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मथुरा: नगर निगम का बंदर पकड़ो अभियान शुरू, 85 बंदर पिंजरे में कैद
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नगर निगम के पिंजरे में कैद बंदर।
- फोटो : MATHURA
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मथुरा। जनता की मांग और मथुरा-वृंदावन महानगर में वर्तमान समय की सबसे बड़ी समस्या को लेकर मथुरा में बुधवार से बंदर पकड़ो अभियान प्रारंभ हो गया है। नगर निगम ने बीते सप्ताह इस का टेंडर खोला था। पहले दिन 85 बंदर पकड़े गए। यह बंदर बीहड़ में छोड़े जाएंगे। यह अभियान लगातार चलता रहेगा।
लगातार बंदरों से परेशान होकर महानगर की जनता विरोध की आवाज बुलंद करने लगी थी। इन लोगों ने डीएम तक दस्तक देकर बंदरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। बंदर अभी तक सामान हाथ से खींचकर ले जाते हैं। कुछ दिनों से यह बंदर जानलेवा भी होने लग गए। छत से कई लोगों को गिरा चुके बंदर अब काफी आततायी हो गए थे।
बुधवार को महापौर ने बंदरों को पकड़वाने का अभियान शुरू करवा दिया। इसकी शुरूआत मथुरा शहर से हुई। नगर निगम की टीम जुटी तो करीब 85 बंदर पकड़कर पिंजरों में कैद कर लिए गए। इन बंदरों को बीहड़ में छुड़वाया जाएगा। महापौर डॉ. मुकेश आर्य बंधु ने बताया कि बंदर पकड़ो अभियान लगातार चलता रहेगा। लोगों को जल्द ही इस समस्या से निजात मिलेगी।
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ऐसे पकड़ते हैं बंदर
टीम के पास कई पिंजरे होते हैं। उन पिंजरों को जहां बड़ी संख्या में बंदर होते हैं, वहां लगा दिया जाता है। पिंजरों में चना व अन्य खाने-पीने की चीजें रख दी जाती हैं। एक डोरी की मदद से दरवाजा खुला रहता है। जैसे ही कई बंदर पिंजरे में खाने के लालच में घुसते हैं, डोरी से दरवाजा बंद कर दिया है।
बाद में पिंजरों में कैद बंदर जंगलों में छोड़ दिए जाते हैं।
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लगातार बंदरों से परेशान होकर महानगर की जनता विरोध की आवाज बुलंद करने लगी थी। इन लोगों ने डीएम तक दस्तक देकर बंदरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। बंदर अभी तक सामान हाथ से खींचकर ले जाते हैं। कुछ दिनों से यह बंदर जानलेवा भी होने लग गए। छत से कई लोगों को गिरा चुके बंदर अब काफी आततायी हो गए थे।
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बुधवार को महापौर ने बंदरों को पकड़वाने का अभियान शुरू करवा दिया। इसकी शुरूआत मथुरा शहर से हुई। नगर निगम की टीम जुटी तो करीब 85 बंदर पकड़कर पिंजरों में कैद कर लिए गए। इन बंदरों को बीहड़ में छुड़वाया जाएगा। महापौर डॉ. मुकेश आर्य बंधु ने बताया कि बंदर पकड़ो अभियान लगातार चलता रहेगा। लोगों को जल्द ही इस समस्या से निजात मिलेगी।
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ऐसे पकड़ते हैं बंदर
टीम के पास कई पिंजरे होते हैं। उन पिंजरों को जहां बड़ी संख्या में बंदर होते हैं, वहां लगा दिया जाता है। पिंजरों में चना व अन्य खाने-पीने की चीजें रख दी जाती हैं। एक डोरी की मदद से दरवाजा खुला रहता है। जैसे ही कई बंदर पिंजरे में खाने के लालच में घुसते हैं, डोरी से दरवाजा बंद कर दिया है।
बाद में पिंजरों में कैद बंदर जंगलों में छोड़ दिए जाते हैं।