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Mathura News: सुप्रीम कोर्ट के आदेश का संतों ने किया समर्थन
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वृंदावन। श्री बांकेबिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले चढ़ावे को निर्धारित दानपात्र में ही डालने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का संत समाज ने समर्थन किया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि निर्माण न्यास ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगद्गुरु आचार्य देवमुरारी बापू ने कहा कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान की पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए और प्रत्येक राशि का विधिवत लेखा-जोखा रखा जाना चाहिए।
आचार्य ने कहा कि बांकेबिहारी मंदिर की तरह श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा में भी श्रद्धालुओं से मिलने वाले दान को निर्धारित दानपात्र में ही डाले जाने की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2020 में उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मभूमि सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा समेत अन्य पदाधिकारियों से अधिवक्ता के माध्यम से संस्थान के दान और संपत्तियों का लेखा-जोखा मांगा था। उनके अनुसार, संस्थान की ओर से यह कहते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया गया कि यह एक निजी ट्रस्ट है। उन्होंने कहा कि मंदिरों और धार्मिक संस्थानों को मिलने वाले करोड़ों रुपये के दान के संबंध में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े सभी ट्रस्टों और संस्थाओं की संपत्तियों एवं आय के स्रोतों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। आचार्य ने कहा कि जिन संस्थाओं के पदाधिकारी पहले सामान्य जीवन जीते थे, उनके पास आज महंगी गाड़ियां और बड़े शहरों में संपत्तियां होने के दावे किए जा रहे हैं। इन संपत्तियों और आय के स्रोतों की जांच होनी चाहिए।
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आचार्य ने कहा कि बांकेबिहारी मंदिर की तरह श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा में भी श्रद्धालुओं से मिलने वाले दान को निर्धारित दानपात्र में ही डाले जाने की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2020 में उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मभूमि सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा समेत अन्य पदाधिकारियों से अधिवक्ता के माध्यम से संस्थान के दान और संपत्तियों का लेखा-जोखा मांगा था। उनके अनुसार, संस्थान की ओर से यह कहते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया गया कि यह एक निजी ट्रस्ट है। उन्होंने कहा कि मंदिरों और धार्मिक संस्थानों को मिलने वाले करोड़ों रुपये के दान के संबंध में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े सभी ट्रस्टों और संस्थाओं की संपत्तियों एवं आय के स्रोतों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। आचार्य ने कहा कि जिन संस्थाओं के पदाधिकारी पहले सामान्य जीवन जीते थे, उनके पास आज महंगी गाड़ियां और बड़े शहरों में संपत्तियां होने के दावे किए जा रहे हैं। इन संपत्तियों और आय के स्रोतों की जांच होनी चाहिए।
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