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नारी निकेतन में मां-बाप का इंतजार कर रही रोशनी
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 26 Mar 2015 12:13 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर मथुरा नारी निकेतन से 20 लड़कियों को उनके मां-बाप के सुपुर्द किया जा चुका है। अब बाकी 20 और लड़कियों को रिहा करने की न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसमें रोशनी नाम की मूकबधिर लड़की की रिहाई प्रशासन के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। वह अपने मां-बाप का नाम और पता भी बताने में असमर्थ है।
मार्च के दूसरे सप्ताह में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नारी निकेतन मथुरा में कैद 18 वर्ष आयु सीमा पूरी करने वाली 40 लड़कियों को रिहा करने के आदेश दिए थे। यह लड़कियां आगरा और अलीगढ़ मंडल के जिलों की हैं।
प्रशासन के समझ मुसीबत रोशनी नामक लड़की की रिहाई को लेकर है। यह लड़की न तो बोल सकती है, न सुनती है। शिक्षित भी नहीं है। 2012 में यह लड़की लावारिस मिलने पर छाता एसडीएम के माध्यम से नारी निकेतन भेजी गई थी। रिकार्ड में इसका नाम रोशनी दर्ज है।
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अब तक इसके लिए किसी व्यक्ति ने संपर्क भी नहीं किया है। ऐसी स्थिति में इसे कैसे मुक्त किया जाए, यह गंभीर समस्या है। इसी समस्या को देखते हुए बुधवार को विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सिविल जज ओमवीर सिंह ने सिटी मजिस्ट्रेट हेम सिंह के साथ नारी निकेतन का दौरा किया। यह लड़की इशारों की भाषा भी नहीं समझ पा रही है। इसके लिए काउंसलर की सहायता लेने का निर्णय किया है।
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मार्च के दूसरे सप्ताह में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नारी निकेतन मथुरा में कैद 18 वर्ष आयु सीमा पूरी करने वाली 40 लड़कियों को रिहा करने के आदेश दिए थे। यह लड़कियां आगरा और अलीगढ़ मंडल के जिलों की हैं।
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प्रशासन के समझ मुसीबत रोशनी नामक लड़की की रिहाई को लेकर है। यह लड़की न तो बोल सकती है, न सुनती है। शिक्षित भी नहीं है। 2012 में यह लड़की लावारिस मिलने पर छाता एसडीएम के माध्यम से नारी निकेतन भेजी गई थी। रिकार्ड में इसका नाम रोशनी दर्ज है।
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अब तक इसके लिए किसी व्यक्ति ने संपर्क भी नहीं किया है। ऐसी स्थिति में इसे कैसे मुक्त किया जाए, यह गंभीर समस्या है। इसी समस्या को देखते हुए बुधवार को विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सिविल जज ओमवीर सिंह ने सिटी मजिस्ट्रेट हेम सिंह के साथ नारी निकेतन का दौरा किया। यह लड़की इशारों की भाषा भी नहीं समझ पा रही है। इसके लिए काउंसलर की सहायता लेने का निर्णय किया है।