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कान्हा की नगरी में श्रद्धा के साथ मनाया गया नृसिंह जयंती महोत्सव
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अठखंभा पर नृसिंह मंदिर पर जयंती मनाते भक्तगण।
- फोटो : VRINDAVAN
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मथुरा। कान्हा की नगरी मथुरा में नृसिंह जयंती का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। मंदिरों में अंदर ही सभी आयोजन हुए। लॉकडाउन के कारण बाहरी श्रद्धालुओं का मंदिर में प्रवेश नहीं हुआ।
पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के ठाकुर द्वारिकाधीश मंदिर में भगवान नृसिंह जी की जयंती मनाई गई। मंदिर के गोस्वामी बृजेश कुमार महाराज के आदेशानुसार और काकरोली युवराज डॉ. वागीश कुमार महाराज के निर्देशानुसार नृसिंह जयंती सामाजिक दूरी का पालन करते हुए मनाई गई। सुबह दूध, दही, घी, शहद और बूरा आदि से ठाकुरजी के श्री विग्रह का पंचामृत अभिषेक मंदिर के मुखिया बृजेश कुमार व अन्य द्वारा किया गया। इसके बाद ठाकुरजी का भव्य एवं सुंदर शृंगार किया गया।
मंदिर के विधि एवं मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि प्रतिवर्ष आज ही के दिन मथुरा में सर्वप्रथम नृसिंह लीला का मंचन मंदिर ठाकुर द्वारकाधीश जी महाराज से ही होता है और आज के दिन भगवान नृसिंह जी का चेहरा निकलता है और परंपरागत रूप से जो लोग इस लीला में संलग्न रहते हैं। नृसिंह जी के चेहरे का पूजन और व्यवस्थित रूप से भोग प्रसाद लगाया गया। मंदिर के अधिकारी वैद्य अशोक कुमार शर्मा, मुखिया बृजेश कुमार, सुधीर, समाधानी बृजेश चतुर्वेदी, सत्यनारायण शर्मा, राधा रमन शर्मा, बलदेव, छोटू जीतू कन्हैयालाल थे।
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मल्लपुरा स्थित प्राचीन केशव देव मंदिर में सुबह भगवान नृसिंह जी का मुकुट पूजन हुआ। मंदिर प्रांगण के अंदर सेवायत श्यामा चरण गोस्वामी, विहारी लाल गोस्वामी, मुन्नी लाल गोस्वामी, अध्यक्ष पंडित सोहन लाल शर्मा, प्रवक्ता नारायण प्रसाद शर्मा द्वारा नृसिंह अवतार का पूजन कर ठाकुरजी को गंगाजल से स्नान कराया गया। इसके बाद आरती उतारी गई। पंडित सोहन लाल शर्मा ने बताया नृसिंह जी भगवान विष्णु के दस अवतारों में चौथे अवतार थे। नृसिंह जी ने अपने भक्त प्रह्लाद को बचाने के लिए खंभ से प्रकट होकर प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप का वध किया।
अस्कुंडा घाट स्थित प्राचीन नृसिंह मंदिर पर नृसिंह जयंती प्राकट्योत्सव मनाया गया। नृसिंह जी का वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य सेवायत पंडित मनोज मिश्र, विनोद मिश्र, पंडित अमित भारद्वाज, मनीष द्वारा महामस्तकाभिषेक किया गया। तत्पश्चात शृंगार दर्शन व महाआरती हुई। इस मौके पर राहुल मिश्र, प्रखर मिश्र थे।
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पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के ठाकुर द्वारिकाधीश मंदिर में भगवान नृसिंह जी की जयंती मनाई गई। मंदिर के गोस्वामी बृजेश कुमार महाराज के आदेशानुसार और काकरोली युवराज डॉ. वागीश कुमार महाराज के निर्देशानुसार नृसिंह जयंती सामाजिक दूरी का पालन करते हुए मनाई गई। सुबह दूध, दही, घी, शहद और बूरा आदि से ठाकुरजी के श्री विग्रह का पंचामृत अभिषेक मंदिर के मुखिया बृजेश कुमार व अन्य द्वारा किया गया। इसके बाद ठाकुरजी का भव्य एवं सुंदर शृंगार किया गया।
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मंदिर के विधि एवं मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि प्रतिवर्ष आज ही के दिन मथुरा में सर्वप्रथम नृसिंह लीला का मंचन मंदिर ठाकुर द्वारकाधीश जी महाराज से ही होता है और आज के दिन भगवान नृसिंह जी का चेहरा निकलता है और परंपरागत रूप से जो लोग इस लीला में संलग्न रहते हैं। नृसिंह जी के चेहरे का पूजन और व्यवस्थित रूप से भोग प्रसाद लगाया गया। मंदिर के अधिकारी वैद्य अशोक कुमार शर्मा, मुखिया बृजेश कुमार, सुधीर, समाधानी बृजेश चतुर्वेदी, सत्यनारायण शर्मा, राधा रमन शर्मा, बलदेव, छोटू जीतू कन्हैयालाल थे।
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मल्लपुरा स्थित प्राचीन केशव देव मंदिर में सुबह भगवान नृसिंह जी का मुकुट पूजन हुआ। मंदिर प्रांगण के अंदर सेवायत श्यामा चरण गोस्वामी, विहारी लाल गोस्वामी, मुन्नी लाल गोस्वामी, अध्यक्ष पंडित सोहन लाल शर्मा, प्रवक्ता नारायण प्रसाद शर्मा द्वारा नृसिंह अवतार का पूजन कर ठाकुरजी को गंगाजल से स्नान कराया गया। इसके बाद आरती उतारी गई। पंडित सोहन लाल शर्मा ने बताया नृसिंह जी भगवान विष्णु के दस अवतारों में चौथे अवतार थे। नृसिंह जी ने अपने भक्त प्रह्लाद को बचाने के लिए खंभ से प्रकट होकर प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप का वध किया।
अस्कुंडा घाट स्थित प्राचीन नृसिंह मंदिर पर नृसिंह जयंती प्राकट्योत्सव मनाया गया। नृसिंह जी का वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य सेवायत पंडित मनोज मिश्र, विनोद मिश्र, पंडित अमित भारद्वाज, मनीष द्वारा महामस्तकाभिषेक किया गया। तत्पश्चात शृंगार दर्शन व महाआरती हुई। इस मौके पर राहुल मिश्र, प्रखर मिश्र थे।