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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mathura News ›   Kanha seated on the branch of a Kadamba tree

Mathura News: कदंब की डाल पर बैठे कान्हा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 26 Sep 2026 01:02 AM IST
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Kanha seated on the branch of a Kadamba tree
कदमखंडी में चीरहरण लीला के दौरान कदंब के वृक्ष पर विराजमान कान्हा के स्वरूप।
बरसाना। कदंब की डाल पर बैठे कान्हा और नीचे खड़ी गोपियां अपने वस्त्र लौटाने की गुहार लगा रही थीं। प्राचीन कदमखंडी में शुक्रवार को द्वापरकालीन चीरहरण लीला का यह मनोहारी दृश्य जीवंत हुआ। लीला के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। कदंब पर विराजमान माखन चोर कान्हा की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालु देर तक डटे रहे।
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राजस्थान के कामां तहसील क्षेत्र के पाछौल गांव स्थित कदमखंडी को राधा-कृष्ण की प्राचीन लीला स्थली माना जाता है। मान्यता है कि द्वापरकाल में यहां यमुना बहती थी। इसी यमुना में ब्रज की गोपियां स्नान करने आती थीं। एक दिन श्रीकृष्ण ने गोपियों के वस्त्र उठा लिए और कदंब के वृक्ष पर जा बैठे। स्नान के बाद गोपियां जब यमुना से बाहर आईं तो वस्त्र नहीं मिले। तलाश करने पर कदंब की डाल पर वस्त्र लेकर बैठे कान्हा दिखाई दिए। गोपियों ने श्रीकृष्ण से वस्त्र लौटाने की प्रार्थना की। लीला में श्रीकृष्ण ने गोपियों से वचन लिया कि वे आगे से निर्वस्त्र होकर स्नान नहीं करेंगी। इसके बाद कान्हा ने उनके वस्त्र लौटा दिए।
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नागाजी की समाधि पर उमड़ा सैलाब
दही-जलेबी के भोग में शामिल हुए श्रद्धालु कदमखंडी की चीरहरण लीला के साथ संत नागाजी महाराज की भजन परंपरा भी इस स्थल को विशेष बनाती है। शुक्रवार को नागाजी महाराज की समाधि पर दही-जलेबी का भोग लगाया गया। भोग प्रसाद पाने के लिए आसपास के दर्जनों गांवों से लोग कदमखंडी पहुंचे। समाधि पर दर्शन और प्रसाद के लिए दिनभर श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहा। मान्यता है कि नागाजी महाराज कदमखंडी में भजन किया करते थे। उनकी जटाएं यहां एक झाड़ी में उलझ गई थीं। श्रीकृष्ण ने उनकी जटाएं सुलझाईं और राधारानी के साथ उन्हें दर्शन दिए। इसी प्रसंग से नागाजी को चतुर नागाजी के नाम से भी जाना जाता है।
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आज करहला, मढ़ोई और राधाबाग में महारास

बूढ़ी लीला महोत्सव के क्रम में आज करहला, मढ़ोई और बरसाना के राधाबाग में महारास लीला होगी। करहला में सुबह नौ बजे महारास का मंचन होगा। मढ़ोई में राधाकृष्ण के स्वरूप प्राचीन सवा पांच किलो वजनी स्वर्ण मुकुट धारण कर महारास करेंगे। शाम पांच बजे बरसाना के राधाबाग में महारास लीला होगी। इन लीलाओं के साथ ही बूढ़ी लीला महोत्सव का समापन होगा।
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