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मथुरा: शिक्षा निदेशक माध्यमिक के खिलाफ हाईकोर्ट ने जारी किया वारंट
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मथुरा। अवशेष भुगतान प्रकरण में रतनलाल इंटर कॉलेज दौलतपुर के सेवानिवृत्त शिक्षक की याचिका पर हाईकोर्ट ने शिक्षा निदेशक माध्यमिक के खिलाफ वारंट जारी कर दिया है। यह आदेश अवमानना याचिका में शिक्षा निदेशक के न्यायालय में उपस्थित और शपथ पत्र दाखिल न करने पर जारी किया गया है।
माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई के प्रांतीय उपाध्यक्ष एवं संरक्षण समिति के संयोजक अयोध्या प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि जनपद के रतनलाल इंटर कॉलेज दौलतपुर के सेवानिवृत्त शिक्षक गणेशी लाल शास्त्री की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षा निदेशक माध्यमिक को अवशेष भुगतान के आदेश दिए थे।
इसके बावजूद भुगतान न होने पर गनेशी लाल ने शिक्षा निदेशक के विरुद्ध अवमानना याचिका दायर की। इसकी सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय में शिक्षा निदेशक माध्यमिक न तो उपस्थित हुए और न शपथपत्र दाखिल किया। इस पर न्यायालय ने 29 मार्च को शिक्षा निदेशक के विरुद्ध जमानती वारंट जारी कर दिया है। सुनवाई की आगामी तिथि 02 मई नियत की है।
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अयोध्या प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि गनेशी लाल को कतिपय आरोपों के आधार पर निलंबित कर कॉलेज प्रबंधतंत्र ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थी, जिसे चयन बोर्ड द्वारा अमान्य कर दिया गया। चयन बोर्ड के फैसले के बाद भी विद्यालय प्रबंधन ने उक्त शिक्षक को कार्यभार ग्रहण नहीं कराया।
एकल संचालन से सेवानिवृत्त होने तक वेतन तथा बाद में पेंशन आदि देयकों का भुगतान किया गया। निलंबन अवधि का वेतन भुगतान न होने पर उन्होंने न्यायालय की शरण ली।
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माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई के प्रांतीय उपाध्यक्ष एवं संरक्षण समिति के संयोजक अयोध्या प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि जनपद के रतनलाल इंटर कॉलेज दौलतपुर के सेवानिवृत्त शिक्षक गणेशी लाल शास्त्री की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षा निदेशक माध्यमिक को अवशेष भुगतान के आदेश दिए थे।
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इसके बावजूद भुगतान न होने पर गनेशी लाल ने शिक्षा निदेशक के विरुद्ध अवमानना याचिका दायर की। इसकी सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय में शिक्षा निदेशक माध्यमिक न तो उपस्थित हुए और न शपथपत्र दाखिल किया। इस पर न्यायालय ने 29 मार्च को शिक्षा निदेशक के विरुद्ध जमानती वारंट जारी कर दिया है। सुनवाई की आगामी तिथि 02 मई नियत की है।
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अयोध्या प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि गनेशी लाल को कतिपय आरोपों के आधार पर निलंबित कर कॉलेज प्रबंधतंत्र ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थी, जिसे चयन बोर्ड द्वारा अमान्य कर दिया गया। चयन बोर्ड के फैसले के बाद भी विद्यालय प्रबंधन ने उक्त शिक्षक को कार्यभार ग्रहण नहीं कराया।
एकल संचालन से सेवानिवृत्त होने तक वेतन तथा बाद में पेंशन आदि देयकों का भुगतान किया गया। निलंबन अवधि का वेतन भुगतान न होने पर उन्होंने न्यायालय की शरण ली।