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कोरोना ने सोने-चांदी की राखियों के बाजार को किया बेजार
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ज्वेलर्स की दुकान पर चांदी की राखी पसंद करती महिला।
- फोटो : MATHURA
मथुरा। भाई-बहन के प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार निकट है और मथुरा का बाजार इस त्योहार के लिए तैयार है। बाजार राखियों के नए कलेक्शन से सज गए हैं। लेकिन इस साल कोरोना का असर बाजार में सोने-चांदी की राखियों के कारोबार पर भी दिख रहा है। जो बाजार पिछले वर्ष तक करोड़ों तक पहुंच जाता था, वो आज लाखों तक सिमट कर रह गया है। हर साल की तरह ज्वैलर्स की दुकानों पर सुंदर डिजाइन और नगों से सजी सोने और चांदी की राखियां बिक्री के लिए सजी हैं, लेकिन ग्राहक नहीं हैं।
सराफा व्यापारी अजयकांत गर्ग का कहना है कि पिछले साल सोने-चांदी की राखियों का व्यापारी लगभग 10 करोड़ तक पहुंच गया था, जो इस साल लाखों तक सिमट गया है। अगर बाजार में उछाल भी आया तो यह बढ़कर 1 करोड़ तक ही पहुंच पाएगा। इसका मुख्य कारण कोरोना महामारी है।
व्यापारी अक्षय गर्ग का कहना है कि यहां बनी राखियों की डिमांड मथुरा से लेकर देश के बड़े शहरों और विदेशों में भी है। यहां की बनी राखियां गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में अधिक जातीं थीं, लेकिन इस बार ऑर्डर बहुत कम मिले हैं।
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सराफा व्यापारी अंकुर अग्रवाल का कहना है कि सोना 50 हजार रुपये प्रति तौला के पार और चांदी 60 हजार रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई है। सोनेेे-चांदी के भाव में आई बढ़ोत्तरी के साथ लोगों के पास अब पैसा नहीं रहा है। लॉकडाउन में लोगों के व्यापार पर भी असर डाला है। इसका असर सराफा कारोबार भी पड़ा है। मयंक अग्रवाल बोले, कोरोना महामारी के साथ-साथ सोने-चांदी के आसमान छूते भाव का भी इस साल राखी कारोबार पर असर पड़ा है।
हजारों लोग जुड़े हैं कारोबार से
मथुरा के चांदी कारोबार से हजारों लोगों की जीविका बंधी है। यहां हर तबके के लोग कहीं न कहीं किसी न किसी चांदी के कारोबार से जुड़ा है। सीजन के हिसाब से कारीगर अपने कारोबार में लगे रहते हैं। ये सीजन सोने-चांदी की राखियों के निर्माण का होता है, लेकिन इस साल कोरोना महामारी और लॉकडाउन ने सैकड़ों कारीगरों के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा कर दिया है।
ठाकुरजी को अर्पित की जाती हैं राखियां
कुछ बहनें ठाकुरजी को अपना भाई मानकर उन्हें राखियां बांधती हैं। मंदिरों में हर साल सोने-चांदी के साथ धागे से बनीं राखियां ठाकुरजी के चरणों में अर्पित होती हैं।
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सराफा व्यापारी अजयकांत गर्ग का कहना है कि पिछले साल सोने-चांदी की राखियों का व्यापारी लगभग 10 करोड़ तक पहुंच गया था, जो इस साल लाखों तक सिमट गया है। अगर बाजार में उछाल भी आया तो यह बढ़कर 1 करोड़ तक ही पहुंच पाएगा। इसका मुख्य कारण कोरोना महामारी है।
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व्यापारी अक्षय गर्ग का कहना है कि यहां बनी राखियों की डिमांड मथुरा से लेकर देश के बड़े शहरों और विदेशों में भी है। यहां की बनी राखियां गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में अधिक जातीं थीं, लेकिन इस बार ऑर्डर बहुत कम मिले हैं।
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सराफा व्यापारी अंकुर अग्रवाल का कहना है कि सोना 50 हजार रुपये प्रति तौला के पार और चांदी 60 हजार रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई है। सोनेेे-चांदी के भाव में आई बढ़ोत्तरी के साथ लोगों के पास अब पैसा नहीं रहा है। लॉकडाउन में लोगों के व्यापार पर भी असर डाला है। इसका असर सराफा कारोबार भी पड़ा है। मयंक अग्रवाल बोले, कोरोना महामारी के साथ-साथ सोने-चांदी के आसमान छूते भाव का भी इस साल राखी कारोबार पर असर पड़ा है।
हजारों लोग जुड़े हैं कारोबार से
मथुरा के चांदी कारोबार से हजारों लोगों की जीविका बंधी है। यहां हर तबके के लोग कहीं न कहीं किसी न किसी चांदी के कारोबार से जुड़ा है। सीजन के हिसाब से कारीगर अपने कारोबार में लगे रहते हैं। ये सीजन सोने-चांदी की राखियों के निर्माण का होता है, लेकिन इस साल कोरोना महामारी और लॉकडाउन ने सैकड़ों कारीगरों के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा कर दिया है।
ठाकुरजी को अर्पित की जाती हैं राखियां
कुछ बहनें ठाकुरजी को अपना भाई मानकर उन्हें राखियां बांधती हैं। मंदिरों में हर साल सोने-चांदी के साथ धागे से बनीं राखियां ठाकुरजी के चरणों में अर्पित होती हैं।