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अवैध मांस विक्रेताओं पर मेहरबान अफसर
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
Updated Fri, 16 Oct 2015 08:29 PM IST
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धार्मिक नगरी में मांस की खुलेआम बिक्री करने वाले दुकानदारों पर खाद्य विभाग दिल खोलकर मेहरबान है। इन विक्रेताओं पर न फूड लाइसेंस है और न बिक्री का कानूनी अधिकार। बावजूद इसके कारोबार बदस्तूर जारी है और अफसर सब कुछ जानकर भी अनजान बने हैं।
आरटीआई कार्यकर्ताओं की संस्था परिवर्तन के वरिष्ठ कार्यकर्ता रामगोपाल ने जानकारी मांगी तो विभाग ने खुद ये तस्वीर पेश की। खाद्य एवं औषधि विभाग ने बीते तीन सालों का आंकड़ा उपलब्ध कराया है।
इसमें वित्तीय वर्ष 2015-16 में न कोई निरीक्षण किया गया है और न ही कोई नमूना लेकर जांच को भेजा है। वहीं 2014 में मात्र सात निरीक्षण किए गए हैं जबकि इस साल भी कोई नमूना नहीं लिया गया। वर्ष 2013 में एक नमूना लिए जाने की जानकारी तो दी गई है लेकिन इसकी रिपोर्ट का कोई जिक्र तक नहीं किया गया है।
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नॉनवेज के लिए मात्र तीन लाइसेंस
विभाग ने अवगत कराया है कि शहर में नॉनवेज के लिए मात्र तीन कारोबारियों को लाइसेंस दिया गया है। इसमें ताज होटल एंड रेस्टोरेंट दरेसी रोड, पंजाबी रसोई चिकन कार्नर है। ताज होटल और रेस्टोरेंट के लिए अलग-अलग लाइसेंस हैं। जबकि कच्चे मीट और स्लाटर हाउस के लिए कोई लाइसेंस निर्गत नहीं किया गया है।
तब तो कार्रवाई ही नहीं कर सकते अफसर
शहर में मुर्गी फाटक, दरेसी रोड, मछली मंडी, मनोहरपुरा सहित कई क्षेत्रों में खुलेआम मांस की बिक्री हो रही है। विभाग के ही जानकार बताते है कि चूंकि विभाग ने इन विक्रेताओं को कोई लाइसेंस जारी नहीं किया ऐसे में अधिकृत रूप से निरीक्षण या नमूना लेने पर विभाग पर ही गंभीर सवाल खड़े हो जाएंगे। ऐसे में सब कुछ जानकर भी अनजान बनना ही अधिकारियों को बेहतर लगता है।
उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में हमने मांस बिक्री का कोई लाइसेंस जारी नहीं किया है। मांस की अवैध बिक्री को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जाती है।
- अखिलेश कुमार, अभिहित अधिकारी खाद्य एवं औषधि विभाग मथुरा।
अवैध मांस बिक्री की सूचना पर कार्रवाई की जाती है। कुछ मामले न्यायालय में चल रहे हैं। अगर और भी कोई मामला संज्ञान में आया तो कार्रवाई की जाएगी।
-विजय कुमार, नगर मजिस्ट्रेट मथुरा
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आरटीआई कार्यकर्ताओं की संस्था परिवर्तन के वरिष्ठ कार्यकर्ता रामगोपाल ने जानकारी मांगी तो विभाग ने खुद ये तस्वीर पेश की। खाद्य एवं औषधि विभाग ने बीते तीन सालों का आंकड़ा उपलब्ध कराया है।
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इसमें वित्तीय वर्ष 2015-16 में न कोई निरीक्षण किया गया है और न ही कोई नमूना लेकर जांच को भेजा है। वहीं 2014 में मात्र सात निरीक्षण किए गए हैं जबकि इस साल भी कोई नमूना नहीं लिया गया। वर्ष 2013 में एक नमूना लिए जाने की जानकारी तो दी गई है लेकिन इसकी रिपोर्ट का कोई जिक्र तक नहीं किया गया है।
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नॉनवेज के लिए मात्र तीन लाइसेंस
विभाग ने अवगत कराया है कि शहर में नॉनवेज के लिए मात्र तीन कारोबारियों को लाइसेंस दिया गया है। इसमें ताज होटल एंड रेस्टोरेंट दरेसी रोड, पंजाबी रसोई चिकन कार्नर है। ताज होटल और रेस्टोरेंट के लिए अलग-अलग लाइसेंस हैं। जबकि कच्चे मीट और स्लाटर हाउस के लिए कोई लाइसेंस निर्गत नहीं किया गया है।
तब तो कार्रवाई ही नहीं कर सकते अफसर
शहर में मुर्गी फाटक, दरेसी रोड, मछली मंडी, मनोहरपुरा सहित कई क्षेत्रों में खुलेआम मांस की बिक्री हो रही है। विभाग के ही जानकार बताते है कि चूंकि विभाग ने इन विक्रेताओं को कोई लाइसेंस जारी नहीं किया ऐसे में अधिकृत रूप से निरीक्षण या नमूना लेने पर विभाग पर ही गंभीर सवाल खड़े हो जाएंगे। ऐसे में सब कुछ जानकर भी अनजान बनना ही अधिकारियों को बेहतर लगता है।
उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में हमने मांस बिक्री का कोई लाइसेंस जारी नहीं किया है। मांस की अवैध बिक्री को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जाती है।
- अखिलेश कुमार, अभिहित अधिकारी खाद्य एवं औषधि विभाग मथुरा।
अवैध मांस बिक्री की सूचना पर कार्रवाई की जाती है। कुछ मामले न्यायालय में चल रहे हैं। अगर और भी कोई मामला संज्ञान में आया तो कार्रवाई की जाएगी।
-विजय कुमार, नगर मजिस्ट्रेट मथुरा