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श्रीराम जन्म शोभायात्रा स्थगित, केवल मंदिर पर होंगे आयोजन
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मथुरा। श्रीराम जन्म महोत्सव समिति के तत्वावधान में राम नवमी को घीया मंडी स्थित प्राचीन श्रीराम मंदिर से निकलने वाली प्रभु श्रीराम जन्म की प्राचीन परंपरागत शोभायात्रा कोविड महामारी के चलते स्थगित कर दी गयी है।
केवल मंदिर पर ही सरकारी गाइड लाइन अनुसार जन्म महाभिषेक, शृंगार दर्शन, जन्म बधाई व फूल बंगले में प्रभु श्रीराम विराजमान होंगे। इस संदर्भ में एक आपातकालीन वर्चुअल बैठक समिति के प्रमुख पदाधिकारियों की हुयी ,जिसमें सर्वसम्मति से अध्यक्ष राजेंद्र भगत, महामंत्री हेमंत चतुर्वेदी, मंत्री मनुऋषि त्रिवेदी एवं प्रचार मंत्री पंडित अमित भारद्वाज ने यह निर्णय लिया।
79 साल पुरानी शोभायात्रा की परंपरा
मथुरा के घीया मंडी स्थित प्राचीन राम मंदिर से निकाली जाने वाली राम जन्म शोभायात्रा का इतिहास 79 वर्ष पुराना है। चैत्र नवरात्र में शोभायात्रा के सूत्रधार आयुर्वेदाचार्य श्रीनाथ शर्मा, जिन्हें वैद्य पुजारी बाबा के नाम से जाना जाता था ,उन्होंने एवं ज्योतिर्विद् नंद कुमार शास्त्री,मोतीलाल शोरा वाले, छगनलाल चौपाइया वाले व रामनिवास भगत के सहयोग से हुआ। इसी के साथ राम जन्मोत्सव की भी श्रृंखला शुरू हुई। उस समय कंधे पर डोली में रामजी की छवि विराजमान कर शोभायात्रा निकालना शुरू हुआ, समय अनुसार परिवर्तन और भव्यता बढ़ती रही। समय-समय पर अनेक लोगों ने इसकी कमान को संभाला। वर्तमान में अनेक वर्षों से श्रीराम जन्म महोत्सव समिति इस शोभायात्रा का संचालन करती है। 2018 में इसका हीरक जयंती वर्ष/ 75 वर्ष पूरे होने पर सालगिरह मनाई गयी। उस वर्ष अभूतपूर्व शोभायात्रा निकाली गई।
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केवल मंदिर पर ही सरकारी गाइड लाइन अनुसार जन्म महाभिषेक, शृंगार दर्शन, जन्म बधाई व फूल बंगले में प्रभु श्रीराम विराजमान होंगे। इस संदर्भ में एक आपातकालीन वर्चुअल बैठक समिति के प्रमुख पदाधिकारियों की हुयी ,जिसमें सर्वसम्मति से अध्यक्ष राजेंद्र भगत, महामंत्री हेमंत चतुर्वेदी, मंत्री मनुऋषि त्रिवेदी एवं प्रचार मंत्री पंडित अमित भारद्वाज ने यह निर्णय लिया।
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79 साल पुरानी शोभायात्रा की परंपरा
मथुरा के घीया मंडी स्थित प्राचीन राम मंदिर से निकाली जाने वाली राम जन्म शोभायात्रा का इतिहास 79 वर्ष पुराना है। चैत्र नवरात्र में शोभायात्रा के सूत्रधार आयुर्वेदाचार्य श्रीनाथ शर्मा, जिन्हें वैद्य पुजारी बाबा के नाम से जाना जाता था ,उन्होंने एवं ज्योतिर्विद् नंद कुमार शास्त्री,मोतीलाल शोरा वाले, छगनलाल चौपाइया वाले व रामनिवास भगत के सहयोग से हुआ। इसी के साथ राम जन्मोत्सव की भी श्रृंखला शुरू हुई। उस समय कंधे पर डोली में रामजी की छवि विराजमान कर शोभायात्रा निकालना शुरू हुआ, समय अनुसार परिवर्तन और भव्यता बढ़ती रही। समय-समय पर अनेक लोगों ने इसकी कमान को संभाला। वर्तमान में अनेक वर्षों से श्रीराम जन्म महोत्सव समिति इस शोभायात्रा का संचालन करती है। 2018 में इसका हीरक जयंती वर्ष/ 75 वर्ष पूरे होने पर सालगिरह मनाई गयी। उस वर्ष अभूतपूर्व शोभायात्रा निकाली गई।
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