{"_id":"64c2b9b2c152d85a0c01cb94","slug":"rte-admission-process-in-final-stage-amid-allegations-mathura-news-c-29-1-mtr1016-111305-2023-07-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mathura News: आरोपों के बीच अंतिम चरण में आरटीई प्रवेश प्रक्रिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mathura News: आरोपों के बीच अंतिम चरण में आरटीई प्रवेश प्रक्रिया
Fri, 28 Jul 2023 12:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Updated Fri, 28 Jul 2023 12:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मथुरा। जिले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत प्रवेश प्रक्रिया अंतिम दौर में है। प्रथम और दूसरे चरण की प्रक्रिया पूर् हो चुकी है। जबकि तीसरे चरण की प्रक्रिया अंतिम दौर में है, लेकिन पात्र बच्चों का निजी स्कूलों द्वारा प्रवेश नहीं लिए जाने की भी शिकायतें बीएसए को मिल रही हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निर्धन बच्चों को सीबीएसई, यूपी बोर्ड के निजी विद्यालयों में कक्षा एक में उपलब्ध सीटों के अनुपात में 25 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश दिया जाता है।
यह प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जाती है। तीनों चरणों में अलग-अलग बच्चों द्वारा प्रवेश प्रक्रिया के लिए आवेदन किया जाता है और फिर लॉटरी के माध्यम से इनका चयन किया जाता है। जिले में प्रथम चरण के लिए 355 बच्चों, द्वितीय चरण में 600 और तृतीय चरण में 299 बच्चों का चयन किया गया। प्रथम चरण में मात्र 161 और द्वितीय चरण में 296 बच्चों का ही प्रवेश हो सका। जबकि तृतीय चरण की प्रवेश प्रक्रिया चल रही है।
अधिकारियों तक दौड़े अभिभावक
प्रथम और द्वितीय चरण में प्रवेश कम होने का कारण यह रहा कि जिले के अच्छे स्कूलों में गिने जाने वाले कई संस्थानों ऐसे बच्चों को प्रवेश देने से ही इंकार कर दिया। शिकायत अधिकारियों से की गई तो दबाव पड़ने पर कई विद्यालयों ने प्रवेश ले लिए, लेकिन कई स्कूल संचालकों ने फिर भी प्रवेश नहीं दिया। इसके चलते अनेक बच्चे प्रवेश से वंचित रह गए।
विज्ञापन
स्कूल संचालकों का लाखों का बकाया
निजी स्कूलों द्वारा आरटीई के तहत बच्चों को प्रवेश न दिए जाने के पीछे बड़ी वजह यह भी है कि जिले के काफी विद्यालयों का विभाग पर करीब 61 लाख रुपये बकाया है। फीस की राशि समय पर न मिलने के कारण बच्चों को प्रवेश देने से इंकार कर देते हैं।
रुपये लेकर चयन करने के भी लगते रहे आरोप
कई अभिभावकों द्वारा बच्चों का चयन करने के लिए रुपये मांगने के आरोप बीएसए कार्यालय तक पहुंचे हैं। हालांकि जांच के बाद भी नतीजा सिफर ही रहा। गाहे बगाहे यह आरोप अब भी लगते रहते हैं, लेकिन अधिकारी यह कहकर बात खत्म कर देते हैं कि जिन बच्चों का लॉटरी में चयन नहीं होता है, उनके अभिभावक इस तरह के आरोप लगाते रहते हैं।
आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होती है। इसमें समिति बनाकर लॉटरी के माध्यम से विद्यार्थियों का चयन किया जाता है। रुपये लेकर प्रवेश दिलाने के आरोप निराधार है। कोई व्यक्ति साक्ष्यों के साथ शिकायत करे तो निश्चित तौर पर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
- राजलक्ष्मी पांडेय, प्रभारी बीएसए
विज्ञापन
यह प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जाती है। तीनों चरणों में अलग-अलग बच्चों द्वारा प्रवेश प्रक्रिया के लिए आवेदन किया जाता है और फिर लॉटरी के माध्यम से इनका चयन किया जाता है। जिले में प्रथम चरण के लिए 355 बच्चों, द्वितीय चरण में 600 और तृतीय चरण में 299 बच्चों का चयन किया गया। प्रथम चरण में मात्र 161 और द्वितीय चरण में 296 बच्चों का ही प्रवेश हो सका। जबकि तृतीय चरण की प्रवेश प्रक्रिया चल रही है।
विज्ञापन
अधिकारियों तक दौड़े अभिभावक
प्रथम और द्वितीय चरण में प्रवेश कम होने का कारण यह रहा कि जिले के अच्छे स्कूलों में गिने जाने वाले कई संस्थानों ऐसे बच्चों को प्रवेश देने से ही इंकार कर दिया। शिकायत अधिकारियों से की गई तो दबाव पड़ने पर कई विद्यालयों ने प्रवेश ले लिए, लेकिन कई स्कूल संचालकों ने फिर भी प्रवेश नहीं दिया। इसके चलते अनेक बच्चे प्रवेश से वंचित रह गए।
विज्ञापन
स्कूल संचालकों का लाखों का बकाया
निजी स्कूलों द्वारा आरटीई के तहत बच्चों को प्रवेश न दिए जाने के पीछे बड़ी वजह यह भी है कि जिले के काफी विद्यालयों का विभाग पर करीब 61 लाख रुपये बकाया है। फीस की राशि समय पर न मिलने के कारण बच्चों को प्रवेश देने से इंकार कर देते हैं।
रुपये लेकर चयन करने के भी लगते रहे आरोप
कई अभिभावकों द्वारा बच्चों का चयन करने के लिए रुपये मांगने के आरोप बीएसए कार्यालय तक पहुंचे हैं। हालांकि जांच के बाद भी नतीजा सिफर ही रहा। गाहे बगाहे यह आरोप अब भी लगते रहते हैं, लेकिन अधिकारी यह कहकर बात खत्म कर देते हैं कि जिन बच्चों का लॉटरी में चयन नहीं होता है, उनके अभिभावक इस तरह के आरोप लगाते रहते हैं।
आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होती है। इसमें समिति बनाकर लॉटरी के माध्यम से विद्यार्थियों का चयन किया जाता है। रुपये लेकर प्रवेश दिलाने के आरोप निराधार है। कोई व्यक्ति साक्ष्यों के साथ शिकायत करे तो निश्चित तौर पर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
- राजलक्ष्मी पांडेय, प्रभारी बीएसए