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युवक की मौत पर हंगामा, एसओ को मारने दौड़ी भीड़
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
Updated Fri, 30 Oct 2015 11:46 PM IST
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थाना महावन क्षेत्र से तीन दिन पहले लापता हुआ युवक शुक्रवार को घायल हालत में मिला। आगरा में उपचार के दौरान युवक की मौत हो गई। परिवारीजनों ने मामले में आरोप लगाया कि एसओ महावन पर मौके पर पहुंच कर युवक को घायल हालत में छोड़कर चले आए थे।
इस पर मथुरा के अस्पताल में हंगामा हुआ और भीड़ एसओ का मारने के लिए दौड़ी। बीच बचाव को आए पुलिस अधिकारियों से धक्का-मुक्की हो गई। एसपी देहात ने एसओ महावन को हटाते हुए निलंबन की संस्तुति की तब जाकर आक्रोश थमा। युवक के भाई ने छह लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने कड़ी सुरक्षा में युवक का अंतिम संस्कार कराया।
महावन के चौधर पाड़ा मोहल्ला निवासी विनय कांत पाराशर (22) पुत्र सतीश चंद्र पाराशर महावन तहसील में हीरेश पाराशर के बिस्तर पर बैठते थे। परिवारीजनों के अनुसार 28 अक्तूबर को शाम सात बजे विनय के मोबाइल पर फोन आया और वह जल्द लौट कर आने की कहकर चले गए।
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रात तक लौटकर न आने पर 29 अक्तूबर को भाई शशिकांत ने विनय के लापता होने की सूचना एसओ महावन को दी। आरोप है कि एसओ महावन विनोद मिश्रा मामले को गंभीरता से नहीं लिया। विनय के एक-दो दिन में लौटकर आने की शशिकांत को वापस भेज दिया।
शुक्रवार को सुबह 6:30 बजे यमुना किनारे टहल रहे गोकुल के लोगों ने गोकुल बैराज के नीचे नदी के बीच बने रेत के टापू पर एक युवक को पड़ा देखा तो महावन पुलिस को सूचना दी। गोकुल के लोगों ने विनय की पहचान भी कर ली। बताया जा रहा है तब विनय की सांस चल रही थी। एसओ महावन मामला दूसरे थाने का बताकर लौट गए। थोड़ी देर बाद परिवारीजन और एसओ सदर पहुंचे।
पुलिस ने विनय को मथुरा के अग्रवाल लाइफ लाइन अस्पताल पहुंचाया। यहां से हालत गंभीर होने पर आगरा रेफर कर दिया गया। आगरा में चिकित्सकों ने विनय को मृत घोषित कर दिया। इधर मथुरा के अस्पताल में परिवारीजन पुलिस कार्रवाई को लेकर हंगामा करने लगे। अस्पताल पहुंचे एसओ महावन को देखकर भीड़ उग्र हो गई और मारने के लिए दौड़ पड़ी। मौके पर मौजूद एसओ सदर, एसओ रिफाइनरी, एसओ हाईवे ने बीच-बचाव किया तो उनसे भी धक्का मुक्की हो गई।
बवाल की आशंका पर अस्पताल में छह थानों का फोर्स बुला लिया गया था। शव के लौटने पर महावन में हंगामे की आशंका के चलते पुलिस और पीएसी तैनात कर दी गई। इसके बाद एसपी देहात अजय कुमार ने एसओ महावन विनोद मिश्रा को हटाकर निलंबन की संस्तुति की तब लोग थोड़ा शांत हुए।
देर शाम कड़ी सुरक्षा में युवक का अंतिम संस्कार कराया गया। मामले में शशिकांत ने अनुराग तिवारी, गिरीश तिवारी, हेमंत तिवारी, गोपाल शर्मा, सुभाष मिश्रा और रसिक मिश्रा के खिलाफ हत्या कर शव यमुना में फेंके जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
एसओ की अनदेखी से भड़का आक्रोश
