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पड़ोसियों को अच्छे न लगे दरवाजों पर दहशत के ताले
हिमांशु त्रिपाठी
Updated Thu, 07 May 2015 12:07 AM IST
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सौंख की माटी में शांति की सौंधी सुगंध कोसों दूर तक जाती थी लेकिन आज यहां के भाईचारे में नफरत की आग लग गई। पुलिस-प्रशासन ने एक बड़ी घटना से किनारा किया और उपद्रवी यहां तनाव की चादर तान गए। एक-दूजे के घर शादी में मिल-जुलकर काम करने वाले हैरान हैं कि हमारे कस्बे में बाहर के लोगों ने लवजेहाद के नाम से चिनगारी भड़का दी। ताले लगे घरों पर सुरक्षा सी नजर पड़ोसी रखे हैं। वह बड़े विश्वास से कहते हैं कि हमारा सौंख ऐसा ना था और हम इस नफरत की आग को बुझाएंगे।
यह सौंख है, वहीं सौंख जहां की कुषाणकालीन मूर्तियां संग्रहालय में सजी हैं। स्वर्णिम इतिहास समेटे सौंख की लगभग सभी दुकानें बंद हैं और सभी घर या तो अंदर से बंद हैं या फिर बाहर उनके दरवाजे पर ताले लटके हैं। एक युवक पर दूसरे धर्म की लड़की को बहलाकर ले जाने के आरोपों के बाद यहां शनिवार से ही अनहोनी की आहट थी। कोसी के निकासा में दोनों पकड़े गए तो पुलिस पर हमला हो गया था और फिर दोनों आज तक नहीं देखे गए। आसपास के गांवों के लोगों ने खुला एलान कर रखा था कि लड़की की बरामदगी न हुई तो करारा जवाब देंगे लेकिन पुलिस-प्रशासन सोया रहा।
एलान के मुताबिक ही आसपास के गांवों से आए बाइक सवार युवक पंचायत के बाद सीधे पुलिस से भिड़ गए। पुलिस बैकफुट पर आई तो वह जगह-जगह आगजनी कर बैठे। मुख्य बाजार में प्याऊ पर सन्नाटा था लेकिन संगीनों के साये में महाराज सिंह 85 की उम्र में सहमे लोगों को चुनौती दे रहे थे। वह अपनी चाय की दुकान पर अपने काम में लगे थे और यही एकमात्र जगह नजर आई जहां चार लोग बैठकर सौंख के भाईचारे की मिसाल दे रहे थे। यहां से आगे जाकर उस युवक का घर है जिस पर लड़की बहलाकर ले जाने के आरोप हैं। उसके आसपास दो सौ लोग उसी के समुदाय के रहते हैं। एक-एक घर में 10 से 30 लोग तक रहते हैं लेकिन सुबह धार्मिक स्थल में आगजनी के बाद सब यहां अपना घर छोड़कर चले गए।
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आरोपी युवक के ठीक बाद एक मकान में दो-तीन परिवार रहते हैं। कतार से यहां समुदाय विशेष के लोगों के घर हैं और सभी के दरवाजे पर दहशत के ताले लगे हैं। पड़ोसी कहते हैं कि हम अपना नाम नहीं बताएंगे जमाना खराब है। लेकिन इतना जान लीजिए कि हम हिंदू-मुसलमान बड़े प्रेम से रहते हैं। एक-दूसरे के घर शादी में हम सब मिलकर काम करते हैं लेकिन आज जो हुआ यह नहीं होना चाहिए। सौंख कस्बे के लोग तो हैरान हैं कि आखिर ये क्या हो गया। आरोपी के घर के नजदीक पशु व्यापारी के घर में ताले थे और वह बुधवार उपद्रव के बाद ही परिवार सहित निकल गए। आसपास के लोग बताते हैं कि इन्हें कुछ अंदेशा था इसलिए पशुओं को पहले ही सुरक्षित स्थान पर भेज दिया था। यह दहशत ही है कि कोई भी अपना नाम बताने को तैयार नहीं है। शरीफों को डर है कि घटनाक्रम की पुनरावृत्ति न हो जाए।
दुकानदार तो मेले में लुट गए यारों
तमाशबीन दुकानें लगा के बैठ गए ।
लहूलुहान नजारों का जिक्र आया तो
शरीफ लोग उठे दूर जा के बैठ गए ।।
- दुष्यंत कुमार
पौराणिक धरोहरों से है सौंख की पहचान
