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Mathura News: रांकौली पहाड़ पर लगेंगे कान्हा के प्रिय पौधे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 28 Mar 2024 04:47 AM IST
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Kanha's favorite plants will be planted on Rankauli mountain.
मथुरा। बरसाना स्थिति रांकौली पहाड़ को हरा-भरा बनाया जाएगा। इस प्रक्रिया में भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय प्रजातियों वाले पौधों की प्रजातियाें का रोपण किया जाएगा। इसमें कदंब, बरगद, पाकड़, पीपल और नीम को वरीयता मिलेगी। इससे न केवल पहाड़ का रंग-रूप बदलेगा, बल्कि आसपास के पर्यावरण में भी सकारात्मक परिवर्तन आएगा।
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बरसाना के रांकौली पहाड़ पर ईको रेस्टोरेशन ( पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जिवित करने) के लिए उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और दिल्ली की अमयात्मा चेरिटेबल फाउंडेशन के बीच इस वर्ष जनवरी माह में एमओयू साइन हुआ था। सीएसआर के आधार पर यह संस्था पहाड़ के ईको रेस्टोरेशन पर काम कर रही है। दरअसल अब जो पहाड़ से प्राकृतिक वनस्पति समाप्त हो गई है, उसे दोबारा से लगाने का काम शुरु किया गया है।
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इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बुधवार को उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ एसबी सिंह, डिप्टी सीईओ जेपी पांडेय, पर्यावरण सलाहकार मुकेश शर्मा के साथ संस्था की फाउंडर अभिलाषा रंजन ने रांकौली पहाड़ का निरीक्षण किया। एमओयू के तहत यह सहमति बनी है कि रांकौली पहाड़ का ईको रेस्टोरेशन संस्था सीएसआर फंड से कराएगी, जबकि उसकी तार फेंसिंग मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण कराएगा। अभी तक यहां दोबारा से वनस्पति और पेड़ पौधे उगाने के लिए संस्था की ओर से करीब एक माह से बेसलाइन सर्वे किया गया है।
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इनसेट-

उप्र और राजस्थान के बीच बंटा है आधा-आधा पहाड़
बरसाना का रांकौली पहाड़ आधा उत्तर प्रदेश और आधा राजस्थान की सीमा में पड़ता है। पहाड़ की चोटी से एक ओर उप्र है और दूसरी ओर राजस्थान है। अंतरराज्यीय सीमा पर एक बाउंड्रीवाल बनी हुई है, जो सीमा निर्धारण करती है। इस पहाड़ का उत्तर प्रदेश वाला हिस्सा करीब 98 हेक्टेयर क्षेत्रफल का है। इस पहाड़ के सौंदर्यीकरण के लिए स्थानीय साधु संत भी लगातार प्रयास कर रहे थे।




वर्जन-

रांकौली पहाड़ पर उत्तर प्रदेश की सीमा वाले हिस्से का पहले ईको रेस्टोरेशन कराया जाएगा। इसके बाद उसी हरियाली को आधार बनाकर राजस्थान के अधिकारियों से भी इसी तरह के कार्य कराने का आग्रह किया जाएगा। रांकौली पहाड़ के ईको रेस्टोरेशन से न केवल पर्यावरणीय लाभ होगा, बल्कि स्थानीय पर्यटन भी बढ़ेगा।
- एसबी सिंह, सीईओ, उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद

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फोटो-
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