विनय के भाई अमित पाराशर ने बताया कि 10 दिन पहले विनय की कस्बा के संजू मल्लाह से 60000 रुपयों के लेन-देन को लेकर मारपीट हो गई थी। इस मामले में एसओ महावन ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए हम सभी चार भाइयों को नामजद कर दिया था। हमारी तहरीर पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद विनय के लापता होने की सूचना को भी गंभीरता से नहीं लिया।
विनय के भाई शशिकांत ने बताया कि 29 अक्तूबर को दोपहर तक विनय का मोबाइल ऑन रहा लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। दोपहर बाद फोन बंद हो गया था। शुक्रवार को विनय घायल हालत में मिला तो सुबह सात बजे पहुंचे एसओ विनोद मिश्रा थाना सदर का इलाका बताते हुए उसे घायल हालत में छोड़कर ही लौट गए। एसओ सदर के साथ परिवारीजनों ने ही विनय को अस्पताल पहुंचाया। एसपी देहात ने पूरे मामले की जांच सीओ महावन को सौंपी है। एसआई नरेंद्र को थाना महावन का कार्यवाहक प्रभारी बनाया है।
पीएम हाउस से महावन थाने तक बनाई छावनी
विनयकांत पाराशर की मौत के बाद बवाल की आशंका पर पीएम हाउस से महावन तक क्षेत्र को छावनी बना दिया गया। लोगों में भड़के आक्रोश के चलते अग्रवाल लाइफलाइन अस्पताल पर ही छह थानों की पुलिस तैनात कर दी गई थी। आगरा से शव लौटने के बाद महावन थाने पर शव रखकर जाम लगाने और तोड़फोड़ की आशंका के चलते महावन में पुलिस और पीएसी तैनात कर दी गई। पोस्टमार्टम गृह पर सीओ महावन अजय कुमार, सीओ सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी, एसओ मगोर्रा, एसओ गोवर्धन, एसओ सदर, एसओ हाईवे, एसओ रिफाइनरी और पीएसी तैनात रही।
दो दशक पुरानी रंजिश की शुरुआत
बताया गया है कि महावन में चौधर पाड़ा मोहल्ला के पाराशर परिवार और तिवारी परिवार में दो दशक पहले दोनों ओर से रंजिश में कई हत्याओं का दौर चला। संभ्रांत लोगों के हस्तक्षेप के बाद से 15 साल सुलह हो गई। बीते दो साल से बच्चों के झगड़े से शुरू हुई मारपीट ने फिर रंजिश का रूप ले लिया है।
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इस पर मथुरा के अस्पताल में हंगामा हुआ और भीड़ एसओ का मारने के लिए दौड़ी। बीच बचाव को आए पुलिस अधिकारियों से धक्का-मुक्की हो गई। एसपी देहात ने एसओ महावन को हटाते हुए निलंबन की संस्तुति की तब जाकर आक्रोश थमा। युवक के भाई ने छह लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने कड़ी सुरक्षा में युवक का अंतिम संस्कार कराया।
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महावन के चौधर पाड़ा मोहल्ला निवासी विनय कांत पाराशर (22) पुत्र सतीश चंद्र पाराशर महावन तहसील में हीरेश पाराशर के बिस्तर पर बैठते थे। परिवारीजनों के अनुसार 28 अक्तूबर को शाम सात बजे विनय के मोबाइल पर फोन आया और वह जल्द लौट कर आने की कहकर चले गए।
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रात तक लौटकर न आने पर 29 अक्तूबर को भाई शशिकांत ने विनय के लापता होने की सूचना एसओ महावन को दी। आरोप है कि एसओ महावन विनोद मिश्रा मामले को गंभीरता से नहीं लिया। विनय के एक-दो दिन में लौटकर आने की शशिकांत को वापस भेज दिया।
शुक्रवार को सुबह 6:30 बजे यमुना किनारे टहल रहे गोकुल के लोगों ने गोकुल बैराज के नीचे नदी के बीच बने रेत के टापू पर एक युवक को पड़ा देखा तो महावन पुलिस को सूचना दी। गोकुल के लोगों ने विनय की पहचान भी कर ली। बताया जा रहा है तब विनय की सांस चल रही थी। एसओ महावन मामला दूसरे थाने का बताकर लौट गए। थोड़ी देर बाद परिवारीजन और एसओ सदर पहुंचे।
