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UP: यमुना का राैद्र रूप...गांवों से कटा संपर्क, काॅलोनियों में भरा पानी; प्रभावित क्षेत्र खाली करने की अपील

Thu, 21 Aug 2025 06:17 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: अरुन पाराशर Updated Thu, 21 Aug 2025 06:17 PM IST
सार

मथुरा में यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे नदी किनारे के गांव में हालात बिगड़ने लगे हैं। प्रशासन राहत पहुंचाने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है। वहीं जनप्रतिनिधि भी प्रभावित गांवों में पहुंच रहे हैं।
 

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Situation worsening due to flood in Mathura
मथुरा में उफान पर यमुना। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

मथुरा में यमुना में हर दिन बढ़ रहा जलस्तर बृहस्पतिवार को खतरे के निशान को पार कर गया। यमुना अब 166.16 मीटर पर बह रही, जबकि खतरे का निशान 166 मीटर पर है। इतना ही नहीं अब हालात और भी बिगड़ने की आशंका है। हथिनी कुंड और ओखला बैराज से बृहस्पतिवार को छोड़ा गया पानी मथुरा पहुंचने पर जलस्तर और ऊपर पहुंच जाएगा। इससे शहर से लेकर देहात तक बाढ़ का संकट गहरा सकता है। प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने में जुटा हुआ है।
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जीवनदायिनी यमुना इन दिनों ब्रजवासियों पर आफत बनकर टूट रही है। यमुना में जलस्तर बढ़ने से मांट, नौहझील, बलदेव और महावन के साथ-साथ मथुरा और वृंदावन के खादर क्षेत्र में बाढ़ के हालात बन गए हैं। गांवों में बाढ़ से जहां उनका मुख्यालय से संपर्क टूट गया है तो वहीं वृंदावन और मथुरा खादर क्षेत्र में भी गलियों में नाव चल रही है। 
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ग्रामीण अंचल में सड़कें जैसे बाढ़ में गायब हो गई हैं। हालात इतने खराब हैं कि प्रशासन भी गांवों तक स्टीमर के सहारे पहुंचने के लिए मजबूर है। बुधवार तक यमुना खतरे के निशान को छूने के लिए बेकरार नजर आ रही थी। वहीं दूसरी तरफ अधिकारियों और लोगों को धीरे-धीरे जलस्तर कम होने की उम्मीद थी। बृहस्पतिवार का दिन ब्रजवासियों के लिए राहत के बजाए आफत की खबर लेकर आए। 
 

पानी बढ़ने से यमुना खतरे का निशान पार कर गई। बीते 24 घंटे में यमुना का जलस्तर 21 सेंटीमीटर बढ़कर 166.16 मीटर पर पहुंच गया। इसके कारण शेरगढ़ क्षेत्र के गांव बाबूगढ़, बसाऊ, ओवा, स्यारहा, छिनपारई, दौलतपुर, बेहटा आदि गांवों में बाढ़ और विकराल रूप लेने लगी है। इन गांवों में पानी बढ़ रहा है। वहीं बलदेव के गांव अकोस में तो हालात इतने खराब हैं कि उनका संपर्क मथुरा से टूट गया है। केवल ट्रैक्टर के माध्यम से ही लोग बाढ़ के बीच से निकलकर कस्बों तक पहुंच रहे हैं।

 
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केवल शहर ही नहीं मथुरा और वृंदावन स्थित खादर कॉलोनियों का भी हाल बेहाल है। गलियों में पहुंचा पानी अब नीचे बने घरों में भरने लगा है। मथुरा के विश्राम घाट और बंगाली घाट पूरे डूब गए हैं। इससे यमुना आरती भी पानी में ही खड़े होकर करनी पड़ रही है। वृंदावन में परिक्रमा मार्ग पर पानी भरने से श्रद्धालुओं को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।

 

धीरे-धीरे अब प्रशासन की चिंता भी हालातों को देखते हुए बढ़ने लगी है। दअरसल, अभी यमुना में जलस्तर और बढ़ने की आशंका है। बृहस्पतिवार को हथिनी कुंड बांध से 25392 क्यूसेक और ओखला बैराज से 27480 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी जब मथुरा पहुंचेगा तो अन्य क्षेत्रों को भी बाढ़ की चपेट में ले सकता है।
 

जनप्रतिनिधियों ने बाढ़ का लिया जायजा, जाना हाल
बृहस्पतिवार को कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। उन्होंने गांव सियारा व चंदौरी के साथ ही गांव बाहटा का निरीक्षण किया। साथ ही लोगों को राहत सामग्री भी बांटी। कैबिनेट मंत्री ने लोगों को हर संभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया। वहीं बलदेव विधायक पूरनप्रकाश ने गांव अकोस में बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। बाढ़ राहत कैंप पर पहुंचकर लोगों को राहत सामग्री वितरित की।

 

नौहझील-शेरगढ़ मार्ग रहा अवरुद्ध
नाैहझील क्षेत्र में यमुना नदी में आई बाढ़ से तटीय गांव अड्डा मीणा, छिनपारई, फिरोजपुर, अड्डा मल्हान, अड्डा जाटव, मांगरखोर, बाघर्रा, बरौठ, मंडारी, रायपुर, नानकपुर, भैरई, मुसमुना, मुकदुमपुर, खुशलागढ़ी, अनरदागढ़ी, भगवान गढ़ी, तिलकागढ़ी, जाफरपुर, इनायतगढ़, दौलतपुर, बसाऊ, देदना,मरहला मुक्खा, भूरगढ़ी, पालखेड़ा, पिथौरा व फरीदपुर के ग्रामीणों की दुर्दशा बढ़ती जा रही है।

 

हालांकि गुरुवार को यमुना के जलस्तर में लगातार गिरावट हुई, लेकिन खेतों में खड़ी सैकड़ों बीघा धान, बाजरा,ज्वार, मूंगफली सहित अन्य फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं और पशु हरे चारे को तरस रहे हैं। किसानों कल्ली, महेंद्र, गोपी समेत अन्य ने बताया कि जलस्तर बढ़ने से बाजरा, धान, ज्वार, मूंगफली सहित अन्य सैकड़ों बीघा फसलों में नुकसान हुआ है। किसानों ने जिलाधिकारी से मदद की गुहार लगाते हुए कहा कि राजस्व कर्मियों को गांव-गांव भेजकर सही सर्वे कराकर मुआवजा दिलाया जाए। एसडीएम रितु सिरोही ने बताया कि यमुना के जलस्तर में गिरावट हुई है। गांव-गांव फसलों का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाया जाएगा। संवाद

 

कस्बा के बाजारों में पसरा सन्नाटा
नौहझील-शेरगढ़ मार्ग तीसरे दिन भी अवरुद्ध रहा। लगातार यमुना के जलस्तर में गिरावट के चलते शुक्रवार को इस मार्ग पर यातायात सुचारू कराया जा सकता है। नौहझील -शेरगढ़ मार्ग के बंद होने व क्षेत्र के गांवों में बाढ़ के चलते नौहझील कस्बा के बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। बाजारों से भीड़भाड़ पूरी तरह गायब है।


कब कितना रहा यमुना का जलस्तर

तारीख -जलस्तर
15 अगस्त-165.38
16 अगस्त-165.56
17 अगस्त-165.65
18 अगस्त-165.79
19 अगस्त-165.87
20 अगस्त-165.95
21 अगस्त-166.16

(जलस्तर मीटर में है)



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