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कानपुर की मुठभेड़ ने याद दिलाया जवाहरबाग कांड
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मथुरा। शहीद सिपाही जितेंद्र सिंह के घर पर परिजनों से जानकारी जुटाती पुलिस।
- फोटो : MATHURA
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मथुरा। कानपुर में हुई मुठभेड़ में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों के शहीद होने की घटना ने मथुरा में दो जूून 2016 को जवाहरबाग को खाली कराने के लिए हुई हिंसा की याद ताजा कर दी। उस घटना में मथुरा के एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी व फरह थाने के प्रभारी संतोष यादव शहीद हो गए थे और रामवृक्ष यादव के 27 समर्थक मारे गए थे। कानपुर में हुई घटना के शहीदों में मथुरा निवासी सिपाही जितेंद्र भी शामिल हैं। जितेंद्र के परिवार और गांव वाले इस तरह की घटना करने वाले असामाजिक तत्वों को कोस रहे हैं।
फरवरी 2014 में रामवृक्ष यादव तीन दिन की अनुमति के साथ मथुरा के जवाहरबाग में अपने हजारों साथियों के साथ आया था। इसके बाद वह जवाहरबाग में ही जम गया और उसने बाग को खाली नहीं किया। जवाहरबाग को खाली कराने का जिला प्रशासन ने भी कोई प्रयास नहीं किया। जवाहरबाग के कर्मचारियों द्वारा आलू की खोदाई करने के दौरान मजदूरों को रामवृक्ष यादव के लोगों ने पीटकर भगा दिया।
इसके बाद रामवृक्ष यादव के खिलाफ सदर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसके बाद से रामवृक्ष यादव के समर्थक जवाहरबाग के गेट पर बैठ गए और किसी को अंदर नहीं जाने देते थे। लोगों में आकर्षण बनाने के लिए रामवृक्ष ने जवाहरबाग के अंदर सस्ता मिनी बाजार भी लगाया था, जिसमें सस्ती दाल, चावल, चीनी, अनाज, फल-सब्जी बेचे जाते थे।
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रामवृक्ष यादव की बढ़ती हरकतों को देखकर जिला प्रशासन ने जवाहर बाग की बिजली भी काट दी थी। इससे वह बौखला गया और गेट पर अपने आदमी तैनात कर दिए। दो जूून 2016 को बाग को खाली कराने को लेकर मुठभेड़ हुई, जिसमें एसपी सिटी और थाना प्रभारी शहीद हो गए थे।
अत्याधुनिक हथियारों से लैस हो पुलिस
मथुरा। पुलिस पर हमला होना अब आम हो गया है। ऐसा लगता है कि पुलिस का खौफ ही खत्म हो गया है। पुलिस का इकबाल बुलंद करने के लिए सरकार को अत्याधुनिक हथियारों से लैस करना चाहिए। हालांकि मथुरा पुलिस हथियारों से लैस जरूर है, पर अब बदमाशों के अत्याधुनिक हथियारों के लैस होने के चलते पुलिस विभाग को भी यह सोचना होगा।
पुलिस पर हुए हमले, कई गंवा चुके हैं जान
- 2009 में थाना रिफाइनरी के थाना प्रभारी पर गोतस्करों ने हमला बोला था, पर बाल-बाल बच गए थे एसओ।
- 2011 में बाजना पुलिस के दो सिपाहियों की हत्या करके राइफल लूट ले गए थे बदमाश।
- 2013 में बरसाना में दबिश को आई आगरा की एसओजी के सिपाही सतीश परिहार की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
- 2017 में छाता में हाईवे पर गोतस्करों ने हमला बोला था। गाड़ी की टक्कर से एक सिपाही और होमगार्ड की मौत हुई थी।
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फरवरी 2014 में रामवृक्ष यादव तीन दिन की अनुमति के साथ मथुरा के जवाहरबाग में अपने हजारों साथियों के साथ आया था। इसके बाद वह जवाहरबाग में ही जम गया और उसने बाग को खाली नहीं किया। जवाहरबाग को खाली कराने का जिला प्रशासन ने भी कोई प्रयास नहीं किया। जवाहरबाग के कर्मचारियों द्वारा आलू की खोदाई करने के दौरान मजदूरों को रामवृक्ष यादव के लोगों ने पीटकर भगा दिया।
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इसके बाद रामवृक्ष यादव के खिलाफ सदर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसके बाद से रामवृक्ष यादव के समर्थक जवाहरबाग के गेट पर बैठ गए और किसी को अंदर नहीं जाने देते थे। लोगों में आकर्षण बनाने के लिए रामवृक्ष ने जवाहरबाग के अंदर सस्ता मिनी बाजार भी लगाया था, जिसमें सस्ती दाल, चावल, चीनी, अनाज, फल-सब्जी बेचे जाते थे।
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रामवृक्ष यादव की बढ़ती हरकतों को देखकर जिला प्रशासन ने जवाहर बाग की बिजली भी काट दी थी। इससे वह बौखला गया और गेट पर अपने आदमी तैनात कर दिए। दो जूून 2016 को बाग को खाली कराने को लेकर मुठभेड़ हुई, जिसमें एसपी सिटी और थाना प्रभारी शहीद हो गए थे।
अत्याधुनिक हथियारों से लैस हो पुलिस
मथुरा। पुलिस पर हमला होना अब आम हो गया है। ऐसा लगता है कि पुलिस का खौफ ही खत्म हो गया है। पुलिस का इकबाल बुलंद करने के लिए सरकार को अत्याधुनिक हथियारों से लैस करना चाहिए। हालांकि मथुरा पुलिस हथियारों से लैस जरूर है, पर अब बदमाशों के अत्याधुनिक हथियारों के लैस होने के चलते पुलिस विभाग को भी यह सोचना होगा।
पुलिस पर हुए हमले, कई गंवा चुके हैं जान
- 2009 में थाना रिफाइनरी के थाना प्रभारी पर गोतस्करों ने हमला बोला था, पर बाल-बाल बच गए थे एसओ।
- 2011 में बाजना पुलिस के दो सिपाहियों की हत्या करके राइफल लूट ले गए थे बदमाश।
- 2013 में बरसाना में दबिश को आई आगरा की एसओजी के सिपाही सतीश परिहार की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
- 2017 में छाता में हाईवे पर गोतस्करों ने हमला बोला था। गाड़ी की टक्कर से एक सिपाही और होमगार्ड की मौत हुई थी।