पुलिस ने विनय को मथुरा के अग्रवाल लाइफ लाइन अस्पताल पहुंचाया। यहां से हालत गंभीर होने पर आगरा रेफर कर दिया गया। आगरा में चिकित्सकों ने विनय को मृत घोषित कर दिया। इधर मथुरा के अस्पताल में परिवारीजन पुलिस कार्रवाई को लेकर हंगामा करने लगे। अस्पताल पहुंचे एसओ महावन को देखकर भीड़ उग्र हो गई और मारने के लिए दौड़ पड़ी। मौके पर मौजूद एसओ सदर, एसओ रिफाइनरी, एसओ हाईवे ने बीच-बचाव किया तो उनसे भी धक्का मुक्की हो गई।
बवाल की आशंका पर अस्पताल में छह थानों का फोर्स बुला लिया गया था। शव के लौटने पर महावन में हंगामे की आशंका के चलते पुलिस और पीएसी तैनात कर दी गई। इसके बाद एसपी देहात अजय कुमार ने एसओ महावन विनोद मिश्रा को हटाकर निलंबन की संस्तुति की तब लोग थोड़ा शांत हुए।
देर शाम कड़ी सुरक्षा में युवक का अंतिम संस्कार कराया गया। मामले में शशिकांत ने अनुराग तिवारी, गिरीश तिवारी, हेमंत तिवारी, गोपाल शर्मा, सुभाष मिश्रा और रसिक मिश्रा के खिलाफ हत्या कर शव यमुना में फेंके जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
एसओ की अनदेखी से भड़का आक्रोश
विनय के भाई अमित पाराशर ने बताया कि 10 दिन पहले विनय की कस्बा के संजू मल्लाह से 60000 रुपयों के लेन-देन को लेकर मारपीट हो गई थी। इस मामले में एसओ महावन ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए हम सभी चार भाइयों को नामजद कर दिया था। हमारी तहरीर पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद विनय के लापता होने की सूचना को भी गंभीरता से नहीं लिया।
विनय के भाई शशिकांत ने बताया कि 29 अक्तूबर को दोपहर तक विनय का मोबाइल ऑन रहा लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। दोपहर बाद फोन बंद हो गया था। शुक्रवार को विनय घायल हालत में मिला तो सुबह सात बजे पहुंचे एसओ विनोद मिश्रा थाना सदर का इलाका बताते हुए उसे घायल हालत में छोड़कर ही लौट गए। एसओ सदर के साथ परिवारीजनों ने ही विनय को अस्पताल पहुंचाया। एसपी देहात ने पूरे मामले की जांच सीओ महावन को सौंपी है। एसआई नरेंद्र को थाना महावन का कार्यवाहक प्रभारी बनाया है।
पीएम हाउस से महावन थाने तक बनाई छावनी
विनयकांत पाराशर की मौत के बाद बवाल की आशंका पर पीएम हाउस से महावन तक क्षेत्र को छावनी बना दिया गया। लोगों में भड़के आक्रोश के चलते अग्रवाल लाइफलाइन अस्पताल पर ही छह थानों की पुलिस तैनात कर दी गई थी। आगरा से शव लौटने के बाद महावन थाने पर शव रखकर जाम लगाने और तोड़फोड़ की आशंका के चलते महावन में पुलिस और पीएसी तैनात कर दी गई। पोस्टमार्टम गृह पर सीओ महावन अजय कुमार, सीओ सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी, एसओ मगोर्रा, एसओ गोवर्धन, एसओ सदर, एसओ हाईवे, एसओ रिफाइनरी और पीएसी तैनात रही।
दो दशक पुरानी रंजिश की शुरुआत
बताया गया है कि महावन में चौधर पाड़ा मोहल्ला के पाराशर परिवार और तिवारी परिवार में दो दशक पहले दोनों ओर से रंजिश में कई हत्याओं का दौर चला। संभ्रांत लोगों के हस्तक्षेप के बाद से 15 साल सुलह हो गई। बीते दो साल से बच्चों के झगड़े से शुरू हुई मारपीट ने फिर रंजिश का रूप ले लिया है।