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नगर निगम चुनाव मथुरा: वैश्य और ब्राह्मण प्रत्याशी में हो सकती है चुनावी जंग, बढ़ी उम्मीदवारों की सक्रियता
Sat, 01 Apr 2023 08:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Updated Sat, 01 Apr 2023 08:15 AM IST
सार
नगर निगम मेयर का पद अनारक्षित होने पर कांग्रेस सहित अन्य दलों से भी दोनों वर्गों के सर्वाधिक दावेदार हैं। जानकारों का कहना है कि भाजपा और कांग्रेस के टिकट पर दोनों ही वर्गों के उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरेंगे।
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Up nikay chunav, निकाय चुनाव, यूपी चुनाव
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
मथुरा में निकाय चुनाव का नवीन आरक्षण जारी होते ही संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता बढ़ गई है। ब्राह्मण और वैश्य बहुल मथुरा-वृंदावन नगर निगम में मेयर पद पर आसीन होने के लिए दोनों ही वर्गों के दावेदार टिकट के लिए दावपेंच लगाने में जुट गए हैं। तय यह भी माना जा रहा है कि इस बार अनारक्षित मथुरा-वृंदावन नगर निगम में मेयर पद के लिए दोनों ही वर्गों के बीच टिकट से लेकर चुनाव मैदान तक घमासान देखने को मिलेगा।
पार्टी संगठनों ने भी आरक्षण के साथ ही चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। इससे पहले दिसंबर में जो आरक्षण जारी किया गया था, उसमें मेयर पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित किया गया था। मथुरा-वृंदावन नगर निगम से पहले इन दोनों ही नगर पालिकाओं में ब्राह्मण और वैश्यों का कब्जा रहा है। नगर निगम बनने के बाद भी भले ही ग्रामीण अंचल से अन्य जातियों के वोटर बड़ी संख्या में इसका हिस्सा बने हैं, फिर भी इन दोनों जातियों के मतदाता अधिक हैं। नगर निगम मेयर का पद अनारक्षित होने पर कांग्रेस सहित अन्य दलों से भी दोनों वर्गों के सर्वाधिक दावेदार हैं। जानकारों का कहना है कि भाजपा और कांग्रेस के टिकट पर दोनों ही वर्गों के उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरेंगे। भाजपा वैश्य को टिकट देती है तो कांग्रेस ब्राह्मण पर दांव लगा सकती है। अब तक बसपा निकाय चुनाव से अलग रहती आई है। ऐसे में यह तय होना बाकी है कि कौनसा दल किसे मोहरा बनाता है। हालांकि दोनों ही वर्ग के दावेदारों ने अपनी पैरोकारी संबंधित दलों में शुरू कर दी है।
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पार्टी संगठनों ने भी आरक्षण के साथ ही चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। इससे पहले दिसंबर में जो आरक्षण जारी किया गया था, उसमें मेयर पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित किया गया था। मथुरा-वृंदावन नगर निगम से पहले इन दोनों ही नगर पालिकाओं में ब्राह्मण और वैश्यों का कब्जा रहा है। नगर निगम बनने के बाद भी भले ही ग्रामीण अंचल से अन्य जातियों के वोटर बड़ी संख्या में इसका हिस्सा बने हैं, फिर भी इन दोनों जातियों के मतदाता अधिक हैं। नगर निगम मेयर का पद अनारक्षित होने पर कांग्रेस सहित अन्य दलों से भी दोनों वर्गों के सर्वाधिक दावेदार हैं। जानकारों का कहना है कि भाजपा और कांग्रेस के टिकट पर दोनों ही वर्गों के उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरेंगे। भाजपा वैश्य को टिकट देती है तो कांग्रेस ब्राह्मण पर दांव लगा सकती है। अब तक बसपा निकाय चुनाव से अलग रहती आई है। ऐसे में यह तय होना बाकी है कि कौनसा दल किसे मोहरा बनाता है। हालांकि दोनों ही वर्ग के दावेदारों ने अपनी पैरोकारी संबंधित दलों में शुरू कर दी है।
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पूर्व तैयारी आ रही काम
जिलाध्यक्ष भगवान सिंह वर्मा ने बताया कि कांग्रेस कांग्रेस पार्टी दिसंबर में प्रस्तावित निकाय चुनाव में की गई तैयारी को लेकर नए सिरे से आगे बढ़ रही है। जनपद के सभी 15 निकायों में चुनाव लड़ेंगे। सभी वार्ड स्तर पर भी उम्मीदवार खड़े करेंगे। जाति वर्ग के मुताबिक तीन-तीन उम्मीदवारों की सूची पहले से तैयार है। इसी प्रकार नगर निगम में मेयर के लिए आए 16 आवेदनों में से भी तीन नाम प्रदेश संगठन को भेजे जाएंगे।
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