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पालकी में सवार होकर निकले भगवान गोदारंगमन्नार
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वृंदावन। रंगनाथ मंदिर के दस दिवसीय ब्रह्मोसव के अंतर्गत सोमवार को भगवान गोदारंगमन्नार पालकी पर आरुढ़ होकर भक्तों को दर्शन देने निकले। भगवान ने श्रीपुष्करणी कुंड में स्नान किया। इस दिव्य दर्शन की अभिलाषा लिए भक्त दोपहर में मंदिर प्रांगण में रुके रहे।
इससे पूर्व सुबह दक्षिण भारत से आए वेदपाठी ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य भगवान गोदारंगमन्नार को रजत पालकी में विराजमान कराया। भगवान के पालकी में विराजमान होते ही समूचा मंदिर परिसर भगवान गोदारंगमन्नार के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। पालकी सवारी रंगनाथ मंदिर से प्रारंभ होकर मंदिर के पश्चिम गेट पर पहुंची यहां से पत्थरपुरा, गोपीनाथ बाजार होते हुए प्राचीन केशीघाट पहुंची।
वहां पर मंदिर सेवायतों ने भगवान गोदारंगमन्नार को मां यमुना के दर्शन कराए। इसके बाद ब्राह्मणों और सेवायतों ने मां यमुना और भगवान गोदारंगमन्नार की आरती उतारी। भगवान की सवारी गोपेश्वर मार्ग, ज्ञानगुदड़ी, ब्रह्मकुंड होते हुए मंदिर पहुंची। सवारी में भक्तों ने जगह-जगह आरती और पुष्पवर्षा कर भगवान गोदारंगमन्नार का स्वागत किया।
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इसके बाद मंदिर में हुए वैदिक परंपराओं के बाद भगवान गोदारंगमन्नार को पालकी के साथ श्रीपुष्करणी कुंड ले जाया गया। यहां मंदिर सेवायतों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य भगवान गोदारंगमन्नार को प्रतिकात्मक रूप से पुष्करणी स्नान कराया। मंदिर प्रांगण भगवान गोदारंगमन्नार के जयकारों से गुंजायमान हो गया।
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इससे पूर्व सुबह दक्षिण भारत से आए वेदपाठी ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य भगवान गोदारंगमन्नार को रजत पालकी में विराजमान कराया। भगवान के पालकी में विराजमान होते ही समूचा मंदिर परिसर भगवान गोदारंगमन्नार के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। पालकी सवारी रंगनाथ मंदिर से प्रारंभ होकर मंदिर के पश्चिम गेट पर पहुंची यहां से पत्थरपुरा, गोपीनाथ बाजार होते हुए प्राचीन केशीघाट पहुंची।
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वहां पर मंदिर सेवायतों ने भगवान गोदारंगमन्नार को मां यमुना के दर्शन कराए। इसके बाद ब्राह्मणों और सेवायतों ने मां यमुना और भगवान गोदारंगमन्नार की आरती उतारी। भगवान की सवारी गोपेश्वर मार्ग, ज्ञानगुदड़ी, ब्रह्मकुंड होते हुए मंदिर पहुंची। सवारी में भक्तों ने जगह-जगह आरती और पुष्पवर्षा कर भगवान गोदारंगमन्नार का स्वागत किया।
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इसके बाद मंदिर में हुए वैदिक परंपराओं के बाद भगवान गोदारंगमन्नार को पालकी के साथ श्रीपुष्करणी कुंड ले जाया गया। यहां मंदिर सेवायतों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य भगवान गोदारंगमन्नार को प्रतिकात्मक रूप से पुष्करणी स्नान कराया। मंदिर प्रांगण भगवान गोदारंगमन्नार के जयकारों से गुंजायमान हो गया।