मथुरा। सौंख की पहचान मथुरा की विरासत की खान के रूप में रही है। यहां कुषाणकालीन बेमिसाल मूर्तियों के साथ ही टेरीकोटा की मूर्ति, मिट्टी के बर्तन मिले हैं जो नई पीढ़ी को इतिहास से रूबरू कराते हैं। राजकीय संग्रहालय से सहायक निदेशक डा. एसपी सिंह ने बताया कि सौंख में मूर्तियों का भंडार है। यहां से कुषाण काल की साल वंदिका (युवती), नाग राजा का दरबार, तांबे की कुबेर और उनकी पत्नी हारिका, कार्तिकेय की बेमिसाल मूर्तियां निकली हैं। इसके अलावा मृद भांड (मिट्टी के बर्तन), टेरीकोटा की मूर्ति भी निकली हैं।
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यह सौंख है, वहीं सौंख जहां की कुषाणकालीन मूर्तियां संग्रहालय में सजी हैं। स्वर्णिम इतिहास समेटे सौंख की लगभग सभी दुकानें बंद हैं और सभी घर या तो अंदर से बंद हैं या फिर बाहर उनके दरवाजे पर ताले लटके हैं। एक युवक पर दूसरे धर्म की लड़की को बहलाकर ले जाने के आरोपों के बाद यहां शनिवार से ही अनहोनी की आहट थी। कोसी के निकासा में दोनों पकड़े गए तो पुलिस पर हमला हो गया था और फिर दोनों आज तक नहीं देखे गए। आसपास के गांवों के लोगों ने खुला एलान कर रखा था कि लड़की की बरामदगी न हुई तो करारा जवाब देंगे लेकिन पुलिस-प्रशासन सोया रहा।
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एलान के मुताबिक ही आसपास के गांवों से आए बाइक सवार युवक पंचायत के बाद सीधे पुलिस से भिड़ गए। पुलिस बैकफुट पर आई तो वह जगह-जगह आगजनी कर बैठे। मुख्य बाजार में प्याऊ पर सन्नाटा था लेकिन संगीनों के साये में महाराज सिंह 85 की उम्र में सहमे लोगों को चुनौती दे रहे थे। वह अपनी चाय की दुकान पर अपने काम में लगे थे और यही एकमात्र जगह नजर आई जहां चार लोग बैठकर सौंख के भाईचारे की मिसाल दे रहे थे। यहां से आगे जाकर उस युवक का घर है जिस पर लड़की बहलाकर ले जाने के आरोप हैं। उसके आसपास दो सौ लोग उसी के समुदाय के रहते हैं। एक-एक घर में 10 से 30 लोग तक रहते हैं लेकिन सुबह धार्मिक स्थल में आगजनी के बाद सब यहां अपना घर छोड़कर चले गए।
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आरोपी युवक के ठीक बाद एक मकान में दो-तीन परिवार रहते हैं। कतार से यहां समुदाय विशेष के लोगों के घर हैं और सभी के दरवाजे पर दहशत के ताले लगे हैं। पड़ोसी कहते हैं कि हम अपना नाम नहीं बताएंगे जमाना खराब है। लेकिन इतना जान लीजिए कि हम हिंदू-मुसलमान बड़े प्रेम से रहते हैं। एक-दूसरे के घर शादी में हम सब मिलकर काम करते हैं लेकिन आज जो हुआ यह नहीं होना चाहिए। सौंख कस्बे के लोग तो हैरान हैं कि आखिर ये क्या हो गया। आरोपी के घर के नजदीक पशु व्यापारी के घर में ताले थे और वह बुधवार उपद्रव के बाद ही परिवार सहित निकल गए। आसपास के लोग बताते हैं कि इन्हें कुछ अंदेशा था इसलिए पशुओं को पहले ही सुरक्षित स्थान पर भेज दिया था। यह दहशत ही है कि कोई भी अपना नाम बताने को तैयार नहीं है। शरीफों को डर है कि घटनाक्रम की पुनरावृत्ति न हो जाए।
दुकानदार तो मेले में लुट गए यारों
तमाशबीन दुकानें लगा के बैठ गए ।
लहूलुहान नजारों का जिक्र आया तो
शरीफ लोग उठे दूर जा के बैठ गए ।।
- दुष्यंत कुमार
पौराणिक धरोहरों से है सौंख की पहचान
मथुरा। सौंख की पहचान मथुरा की विरासत की खान के रूप में रही है। यहां कुषाणकालीन बेमिसाल मूर्तियों के साथ ही टेरीकोटा की मूर्ति, मिट्टी के बर्तन मिले हैं जो नई पीढ़ी को इतिहास से रूबरू कराते हैं। राजकीय संग्रहालय से सहायक निदेशक डा. एसपी सिंह ने बताया कि सौंख में मूर्तियों का भंडार है। यहां से कुषाण काल की साल वंदिका (युवती), नाग राजा का दरबार, तांबे की कुबेर और उनकी पत्नी हारिका, कार्तिकेय की बेमिसाल मूर्तियां निकली हैं। इसके अलावा मृद भांड (मिट्टी के बर्तन), टेरीकोटा की मूर्ति भी निकली हैं।