरती की जाती है।
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