फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Neglected Legacy of Literary Icon Surdas: Surkuti Still Awaiting Development on His 548th Birth Anniversary

548वीं सूरदास जयंती: जिसने आंखों के बिना देखी कान्हा की लीला, उनकी देहरी पर अंधेरा; सूरकुटी का ऐसा है हाल

Tue, 21 Apr 2026 12:52 PM IST
Dhirendra Singh देश दीपक तिवारी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
देश दीपक तिवारी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Tue, 21 Apr 2026 12:52 PM IST
सार

महाकवि सूरदास की 548वीं जयंती पर उनकी तपोस्थली सूरकुटी उपेक्षा और प्रशासनिक अड़चनों के कारण विकास से वंचित नजर आई। वन विभाग की बंदिशों के चलते धरोहर स्थल का संरक्षण और मूलभूत सुविधाओं का विकास लंबे समय से रुका हुआ है।

विज्ञापन
Neglected Legacy of Literary Icon Surdas: Surkuti Still Awaiting Development on His 548th Birth Anniversary
सूरकुटी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

सूर-सूर तुलसी ससी, उड़गन केशवदास। अब के कवि खद्योत सम, जहां तहां करत प्रकास...। हिंदी साहित्य के आकाश में जिस महाकवि को सूर्य का दर्जा प्राप्त है, उनकी अपनी तपोस्थली रुनकता स्थित सूरकुटी गुमनामी और उपेक्षा के अंधेरे में है। महाकवि सूरदास की आज 548वीं जयंती है, लेकिन सूर सरोवर पक्षी विहार की बंदिशों और प्रशासनिक उदासीनता ने धरोहर को विकास की मुख्यधारा से काट दिया है।
विज्ञापन


रुनकता स्थित सूरकुटी में वर्ष 1971 में तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरी ने एक भव्य श्रीकृष्ण मंदिर का निर्माण कराया था। यह एकमात्र मंदिर है, जहां आराध्य भगवान श्रीकृष्ण के साथ उनके अनन्य भक्त सूरदास की प्रतिमा भी स्थापित है और दोनों की एक साथ पूजा होती है। यहां 1978 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और फिर 1980 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी आ चुके हैं। सूरदास मंदिर के दृष्टिबाधित महंत गोपाल बताते हैं कि 55 साल पुरानी तपोस्थली में वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आए तो हालात बदलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
विज्ञापन

वन विभाग की दीवार बनी विकास में बाधक
कीठम झील स्थित जिस वन्य क्षेत्र का नाम महाकवि के सम्मान में सूर सरोवर पक्षी विहार रखा गया, आज वही वन क्षेत्र मंदिर के अस्तित्व के लिए चुनौती बन गया है। पक्षी विहार और ईको-सेंसिटिव जोन की बंदिशों के कारण वन विभाग ने यहां नए निर्माण और मरम्मत कार्य पर कड़ी रोक लगा रखी है। इस तकनीकी अड़चन के चलते मंदिर का संरक्षण नहीं हो पा रहा। परिसर में सूरदास की लाल पत्थर की विशाल प्रतिमा तो है, लेकिन पेयजल, शौचालय और बैठने जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव यहां आने वाले श्रद्धालुओं और साहित्य प्रेमियों को सालता है।
विज्ञापन

अंधियारे जीवन में फैल रहा शिक्षा का उजियारा
तमाम अभावों के बीच सूरकुटी में दृष्टिबाधित बच्चों के लिए एक निशुल्क विद्यालय संचालित है, जहां 50 से अधिक नन्हे सूरदास साहित्य, संस्कृति और संस्कारों की दीक्षा ले रहे हैं। प्राचार्य महेश कुमार ने बताया कि ये दृष्टिबाधित बच्चे महाकवि की समृद्ध विरासत को सहेजने का काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें शासन और प्रशासन से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा।
विज्ञापन

सूरसदन में आज होगा माल्यार्पण
महाकवि की स्मृति में संजय प्लेस स्थित सूरसदन (सांस्कृतिक भवन) में मंगलवार को विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सूर स्मारक मंडल के महामंत्री भुवनेश श्रोतिया ने बताया कि जयंती के अवसर पर सुबह महाकवि की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया जाएगा। इस दौरान स्थानीय कलाकारों और साहित्यकारों द्वारा सूरदास के अमर भक्ति पदों का गायन कर उन्हें काव्यांजलि अर्पित की जाएगी।

साहित्य के सूर्य का महत्व
सूरदास ने ब्रजभाषा को ग्रामीण परिवेश से निकालकर साहित्यिक सिंहासन पर बैठाया। श्रीकृष्ण के बाल-रूप का जैसा सजीव और सूक्ष्म वर्णन सूरदास ने किया है, वैसा विश्व साहित्य में दुर्लभ है।सूरदास के पद सदियों पहले ही मां यशोदा और कान्हा के माध्यम से बाल-सुलभ चेष्टाओं का सटीक विश्लेषण कर चुके थे। उनके पद ब्रज की लोक संस्कृति और देश के शास्त्रीय संगीत का आधार हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed